661 करोड़ का बैंक घोटाला: आखिर किस IAS की गाड़ी में रखे गए थे ₹2 करोड़?
हरियाणा बैंक घोटाले की जांच में CBI को कथित ₹2 करोड़ कैश से जुड़ी व्हाट्सएप चैट मिली है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बीच IAS अधिकारी से दोबारा पूछताछ की तैयारी है।
➤ CBI के हाथ लगी कथित व्हाट्सएप चैट में ₹2 करोड़ कैश का जिक्र
➤ 2009 बैच के IAS मनीराम शर्मा से एक दौर की पूछताछ, दूसरे की तैयारी
➤ बैंक घोटाले में डिजिटल साक्ष्यों और कैश मूवमेंट की फोरेंसिक जांच तेज
हरियाणा के चर्चित सरकारी बैंक घोटाले की जांच के दौरान CBI के हाथ एक अहम व्हाट्सएप चैट लगी है। सूत्रों के मुताबिक इस चैट में 2009 बैच के IAS अधिकारी मनीराम शर्मा की गाड़ी में ₹2 करोड़ नकदी रखवाने का जिक्र किया गया है। दावा किया जा रहा है कि संबंधित चैट पर उनकी ओर से थंब्स-अप का जवाब भी दिया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
सूत्रों के अनुसार चैट में आगे यह भी उल्लेख है कि सफेद रंग की एक गाड़ी में एक व्यक्ति नकदी रखकर आया था। अब CBI इस चैट, मोबाइल डेटा, लोकेशन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच करा रही है। जांच एजेंसी इसे कथित कैश मूवमेंट से जुड़ा महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मानकर इसकी पड़ताल कर रही है।
घोटाले के समय मनीराम शर्मा हरियाणा में लेबर कमिश्नर के पद पर तैनात थे, जबकि वर्तमान में वे स्वास्थ्य सचिव हैं। CBI श्रम विभाग में उनकी तैनाती के दौरान सरकारी धन को संबंधित बैंकों में ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया में उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में उनसे एक बार पूछताछ हो चुकी है और अब दूसरे दौर की पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
जांच एजेंसी इस पूरे मामले की जांच 'डिपार्टमेंट-टू-डिपार्टमेंट इन्वेस्टिगेशन मॉडल' के तहत कर रही है। इसके अंतर्गत प्रत्येक विभाग की फाइलें, बैंक लेनदेन, जिम्मेदार अधिकारियों और कथित लाभार्थियों की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार दो विभागों की जांच लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य विभागों में जांच जारी है।
अब तक CBI इस मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी पंकज सिंह और आर.के. सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और कथित कैश मूवमेंट से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले की मॉनिटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर पर की जा रही है। बताया जा रहा है कि जांच की प्रगति से जुड़ी नियमित रिपोर्ट केंद्रीय स्तर पर भेजी जा रही है और वरिष्ठ अधिकारियों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय भी आवश्यक मंजूरी के बाद ही लिए जा रहे हैं।
Akhil Mahajan