590 करोड़ बैंक घोटाले में 2 IAS अफसरों से CBI पूछताछ

हरियाणा के 590 करोड़ IDFC-AU बैंक घोटाले में CBI ने दो IAS अधिकारियों से पूछताछ की और उनके मोबाइल जब्त किए। मामले में फर्जी खातों और संदिग्ध लेन-देन की जांच जारी है।

590 करोड़ बैंक घोटाले में 2 IAS अफसरों से CBI पूछताछ

590 करोड़ के बैंक घोटाले में CBI ने हरियाणा के 2 IAS अधिकारियों से पूछताछ की

सीबीआई ने संदेह के आधार पर दोनों अफसरों के मोबाइल फोन जब्त किए

मामले में फर्जी खातों और करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन की जांच तेज हुई

हरियाणा के बहुचर्चित 590 करोड़ रुपए के IDFC-AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने सरकार से 17-A के तहत मंजूरी मिलने के बाद अब वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी है।

शनिवार को सीबीआई की टीम ने इस मामले में सीनियर IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल और मोहम्मद साइन से लंबी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई सवालों के जवाबों में संदेह होने पर जांच एजेंसी ने दोनों अधिकारियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए।

मामले की पुष्टि के लिए जब मीडिया ने दोनों अधिकारियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके फोन स्विच ऑफ मिले। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई अब मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच करेगी।

इस कार्रवाई के बाद हरियाणा की नौकरशाही में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर पहले इस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपी गई थी, जिसके बाद अब सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली है। सरकार द्वारा 17-A के तहत अनुमति दिए जाने को बड़े प्रशासनिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

जांच के दायरे में आए अधिकारी पहले पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम और पंचकूला नगर निगम जैसे अहम विभागों में तैनात रह चुके हैं। इन विभागों में फर्जी खातों और संदिग्ध भुगतान के जरिए करोड़ों रुपए के लेन-देन की जांच चल रही है।

इस मामले में अब तक 3 लेखा अधिकारियों को बर्खास्त किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों के बयान, फाइल मूवमेंट, दस्तावेज और कथित ऑडियो-डिजिटल रिकॉर्डिंग में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।

सूत्रों के अनुसार, रिकॉर्डिंग में फंड ट्रांसफर, बैंक खातों के संचालन और कार्रवाई से बचने के तरीकों पर बातचीत के संकेत मिले हैं। सीबीआई इन रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच करा रही है।

इस घोटाले का खुलासा 2014 बैच के IAS अधिकारी अनीश यादव की बनाई गई जांच कमेटी से हुआ था। वर्ष 2024 में तत्कालीन एग्रीकल्चर डायरेक्टर अनीश यादव ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर IDFC बैंक में 50 करोड़ और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में 25 करोड़ रुपए जमा किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत विभाग में तैनात एक बड़े अधिकारी की ओर से दूसरे अधिकारियों पर दोनों बैंकों में खाते खुलवाने का दबाव बनाया गया था। इस संबंध में IAS अधिकारी डीके बेहरा की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया था, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर नए बैंक खाते खोलने का जिक्र किया गया।

मामले में पंचायत विभाग के बर्खास्त सुपरिटेंडेंट नरेश कुमार का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। विजिलेंस जांच में उसके खाते में 11 करोड़ रुपए आने के सबूत मिले थे। आरोप है कि इस रकम से उसने फॉर्च्यूनर गाड़ी खरीदी, मोहाली में फ्लैट लिया और बेटी के खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए। फिलहाल नरेश कुमार जेल में है और सीबीआई उससे पूछताछ कर रही है।