गुरुग्राम में CM सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने पर 17 पुलिसकर्मी सस्पेंड, दोनों कांग्रेस जिलाध्यक्ष गायब
गुरुग्राम में CM नायब सिंह सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने पर सुरक्षा चूक के आरोप में SHO समेत 17 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए, 9 कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए
➤ सुरक्षा में चूक और इंटेलिजेंस फेलियर पर SHO समेत 17 पुलिसकर्मी निलंबित
➤ कांग्रेस के 9 कार्यकर्ता गिरफ्तार, सभी बेल बांड पर छूटे और पुलिस ने घर तक छोड़ा
➤ FIR में नामजद दोनों जिलाध्यक्ष पंकज डावर और वर्धन यादव शुक्रवार शाम से गायब
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने के मामले में गुरुग्राम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक और इंटेलिजेंस फेलियर के आरोप में सिविल लाइंस थाने के एसएचओ समेत 17 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री के गुरुग्राम आगमन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अचानक सड़क पर आकर उनके काफिले के सामने काले झंडे लहराए थे और गो बैक के नारे लगाए थे। घटना के बाद पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की, वहीं सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर पुलिसकर्मियों पर भी गाज गिरी है।
जानकारी के अनुसार निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में सिविल लाइंस थाने में तैनात नौ पुलिसकर्मी, क्यूआरटी टीम के छह पुलिसकर्मी और सिक्योरिटी ब्रांच का एक एएसआई शामिल है। सिविल लाइंस थाने के SHO विजेंद्र कुमार के अलावा दो एएसआई चांद राम और अमित कुमार समेत अन्य हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को भी निलंबित किया गया है।
पुलिस अधिकारियों और प्रवक्ता की ओर से हालांकि निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में विस्तृत जानकारी देने से भी इनकार किया है। इसके अलावा क्यूआरटी वेस्ट टीम के इंचार्ज समेत छह पुलिसकर्मियों और SIS वेस्ट ब्रांच के एएसआई अमित कुमार को भी सस्पेंड किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री के काफिले के सामने अचानक हुआ विरोध प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के गुरुग्राम पहुंचने के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज डावर और वर्धन यादव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़क पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काले झंडे लहराए और गो बैक के नारे लगाए।
मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान हुए इस प्रदर्शन को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर माना गया। घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार पूरी घटना को इंटेलिजेंस फेलियर से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी आधार पर सिविल लाइंस थाने के SHO सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
रात में आठ कांग्रेस कार्यकर्ता गिरफ्तार, शनिवार को एक और गिरफ्तारी
घटना के बाद गुरुग्राम पुलिस ने शुक्रवार रात कार्रवाई करते हुए आठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में नीरज यादव, शिव कुमार, निखिल, अनुज, हरकेश प्रधान, अमन प्रजापति, राजीव यादव और हरेंद्र शामिल हैं।
इसके बाद शनिवार को पुलिस ने एक और कांग्रेस कार्यकर्ता सचिन को भी गिरफ्तार कर लिया। इस तरह मामले में गिरफ्तार किए गए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या नौ हो गई।
सभी गिरफ्तार आरोपियों को डीसीपी वेस्ट करण गोयल के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद शनिवार शाम करीब सात बजे सभी को बेल बांड पर छोड़ दिया गया। पुलिस खुद अपनी गाड़ी में बैठाकर उन्हें उनके घर तक छोड़कर आई।
सिविल लाइंस थाने के बाहर दिनभर जुटे रहे कांग्रेस नेता-कार्यकर्ता
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद दिनभर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता सिविल लाइंस थाने के बाहर मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं की ओर से गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर पुलिस कार्रवाई पर नजर रखी गई।
डीसीपी वेस्ट करण गोयल ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और सभी को छोड़ दिया गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर जांच आगे बढ़ा रही है।
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई दो स्तरों पर हुई है। एक तरफ काफिले के सामने विरोध प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है।
FIR में दोनों जिलाध्यक्षों के नाम, लेकिन शुक्रवार शाम से फोन बंद
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्षों पंकज डावर और वर्धन यादव को लेकर है। एफआईआर में दोनों नेताओं के नाम दर्ज हैं। बताया गया है कि दोनों शुक्रवार शाम से ही गायब हैं और उनके फोन स्विच ऑफ हैं।
पुलिस से दोनों नेताओं के बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन पुलिस ने उनके बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया। वहीं कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी दोनों जिलाध्यक्षों के बारे में कोई खबर नहीं होने की बात सामने आई है।
दोनों जिलाध्यक्षों के अचानक संपर्क से बाहर होने के बाद मामले को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। पुलिस अब एफआईआर में नामजद दोनों नेताओं की भूमिका और घटना के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर भी जांच कर रही है।
सुरक्षा चूक ने खड़े किए कई सवाल
मुख्यमंत्री के काफिले के सामने प्रदर्शनकारियों के पहुंचने के बाद सबसे बड़ा सवाल VIP सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठा है। निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का काफिले के सामने पहुंचना पुलिस और इंटेलिजेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इसी वजह से पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 17 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। कार्रवाई में थाना स्तर के पुलिसकर्मियों के साथ क्यूआरटी और सिक्योरिटी ब्रांच से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं।
अब जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को काफिले के रास्ते तक पहुंचने से पहले क्यों नहीं रोका गया और सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि प्रदर्शन की सूचना पहले से थी या नहीं और इसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों में कमी कैसे रह गई।
फिलहाल मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और बाद में बेल बांड पर रिहाई हो चुकी है, जबकि सुरक्षा चूक को लेकर पुलिस विभाग की कार्रवाई सामने आ चुकी है। पंकज डावर और वर्धन यादव के बारे में अभी पुलिस और कांग्रेस नेताओं के पास स्पष्ट जानकारी नहीं है। मामले की जांच जारी है।
Akhil Mahajan