सरपंच से मारपीट के मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष गिरफ्तार, जातिसूचक शब्द कहने का आरोप
हरियाणा के सोनीपत जिले में खेवड़ा गांव के अनुसूचित जाति सरपंच से मारपीट और जातिसूचक शब्द कहने के आरोप में भाजपा जाखौली मंडल अध्यक्ष को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। चाचा बलराम पहले ही जमानत पर है।
➤ भाजपा मंडल अध्यक्ष गिरफ्तार जातिसूचक शब्द कहने और सरपंच से मारपीट का आरोप
➤ सोनीपत के खेवड़ा गांव में सरपंच ने लगाया धमकी और दबाव डालने का आरोप
➤ आरोपी को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया
सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले में भाजपा के जाखौली मंडल अध्यक्ष जोगिंद्र उर्फ शेखर को अनुसूचित जाति के सरपंच से मारपीट, जातिसूचक शब्द कहने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह मामला गांव खेवड़ा का है, जहां सरपंच बहादुर सिंह, जो अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं, ने भाजपा नेता और उसके चाचा बलराम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बहादुर सिंह ने 28 सितंबर को पुलिस आयुक्त को शिकायत दी थी कि 21 सितंबर को वह गांव के महिला सांस्कृतिक केंद्र में मरम्मत कार्य का निरीक्षण कर रहे थे, तभी आरोपी जोगिंद्र और उसके चाचा बलराम ने उन्हें अपने कार्यालय के सामने बुलाया।
सरपंच के अनुसार, वहां दोनों ने उन्हें जातिसूचक शब्द कहे, मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत में सरपंच ने यह भी लिखा कि आरोपी पंचायत के कामों में बिना अनुमति के हस्तक्षेप कर रहे थे और अपने मनमुताबिक कार्यों को पास करवाने का दबाव बना रहे थे।
सरपंच के मुताबिक, बलराम आंतिल खुद को जेई (जूनियर इंजीनियर) बताकर पंचायत के एमबी (मेजरमेंट बुक) भरने की बात करता था, जबकि उसकी कोई सरकारी नियुक्ति नहीं थी।
पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर बहालगढ़ थाना में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। आरोपी जोगिंद्र की ओर से अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।
मामले की जांच एसीपी निधि नैन की देखरेख में की गई। जांच के बाद पुलिस ने जोगिंद्र उर्फ शेखर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस पहले ही उसके चाचा बलराम को गिरफ्तार कर चुकी है, जो वर्तमान में जमानत पर बाहर है।
इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और सत्ता के दुरुपयोग का मामला बताया है, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सच्चाई जांच में सामने आएगी।
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