मां के लिव-इन पार्टनर ने 15 साल की नाबालिग बेटी से किया तीन बार रेप, पुलिस ने दर्ज किया केस
रोहतक में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला! 15 साल की नाबालिग बेटी के साथ उसकी मां के लिव-इन पार्टनर ने तीन बार दुष्कर्म किया। धमकी के कारण मासूम चुप रही, लेकिन तीसरी बार की हैवानियत ने उसे बोलने पर मजबूर कर दिया। आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में है।
➤ रोहतक में नाबालिग से तीन बार रेप
➤मां के लिव-इन पार्टनर पर दुष्कर्म का आरोप
➤पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की
रोहतक के एक गाँव से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नाबालिग लड़की के साथ उसकी मां के लिव-इन पार्टनर ने कथित तौर पर तीन बार दुष्कर्म किया। जानकारी के अनुसार, पीड़िता की मां ऑटो रिक्शा चलाती है और अपने पति को छोड़कर अपनी तीन बेटियों और एक बेटे के साथ लिव इन रिलेशनशिप में किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही थी। आरोप है कि इसी लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्ति ने महिला की 15 साल की नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया और इस जघन्य अपराध के बारे में किसी को भी बताने पर उसे मारने की धमकी दी।
पीड़ित नाबालिग शुरुआत में इस सदमे के कारण गुमसुम रहने लगी। आरोपी ने पहली बार रेप करने के दो दिन बाद फिर से नाबालिग से रेप किया और धमकी दी। जब अगले दिन आरोपी ने तीसरी बार इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया, तब नाबालिग ने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को पूरी बात बताई।
पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल करवाकर बयान भी दर्ज किए हैं। हालांकि, आरोपी इस समय फरार है और पुलिस की टीमें उसे पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस बीच, बाल कल्याण समिति (CWC) ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है। CWC चेयरमैन सतीश कौशिक ने नाबालिग लड़की की काउंसलिंग की। चेयरमैन कौशिक ने बताया कि 29 नवंबर को शिकायत दर्ज हुई थी। उन्होंने नाबालिग के पिता, जो अलग रहते हैं, उन्हें भी बुलाया। CWC ऑफिस में नाबालिग के माता-पिता से विस्तार से बात करके उन्हें समझाया गया, जिसके बाद नाबालिग को उनके साथ घर भेजा गया। CWC ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वह समय-समय पर नाबालिग के बारे में अपडेट लेती रहेगी ताकि उसकी सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।
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