शुगर कंट्रोल के आसान उपाय,दाल, चना और हरी सब्जियां आएंगी काम
डायबिटीज में ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए दालें, चने, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित भोजन अपनाएं। नियमित जांच और शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।
डायबिटीज में दालें, चने और हरी सब्जियां ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में कर सकती हैं मदद
➤ भारत में 10 करोड़ से ज्यादा वयस्क डायबिटीज से पीड़ित, 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की चपेट में
➤ साबुत अनाज, फाइबर और संतुलित थाली के साथ नियमित जांच व शारीरिक गतिविधि भी जरूरी
डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना लंबे समय तक सेहत के लिए जरूरी होता है। इसके लिए दवाओं के साथ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर जांच की अहम भूमिका रहती है। अच्छी बात यह है कि रोजमर्रा की रसोई में मौजूद दालें, चने, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कुछ मसाले संतुलित डाइट का हिस्सा बनकर ब्लड शुगर को मैनेज करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन खाद्य पदार्थों को दवाओं का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुमानों के अनुसार, भारत में डायबिटीज से पीड़ित वयस्कों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है। इसके अलावा लगभग 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज से पीड़ित हैं। चिंता की बात यह भी है कि हेल्थ सर्वे के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को अपनी बीमारी के बारे में पता नहीं होता या वे अपनी स्थिति से अनजान रहते हैं। वहीं, जिन लोगों में बीमारी की पहचान हो जाती है, उनमें से आधे से भी कम लोग ब्लड शुगर का निर्धारित स्तर हासिल कर पाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज अब अलग-अलग उम्र के लोगों में देखी जा रही है। ऐसे में कम उम्र से ही खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है। केवल चीनी छोड़ देना ही ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। रोटी, चावल, नाश्ता, फल और दिनभर खाई जाने वाली दूसरी चीजें भी शुगर के स्तर को प्रभावित करती हैं। इसलिए भोजन की गुणवत्ता के साथ उसकी मात्रा और संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।
डायबिटीज में दालें और चने क्यों हैं फायदेमंद?
मूंग, मसूर, चना, राजमा और अन्य बीन्स को संतुलित आहार में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इनमें फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है। फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है, जिससे भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने की आशंका कम हो सकती है।
प्रोटीन शरीर को स्वस्थ रखने और पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करने में भी मदद करता है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भोजन में दालों और चने को उचित मात्रा में शामिल करना उपयोगी विकल्प हो सकता है।
दाल खाते समय उसके साथ सब्जियां और सीमित मात्रा में रोटी या चावल लेना बेहतर रहता है। इसके अलावा भोजन में जरूरत से ज्यादा तेल और नमक डालने से बचना चाहिए। इस तरह एक ही भोजन में अलग-अलग पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
हरी सब्जियां ब्लड शुगर मैनेज करने में कैसे करती हैं मदद?
डायबिटीज के मरीजों के लिए पालक, लौकी, भिंडी और दूसरी बिना स्टार्च वाली सब्जियां संतुलित डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं। इनमें फाइबर, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं। आमतौर पर इन सब्जियों में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी कम होती है।
हरी सब्जियां खाने से भोजन में फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इससे संतुलित आहार तैयार करने में मदद मिलती है। कई अध्ययनों में भिंडी का पानी पीने को डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद बताया गया है, लेकिन इसे ब्लड शुगर नियंत्रित करने का प्रमाणित इलाज या दवाओं का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
संतुलित थाली तैयार करने का आसान तरीका
डायबिटीज में भोजन की थाली का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। इसके लिए एक आसान तरीका अपनाया जा सकता है।
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आधी प्लेट: हरी सब्जियां और दूसरी बिना स्टार्च वाली सब्जियां रखें।
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एक चौथाई प्लेट: प्रोटीन वाली चीजें, जैसे दालें और बीन्स शामिल करें।
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बाकी एक चौथाई प्लेट: अनाज, जैसे रोटी या चावल, उचित मात्रा में लें।
इस तरह भोजन में सब्जियों, प्रोटीन और अनाज का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, भोजन की सही मात्रा व्यक्ति की सेहत, दवाओं, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
साबुत अनाज और सीड्स को डाइट से न करें बाहर
डायबिटीज में साबुत अनाज और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना उपयोगी हो सकता है। ओट्स, दलिया और दूसरे साबुत अनाज फाइबर की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं। इसी तरह अलसी और चिया सीड्स भी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने से आहार की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इसके लिए कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं।
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मैदा और अत्यधिक रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज से बनी चीजों को प्राथमिकता दें।
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अलसी, चिया सीड्स और मेवे खाएं, लेकिन उनकी मात्रा पर ध्यान रखें। इनमें से कुछ खाद्य पदार्थों में कैलोरी अधिक होती है।
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किसी पैकेट पर केवल मल्टीग्रेन या ब्राउन लिखा होने के कारण उसे हेल्दी न मानें। खरीदने से पहले उसका पोषण लेबल जरूर देखें।
साबुत अनाज चुनते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर व्यक्ति की कार्बोहाइड्रेट संबंधी जरूरत एक जैसी नहीं होती। इसलिए भोजन की मात्रा और प्रकार को अपनी ब्लड शुगर रीडिंग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर है।
रसोई में इस्तेमाल होने वाले ये मसाले भी हैं चर्चा में
भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले कुछ मसालों के संभावित स्वास्थ्य लाभों पर भी अध्ययन किए गए हैं। हालांकि, इनके प्रभाव व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकते हैं और इन्हें डायबिटीज के इलाज के रूप में नहीं देखना चाहिए।
1. दालचीनी
दालचीनी को लेकर कुछ अध्ययनों में इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार की संभावना पर चर्चा की गई है। हालांकि, ब्लड शुगर नियंत्रित करने में इसके प्रभाव को लेकर पर्याप्त और निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे दवा के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
2. मेथी दाना
मेथी दाने में फाइबर पाया जाता है। यह भोजन के पाचन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और खाने के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मेथी का इस्तेमाल किस मात्रा में और किस रूप में करना उचित है, इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
3. हल्दी
हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है, जिसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं। इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर अध्ययन किए गए हैं, लेकिन हल्दी को डायबिटीज का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता।
4. जीरा
जीरा भारतीय भोजन में आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है और पाचन के लिए उपयोगी माना जाता है। कुछ अध्ययनों में इसके ब्लड शुगर पर संभावित प्रभावों की भी जांच की गई है। हालांकि, इसे शुगर नियंत्रित करने का निश्चित उपाय नहीं समझना चाहिए।
सिर्फ मीठा छोड़ना काफी नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
डायबिटीज में खान-पान सुधारने का मतलब केवल चीनी और मिठाइयों से दूरी बनाना नहीं है। रोजाना खाई जाने वाली रोटी, चावल, नाश्ते और दूसरी कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजों की मात्रा भी ब्लड शुगर पर असर डाल सकती है। इसलिए भोजन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर की जांच भी अहम है। समय-समय पर जांच कराने से यह समझने में मदद मिलती है कि भोजन, गतिविधि और निर्धारित उपचार का शुगर के स्तर पर कैसा असर पड़ रहा है।
सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू खाद्य पदार्थ डायबिटीज मैनेजमेंट में मददगार हो सकते हैं, लेकिन वे दवाओं या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हैं। दवाएं अपने आप बंद या कम नहीं करनी चाहिए। यदि ब्लड शुगर लगातार निर्धारित सीमा से बाहर रहता है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Akhil Mahajan