पानी की किल्लत पर फूटा गुस्सा, दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे किया जाम

भिवानी में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने हनुमान गेट पर हाईवे जाम कर दिया। प्रशासन ने दोपहर तक पानी की सप्लाई बहाल करने का आश्वासन दिया है।

पानी की किल्लत पर फूटा गुस्सा, दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे किया जाम

भिवानी में पानी संकट से नाराज लोगों ने किया रोड जाम
दिल्ली-पिलानी हाईवे पर 20-25 मिनट तक बाधित रहा ट्रैफिक
प्रशासन ने दोपहर तक सप्लाई बहाल करने का दिया आश्वासन


हरियाणा के भिवानी शहर में पानी की किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। सोमवार को हनुमान गेट क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने पेयजल समस्या से परेशान होकर रोड जाम कर दिया। इस दौरान लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें लंबे समय से पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। समस्या का समाधान नहीं होने पर मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

सड़क पर बल्लियां लगाते लोग व पहुंची पुलिस।

करीब 11:30 बजे महिलाओं और स्थानीय लोगों ने दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम करीब 20 से 25 मिनट तक लगा रहा। सूचना मिलने पर पुलिस और पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर जाम खुलवाया।

प्रदर्शनकारियों को समझाती पुलिस।

स्थानीय पार्षद विनोद प्रजापति ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लोगों के पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

उधर, विभाग के जेई ताजादीन ने बताया कि चौहान माता मंदिर के पास पाइपलाइन में लंबे समय से तकनीकी दिक्कत बनी हुई है। कई बार मरम्मत के बावजूद समस्या पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है। मंदिर के नीचे पाइपलाइन होने के कारण काम करने में भी परेशानी आती है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि दोपहर 1 बजे तक पानी की सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।

भिवानी में लोगों द्वारा किए गए रोड जाम का दृश्य।

स्थानीय निवासी महिला गुड्डी ने बताया कि पिछले एक महीने से पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है, जबकि पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा था। अब स्थिति और भी खराब हो गई है, जिससे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन का आश्वासन जमीन पर कब तक लागू होता है या लोगों को आगे भी ऐसे ही संघर्ष करना पड़ेगा।