पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने फ‍िर छोड़ी कांग्रेस पार्टी

नारनौल में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने पार्टी छोड़ दी है और 18 जनवरी को अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में इनेलो जॉइन करेंगे।

पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने फ‍िर छोड़ी कांग्रेस पार्टी

➤ नारनौल में कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका, पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने छोड़ी पार्टी
➤ गुरुग्राम में अभय सिंह चौटाला से मुलाकात, 18 जनवरी को इनेलो में होंगे शामिल
➤ अहीरवाल बेल्ट की राजनीति में हलचल, परिवार की रही है मजबूत पकड़



नारनौल। हरियाणा के नारनौल में कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने शनिवार को गुरुग्राम में इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला से मुलाकात की और 18 जनवरी को इनेलो जॉइन करने की घोषणा की।

पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि 18 जनवरी को नांगल चौधरी में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अभय सिंह चौटाला की मौजूदगी में वे औपचारिक रूप से इंडियन नेशनल लोकदल में शामिल होंगे। इस घटनाक्रम से अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति में नई हलचल मानी जा रही है।

राधेश्याम शर्मा वर्ष 2005 में नारनौल से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 2009 में कांग्रेस का दामन थामा और नांगल चौधरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2009 के बाद कांग्रेस से दूरी बनाते हुए उन्होंने 2014 में नांगल चौधरी से एक बार फिर निर्दलीय चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें करीब 15 हजार वोट मिले, लेकिन जीत हासिल नहीं हो सकी। इसके बाद वे दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

पूर्व विधायक ने 3 जनवरी को अभय सिंह चौटाला से मुलाकात की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने चौटाला को नांगल चौधरी आने का न्योता दिया है। उसी दिन एक रैली के जरिए इनेलो में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

राधेश्याम शर्मा का परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके भाई कैलाश चंद शर्मा भी विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 1996 में नारनौल से निर्दलीय विधायक के रूप में जीत दर्ज की थी।

कैलाश चंद शर्मा को वर्ष 1998 में चौधरी बंसीलाल सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाने वाला नेता माना जाता है। उनके समर्थन से ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनी थी, जिसमें कैलाश चंद शर्मा को राजस्व मंत्री बनाया गया था।

परिवार की राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जाता है कि कैलाश चंद शर्मा की पत्नी बर्फी देवी वर्ष 1995 में महेंद्रगढ़ की जिला प्रमुख रह चुकी हैं। वे चार बार पार्षद भी चुनी गईं।

1990 के दशक में राधेश्याम शर्मा के परिवार की अहीरवाल बेल्ट में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। विधायक से लेकर मंत्री और जिला परिषद तक परिवार का प्रभाव बना रहा, जिसका असर अब एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति में दिखने लगा है।