पहली बार लोन लेना है तो सिबिल स्कोर जरूरी नहीं, जानें किन बातों पर ध्यान दें

पहली बार लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं। बैंक आय, व्यवसाय स्थिरता, को-अप्लीकेंट व दस्तावेजों पर ध्यान देता है। गारंटर से लाभ।

पहली बार लोन लेना है तो सिबिल स्कोर जरूरी नहीं, जानें किन बातों पर ध्यान दें

➤ पहली बार लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं, अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है
➤ स्थिर आय, व्यवसाय की विश्वसनीयता, आयु, प्रोफाइल और बचत व्यवहार पर ध्यान दिया जाता है
➤ को-अप्लीकेंट, गारंटर और संपत्ति गारंटी से लोन स्वीकृति आसान होती है

पहली बार लोन लेने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर) पहली बार लोन लेने के लिए आवश्यक नहीं होता। अधिकांश लोग मानते हैं कि लोन स्वीकृति का सबसे महत्वपूर्ण आधार सिबिल स्कोर होता है, लेकिन यह केवल उन लोगों पर लागू होता है जिन्होंने पहले से क्रेडिट कार्ड या अन्य प्रकार का ऋण लिया हो। पहली बार लोन लेने वाले व्यक्ति के पास कोई क्रेडिट हिस्ट्री न होने की स्थिति में बैंक अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करता है ताकि वह सुनिश्चित कर सके कि ऋण उचित व्यक्ति को दिया जाए।

सबसे पहले बैंक आवेदक की मासिक आय और उसकी स्थिरता पर ध्यान देता है। यदि व्यक्ति नौकरीपेशा है तो सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट व फॉर्म 16 की मांग की जाती है। स्वरोज़गारियों के मामले में आयकर रिटर्न, जीएसटी रिटर्न, बैलेंस शीट आदि का मूल्यांकन किया जाता है। स्थिर और नियमित आय बैंक को भरोसा देती है कि लोन का भुगतान समय पर होगा।

इसके अतिरिक्त व्यवसाय की विश्वसनीयता भी परखी जाती है। नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए यह देखा जाता है कि वह किस कंपनी में कार्यरत है। बड़ी, प्रतिष्ठित व स्थिर कंपनियों में काम करना अधिक विश्वसनीय माना जाता है। वहीं, यदि स्वयं का व्यवसाय है तो उसकी उम्र, टर्नओवर और वृद्धि की संभावनाओं की भी जांच होती है।

आयु और प्रोफाइल को भी लोन स्वीकृति में अहम माना जाता है। युवा व्यक्ति जिनके पास लंबा कार्यकाल शेष होता है, उन्हें बैंक सुरक्षित मानता है। पेशेवर पृष्ठभूमि मजबूत होने पर बैंक का विश्वास और भी बढ़ जाता है।

ऋण चुकाने की क्षमता को समझने के लिए बैंक आमदनी और खर्च के अनुपात (DTI – Debt to Income Ratio) का आकलन करता है। आम तौर पर बैंक चाहता है कि ईएमआई कुल आय का 40-50% से अधिक न हो।

साथ ही बैंक बचत व बैंकिंग व्यवहार पर भी गौर करता है। नियमित बचत, अनुशासित लेन-देन और बिना चेक बाउंस के बैंक खाता होना सकारात्मक संकेत होता है।

अगर आवेदक ने बहुत अधिक राशि की मांग की है जबकि उसकी आय कम है, तो बैंक ऋण देने में झिझकता है। अवधि कम होने पर ईएमआई अधिक हो तो भी जोखिम की भावना होती है। होम लोन, कार लोन या गोल्ड लोन जैसे ऋणों के मामले में संपत्ति या गहनों की गारंटी होने से ऋण स्वीकृति आसान होती है।

पहली बार लोन लेने पर को-अप्लीकेंट या गारंटर की व्यवस्था की जाती है। माता-पिता, जीवनसाथी या रिश्तेदार गारंटर बन सकते हैं। इससे बैंक को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

अंत में, आवेदक द्वारा दिए गए सभी दस्तावेज और जानकारी सत्य और प्रमाणित होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर आवेदन अस्वीकृत हो सकता है।

यह समझना जरूरी है कि पहली बार लोन लेने वालों के लिए बैंक सिर्फ सिबिल स्कोर पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि आय, स्थिरता, विश्वसनीयता, बचत और सुरक्षा व्यवस्था को परखता है ताकि लोन सुरक्षित रूप से दिया जा सके।