फसल बीमा योजनाओं में बीमा कंपनियों को फायदा, किसान को नहीं: हरि शरण देवगन

पानीपत में हरि शरण देवगन ने किसान संकट, बढ़ती खेती लागत, MSP और कृषि नीतियों की खामियों पर गंभीर चिंता जताई।

फसल बीमा योजनाओं में बीमा कंपनियों को फायदा, किसान को नहीं:  हरि शरण देवगन

• पानीपत में हरि शरण देवगन ने किसान संकट पर सरकार को घेरा
• खेती की बढ़ती लागत और घटती आय पर गंभीर चिंता
• कृषि भविष्य के लिए तकनीक, MSP और नीति सुधार पर जोर


हरियाणा दौरे के तहत प्रख्यात किसान नेता और सामाजिक चिंतक हरि शरण देवगन शुक्रवार को पानीपत पहुंचे। यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने देश के किसानों की मौजूदा हालत, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और सरकारी नीतियों की खामियों पर गंभीर और तथ्यात्मक मंथन किया। यह संवाद केवल शिकायतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि के भविष्य को लेकर ठोस सवाल भी खड़े करता नजर आया।

हरि शरण देवगन ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी किसान आत्मनिर्भर नहीं हो सका। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसान की आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली और मजदूरी हर स्तर पर महंगी हो चुकी है, जबकि फसलों के दाम आज भी बाजार और बिचौलियों के भरोसे हैं।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज भी देश का किसान कर्ज के सहारे खेती करने को मजबूर है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं, जो कई बार उन्हें आत्महत्या जैसे दर्दनाक कदम की ओर धकेल देता है। देवगन ने कहा कि किसान पीछे नहीं जा रहा, बल्कि उसे पीछे धकेला जा रहा है

नई तकनीकों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीक, ड्रिप इरिगेशन, सोलर पंप, डिजिटल मंडियां, फसल बीमा और वैज्ञानिक खेती आज समय की जरूरत हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन योजनाओं का लाभ सीमित किसानों तक ही पहुंच पा रहा है। छोटे और सीमांत किसान या तो जानकारी के अभाव में या फिर जटिल प्रक्रियाओं के कारण इनसे बाहर रह जाते हैं।

सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हरि शरण देवगन ने कहा कि नीतियां कागजों पर बनती हैं, लेकिन क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। MSP की कानूनी गारंटी आज भी अधूरी मांग है। फसल बीमा योजनाओं में बीमा कंपनियों को फायदा मिलता है, किसान को नहीं। मंडी व्यवस्था कमजोर हुई है और निजी कंपनियों का दबाव बढ़ा है, जिसका सीधा असर किसान की आय पर पड़ा है।

उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता के रूप में देखना होगा। कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए दीर्घकालिक नीति, पारदर्शी व्यवस्था और किसानों की सीधी भागीदारी जरूरी है।

पत्रकार वार्ता के अंत में हरि शरण देवगन ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर केवल किसान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। उन्होंने किसान, समाज और सरकार—तीनों के बीच संवाद और साझा समाधान की अपील की।