संघर्षों के बीच चमकी किस्मत, हरियाणा की अंजू यादव बनीं राजस्‍थान में DSP

नारनौल की अंजू यादव ने पति की मौत और संघर्ष भरे जीवन के बावजूद मेहनत कर राजस्थान पुलिस सेवा में DSP का पद हासिल किया। जयपुर में आयोजित दीक्षांत परेड में उन्होंने शपथ ली।

संघर्षों के बीच चमकी किस्मत, हरियाणा की अंजू यादव बनीं राजस्‍थान में DSP

नारनौल की अंजू यादव बनीं DSP राजस्थान पुलिस अकादमी में दीक्षांत परेड
पति की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौसला संघर्ष से हासिल की बड़ी कामयाबी
पिता से मिली प्रेरणा और बेटे के सहारे बढ़ाया कदम परिवार का नाम किया रोशन


 हरियाणा के नारनौल जिले की बेटी अंजू यादव ने संघर्ष और हिम्मत से अपनी पहचान बनाई है। 37 वर्षीय अंजू ने राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में अधिकारी बनकर अपने मायके, ससुराल और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। बुधवार को जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित 55वें बैच के दीक्षांत परेड समारोह में उन्होंने DSP पद की शपथ ली।

अंजू की यह सफलता आसान नहीं थी। 2021 में पति के निधन के बाद जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें झकझोरा, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना हथियार बनाया। परिवार और पिता की प्रेरणा से उन्होंने लगातार मेहनत की और अब राजस्थान पुलिस की अहम जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है।

शिक्षा से सेवा तक का सफर

अंजू चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। गांव धौलेड़ा के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और डिस्टेंस लर्निंग से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद नारनौल के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन से बीएड किया।
उनकी शादी 2009 में अलवर जिले के गंडाला गांव में हुई थी। 2012 में बेटे का जन्म हुआ। लेकिन 2021 में बीमारी के कारण पति का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने नौकरी और पढ़ाई दोनों जारी रखीं।

नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा का सफर

अंजू अपने मायके और ससुराल में सरकारी नौकरी करने वाली पहली महिला बनीं। पहले वे 2016 से 2018 तक भिंड (मध्यप्रदेश) के जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षक रहीं। इसके बाद 2019 तक जयपुर के सरकारी स्कूल में अध्यापिका रहीं।
2019 से 2024 तक वे दिल्ली में सरकारी टीचर के तौर पर कार्यरत रहीं। इसी दौरान उन्होंने 2021 में निकली RPS की भर्ती परीक्षा दी। 2022 में मुख्य परीक्षा और 2023 में इंटरव्यू हुआ। चयन के बाद मई 2024 में उन्होंने DSP पद पर ज्वाइन किया।

11 महीने का कठिन प्रशिक्षण

राजस्थान पुलिस अकादमी में अंजू ने करीब 47 सप्ताह (11 महीने) का गहन प्रशिक्षण पूरा किया। इस दौरान उन्हें कानून व्यवस्था, साइबर क्राइम, फोरेंसिक साइंस, क्रिमिनोलॉजी और सॉफ्ट स्किल्स का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही भोपाल, गांधीनगर और अहमदाबाद जैसे प्रमुख पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा भी कराया गया।

पिता की प्रेरणा और बेटे की ताकत

अंजू ने अपने पिता लालाराम को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। अशिक्षित होने के बावजूद पिता ने उन्हें पढ़ाया, समाज की तानेबाजी सहकर भी बेटियों को आगे बढ़ाया और पोते की परवरिश खुद की।
अंजू ने कहा – “मेरे पिता हमेशा कहते थे, काला सिर का आदमी कुछ भी कर सकता है। यानी इंसान अगर ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं। यही बात मुझे हमेशा प्रेरित करती रही। बेटे मुकुल दीप को देखकर भी लगता कि मुझे उसके लिए कुछ करना है।"

सेवा ही संकल्प

दीक्षांत समारोह में DSP बनी अंजू यादव ने मंच से शपथ ली कि पुलिस सेवा उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का कर्तव्य है।