सरकार सख्त, प्रशासन पस्त! तो क्या ऐसे बचेगी बेटियां

सोनीपत में पिछले पांच महीनों से एक भी पीएनडीटी रेड नहीं हुई, जिससे लिंगानुपात 901 से गिरकर 890 पर पहुँच गया। सीएमओ की चुप्पी और प्रशासन की लापरवाही पर कैबिनेट मंत्री ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

सरकार सख्त, प्रशासन पस्त! तो क्या ऐसे बचेगी बेटियां

  • सोनीपत सीएमओ महिला होने के बाद भी नहीं दिख रही कोई सख्त कार्रवाई 
  • पिछले 5 महीने से पीएनडीटी की कोई रेड नहीं 
  • बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ अभियान ने सोनीपत में तोड़ा दम
  • सोनीपत जिले का लिंगानुपात रहता था 900 से ऊपर अब पहुंचा 900 से नीचे 
  • लिंगानुपात 901 से 890 पर पहुंचा,जिला टॉप रहने वाला जिला डाउन नीचे से दूसरे स्थान पर आंकड़ा 
  • लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया गया सेल्फी प्वाइंट से लिया जा रहा बैरिकेड का काम
  • जिम्मेदार अधिकारियों की महज सफाई, मीडिया पर ही भड़ास निकलने का प्रयास
  • कैबिनेट मंत्री बोले अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई

सुशील मोर  



सोनीपत में बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ अभियान का दम निकलने का काम प्रशासन द्वारा किया जा रहा है, क्योंकि सोनीपत जिले के लिंगानुपात का गिरता हुआ इस बात को साबित भी कर रहा है।सोनीपत जिले में लिंगानुपात 901 से 890 पर पहुंचा गया है और जिम्मेदार अधिकारी महज सफाई दे रहे है।इतना ही नहीं लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया गया सेल्फी प्वाइंट से भी अब बैरिकेड का काम करवाया जा रहा है। पूरे मामले में सोनीपत सीएमओ ज्योत्सना ने मिडिया के कैमरे से दूरी बना ली और केबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार ने लापरवाह अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की बात कही है।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा प्रदेश के जिले पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी ताकि हरियाणा में लिंगानुपात में सुधार लाया जा सके और प्रधानमंत्री के अभियान की शुरुआत में असर भी देखने को मिला और बेटियों को बचाने के लिए जिला अस्पतालों में एक पीएनडीटी सेल भी बनाया गया है ताकि गैर कानूनी तरीके से होने वाले गर्भपात को रोका जा सके और बेटियों को बचाया जा सके। लेकिन केंद्र सरकार के इस अभियान का सोनीपत में दम अधिकारियों द्वारा निकला जा चुका है। जिले में फिलहाल हालत इतने जायदा खराब हैं कि पिछले 5 महीने से कोई भी पीएनडीटी की रेड तक नहीं हुई है और इसका पूरा असर देखने को मिला है ,सोनीपत जिले के लिंगानुपात में लगातार गिरावट देखी जा रही हैं और लिंगानुपात 901 से 890 पर पहुंच गया है। जिम्मेदार अधिकारी महज सफाई दे रहे हैं,सोनीपत में फिलहाल बेटियों को कोख में बचाने की जिम्मेदारी डॉ नितिन फ्लसवाल को दी गई है और सोनीपत पीएनडीटी अधिकारी बनाया गया है लेकिन इनका जवाब भी कुछ अलग ही सामने आया और अपनी सफाई देते हुए कहा कि लगातार करवाई की जा रही है।

 पूरे मामले में जहां सोनीपत सीएमओ ने मीडिया पर ही भड़ास निकालने का प्रयास किया और बोलने से ही मना कर दिया और जब मामले में कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि लिंगानुपात को सुधार करने के लिए ही हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की गई थी वही है अभियान बीजेपी सरकार के लिए बहुत जरूरी है और लिंगानुपात में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है लेकिन उसके बावजूद भी अगर सोनीपत में किसी अधिकारी द्वारा लापरवाही की गई है और लिंगानुपात गिरा है तो दो से अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।  बहरहाल प्रशासन द्वारा अभियान अभियान की तरफ ध्यान ना देना और जिम्मेदार अधिकारियों का सही ढंग से कार्य न करना लिंगानुपात गिरने का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। बहरहाल मामला अब सरकार के कैबिनेट मंत्रियों तक पहुंच चुका है, देखना होगा कि कब तक लापरवाह अफसरों पर  कार्रवाई होगी और सोनीपत लिंगानुपात में सुधार होगा।


सोनीपत पीएनडीटी अधिकारी डॉ. नितिन फ्लसवाल ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि कार्रवाई लगातार चल रही है, लेकिन जमीनी स्थिति उनके दावे से उलट दिखाई देती है। गिरते लिंगानुपात ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई या तो पर्याप्त नहीं है या फिर बिल्कुल प्रभावी नहीं।

कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार तक पहुँचा तो उन्होंने स्वीकार किया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा कि यदि सोनीपत में किसी अधिकारी की लापरवाही से लिंगानुपात गिरा है, तो ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रयास कर रही है कि अभियान को फिर से प्रभावी बनाया जाए और जिले में गिरता लिंगानुपात सुधारा जा सके।

बहरहाल, अधिकारियों की लापरवाही, निगरानी तंत्र की कमजोरी और पीएनडीटी रेड्स बंद होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यह सवाल अब गंभीर रूप से खड़ा हो रहा है कि यदि प्रशासन इसी तरह पस्त रहा, तो बेटियों को कैसे बचाया जाएगा। मामले के सरकार तक पहुँचने के बाद उम्मीद है कि कठोर कदम उठाए जाएँगे और सोनीपत में हालात सुधरेंगे।