राकेश टिकैत सहित 36 आरोपियों पर 11 साल पुराने मामले में आरोप तय, जानें

मुरादनगर गंग नहर कांड में राकेश टिकैत सहित 36 आरोपियों पर MP-MLA कोर्ट ने आरोप तय किए। डिस्चार्ज अर्जी खारिज, 2 जनवरी 2026 से ट्रायल शुरू होगा।

राकेश टिकैत सहित 36 आरोपियों पर 11 साल पुराने मामले में आरोप तय, जानें
  • राकेश टिकैत सहित 36 आरोपियों पर 11 साल पुराने मामले में आरोप तय
  • गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर ट्रायल का रास्ता साफ किया
  • मुरादनगर गंग नहर कांड में हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में केस चलेगा


किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के लिए 11 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गाजियाबाद की विशेष MP-MLA कोर्ट ने इस मामले में टिकैत सहित 36 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने सभी आरोपियों की ओर से दाखिल की गई डिस्चार्ज अर्जी को खारिज करते हुए नियमित ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है।

यह मामला 18 सितंबर 2014 का है, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले को खाली कराने के नोटिस के विरोध में आंदोलन किया गया था। इसी विरोध के दौरान भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल के कार्यकर्ताओं ने गाजियाबाद के मुरादनगर स्थित गंग नहर रेगुलेटर पर दिल्ली की पानी की आपूर्ति बाधित करने का प्रयास किया था।

प्रदर्शन के दौरान हालात बेकाबू हो गए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें पथराव, आगजनी और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आई थीं। प्रशासन का आरोप है कि इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

गाजियाबाद की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश निशांत मान ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोप तय करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की भूमिका की जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए।

इस केस में राकेश टिकैत के अलावा विधायक योगेश धामा, पूर्व मंत्री दलवीर सिंह, पूर्व विधायक सुदेश शर्मा, वीरपाल राठी और भगवती प्रसाद सहित कई राजनीतिक चेहरे आरोपी बनाए गए हैं। सभी पर हत्या के प्रयास, बलवा, आगजनी, सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।

बचाव पक्ष की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि 11 साल बीत जाने के बावजूद पुलिस ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है और यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी।

अदालत के आदेश के बाद अब मामले में नियमित सुनवाई होगी। अगली तारीख 2 जनवरी 2026 तय की गई है, जिस दिन गवाहों के बयान दर्ज किए जाने की संभावना है। इस फैसले के बाद किसान राजनीति और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।