डीसीआरयूएसटी मुरथल में कर्मचारियों का रोष, लंबित मांगों को लेकर 28 सितंबर से धरने का ऐलान
डीसीआरयूएसटी मुरथल में कर्मचारियों ने लंबित मांगों, HKRNL और DC Rate कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर रोष जताया और 28 सितंबर से धरने की चेतावनी दी।
➤ लंबित मांगों और प्रशासन के रवैये को लेकर कर्मचारियों में रोष
➤ HKRNL और DC Rate कर्मचारियों की सेवा-वेतन संबंधी समस्याओं का मुद्दा
➤ समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 28 सितंबर से धरने की चेतावनी
मुरथल। दीनबन्धु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल यानी डीसीआरयूएसटी में कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर विरोध की स्थिति बन गई है। कर्मचारियों की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन पर मांगों को लंबित रखने और कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों में उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि HKRNL कर्मचारी, DC Rate कर्मचारी, नियमित कर्मचारी, छात्र और शिक्षक अलग-अलग स्तर पर अपनी मांगों को लेकर परेशान हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये के प्रति सभी वर्गों में असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कुलपति की ओर से कई मामलों में एक्सटेंशन पीरियड का हवाला देकर मांगों पर निर्णय नहीं लिया जा रहा, जबकि दूसरी ओर अन्य प्रशासनिक कार्य किए जा रहे हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो 28 सितंबर 2026 से धरना शुरू किया जाएगा।
कर्मचारियों की ओर से जारी किए गए विवरण में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में कर्मचारियों से जुड़ी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इनमें One Step Down के 18 निवासी मकानों का आवंटन भी शामिल है। कर्मचारियों के मुताबिक ये मकान खाली पड़े हैं और पात्र कर्मचारियों को आवंटित करने की फाइल एक महीने से भी अधिक समय से चल रही है, लेकिन अभी तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी तरह कई कर्मचारियों की ACP भी कई वर्षों से लंबित बताई गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें ACP का लाभ नहीं दिया जा रहा और इसके लिए कुलपति के एक्सटेंशन पर होने का हवाला दिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि जब कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों में निर्णय की बात आती है तो एक्सटेंशन पीरियड को कारण बताया जाता है, जबकि अन्य प्रशासनिक फैसलों और समितियों के गठन में इसे बाधा नहीं माना जाता।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में नई समितियों का गठन किया जा रहा है और कुछ लोगों को सदस्य या संयोजक बनाया जा रहा है। उनका यह भी आरोप है कि अपनी पसंद के अनुसार पूरी की पूरी समितियों में बदलाव किए जा रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार इन परिस्थितियों को लेकर प्रशासन के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं और उन्हें दोहरी नीति जैसा महसूस हो रहा है।
HKRNL और DC Rate कर्मचारियों की समस्याओं पर भी रोष
कर्मचारियों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी HKRNL और DC Rate पर कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को हो रही है। उनके मुताबिक हरियाणा सरकार की ओर से HKRNL कर्मचारियों की एक्सटेंशन अवधि 01.09.2026 से 31.10.2026 तक बढ़ाई गई है। इसी तरह DC Rate कर्मचारियों की एक्सटेंशन भी अक्टूबर माह तक बढ़ाए जाने की बात कही गई है। कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित आदेश की प्रति उनके पास मौजूद है।
कर्मचारियों का आरोप है कि इसके बावजूद विश्वविद्यालय में कार्यरत HKRNL और DC Rate कर्मचारियों की एक्सटेंशन अभी तक नहीं की गई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि सरकार की ओर से आया एक्सटेंशन का पत्र विश्वविद्यालय को एड्रेस नहीं है। कर्मचारियों ने इस तर्क पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इसका सीधा असर उनकी सेवा निरंतरता और वेतन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
कर्मचारियों के मुताबिक HKRNL पोर्टल पर एक्सटेंशन अपडेट नहीं होने की स्थिति में माह की 30 तारीख के बाद अटेंडेंस शीट डाउनलोड नहीं हो पाएगी। इससे वेतन भुगतान में बाधा आने की आशंका जताई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर एक्सटेंशन अपडेट नहीं होने से हर महीने कर्मचारियों के सामने सेवा और वेतन को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती है।
तीन HKRNL कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा
कर्मचारियों की ओर से यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय में कार्यरत 3 HKRNL कर्मचारी पुनीत ड्राफ्ट्समैन, सुभाष लिफ्टमैन और विरमल माली का लगभग 3 माह का वेतन पिछले एक वर्ष से लंबित है। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से लंबित इस भुगतान का अभी तक निपटारा नहीं किया गया है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने DC Rate पर लंबे समय से सेवा दे रहे 13 अनुभवी कर्मचारियों के लिए SETC टेस्ट की अनिवार्यता को लेकर भी आपत्ति जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों पर अब SETC टेस्ट की अनिवार्यता लागू किए जाने से उनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था उनके लिए न्यायसंगत नहीं है।
कर्मचारियों के अनुसार DC Rate कर्मचारियों की एक्सटेंशन भी समय पर जारी नहीं की जाती। इसके कारण उन्हें हर महीने वेतन और सेवा निरंतरता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारियों ने इन सभी मामलों को विश्वविद्यालय प्रशासन की कर्मचारी हितों से जुड़ी नीतियों से जोड़ते हुए तत्काल समाधान की मांग की है।
28 सितंबर से धरने की चेतावनी
कर्मचारियों की ओर से कहा गया है कि यदि उनकी लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो वे 28.09.2026 से धरने पर जाने के लिए मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने कहा है कि धरना उनकी लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए उठाया जाने वाला कदम होगा।
कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समाधान की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन पर डालते हुए कहा है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उन्हें धरने पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
Akhil Mahajan