हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और वकीलों का विवाद बढ़ा, ‘तो’ शब्द पर टूटी समझौता वार्ता
जींद में बिजली कर्मचारियों और वकीलों का विवाद बढ़ गया। FIR, धरने और हड़ताल के बीच समझौता वार्ता ‘तो’ शब्द पर टूट गई, दोनों पक्षों के अलग दावे हैं।
‘तो’ शब्द पर अटकी समझौता वार्ता, बिजली कर्मचारी और वकील आमने-सामने
➤ एसडीओ समेत 5 कर्मचारियों पर FIR के बाद भाकियू-ग्रामीणों का पॉवर हाउस पर धरना
➤ लाइनमैन की गिरफ्तारी के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल, विवाद लगातार बढ़ा
हरियाणा के जींद में बिजली कर्मचारियों और वकीलों के बीच शुरू हुआ विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विवाद में ‘तो’ शब्द समझौते की राह में अड़चन बन गया। वकील की शिकायत पर एसडीओ समेत 5 बिजली कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भाकियू ने ग्रामीणों के साथ मिलकर हाट गांव के पॉवर हाउस पर धरना शुरू कर दिया। वहीं, नामजद कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद बिजली कर्मचारी यूनियन भी उनके समर्थन में उतर आई और मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की गई।
बिजली कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी आरोपी कर्मचारियों को साथ लेकर सफीदों बार पहुंचे। दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा। बातचीत के दौरान जब मामला खत्म करने के लिए माफी मांगने की बात आई तो बिजली कर्मचारियों ने माफी से पहले ‘यदि गलती की है, तो हम माफी मांगते हैं’ कहा। बार पदाधिकारियों को माफी मांगने का यह तरीका पसंद नहीं आया और समझौता वार्ता वहीं रोक दी गई।
भाकियू और ग्रामीणों के धरने में प्रदेश के आंदोलन से जुड़े चर्चित चेहरों के शामिल होने के बाद यह मामला अब स्थानीय विवाद से आगे बढ़कर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
शिकायत से शुरू हुआ विवाद, FIR के बाद आमने-सामने आए दोनों पक्ष
वकील प्रवीण बूरा की शिकायत पर सफीदों पुलिस ने एसडीओ व दो जेई समेत पांच बिजली कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता वकील को बार का समर्थन मिला, जबकि कर्मचारी यूनियन ने भी अपने कर्मचारियों के पक्ष में मोर्चा संभाल लिया।
नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के बीच बिजली कर्मचारी यूनियन ने बातचीत के जरिए मामले को निपटाने की पहल की। आरोपी कर्मचारियों को साथ लेकर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल सफीदों बार पहुंचा। वहां दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी।
बातचीत के अंत में मामला खत्म करने के लिए बिजली कर्मचारियों के सामने माफी मांगने का प्रस्ताव रखा गया। बिजली कर्मचारियों ने माफी मांगते हुए कहा कि यदि उनसे गलती हुई है तो वे माफी मांगते हैं। हालांकि, माफी से पहले लगाए गए ‘तो’ शब्द को बार प्रतिनिधिमंडल ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद समझौता वार्ता वहीं रोक दी गई।
16 सितंबर की रात से शुरू हुआ घटनाक्रम
वकील प्रवीण बूरा ने 16 सितंबर की रात बिजली कर्मचारियों पर मारपीट करने के आरोप लगाए। इसके बाद 17 सितंबर को खानपुर मेडिकल कॉलेज में वकील का मेडिकल कराया गया। मेडिकल के बाद पुलिस को लिखित शिकायत दी गई।
शिकायत के आधार पर सफीदों पुलिस ने एसडीओ समेत 5 कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। इसके बाद मामले में दोनों पक्षों की सक्रियता बढ़ गई।
20 सितंबर को भाकियू और ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गांव हाट के पॉवर हाउस के बाहर धरना शुरू कर दिया। इसके बाद 23 सितंबर को पुलिस ने लाइनमैन रवि को गिरफ्तार कर लिया।
लाइनमैन रवि की गिरफ्तारी के विरोध में बिजली कर्मचारी प्लास और पैन डाउन हड़ताल पर चले गए। इससे विवाद और गहरा गया।
धरने में आंदोलन से जुड़े चेहरे पहुंचे, एसडीएम कार्यालय का भी घेराव
मामले में 25 सितंबर को सुरेश कोथ और अभिमन्यु कोहड़ धरने में शामिल हुए। दोनों को प्रदेश में आंदोलनों से जुड़े बड़े चेहरों के रूप में जाना जाता है। इनके धरने में पहुंचने के बाद मामले ने और ज्यादा ध्यान खींचा।
इसके बाद 28 सितंबर को भाकियू और ग्रामीणों ने सफीदों एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। दूसरी ओर, बार ने अधिवक्ता प्रवीण बूरा के समर्थन में पहले 25 सितंबर और फिर 28-29 सितंबर को वर्क सस्पेंड रखा।
इस तरह 16 सितंबर की घटना के बाद शुरू हुआ विवाद एफआईआर, धरने, गिरफ्तारी, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल और एसडीएम कार्यालय के घेराव तक पहुंच गया।
आखिर क्या है पूरा विवाद, दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
वकील प्रवीण बूरा ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि 16 सितंबर की रात वह गांव के पॉवर हाउस में अपनी शिकायत दर्ज करवाने गया था। इसी दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मामूली विवाद हुआ और आरोप है कि कर्मचारियों ने उसकी पिटाई कर दी।
वहीं, बिजली कर्मचारी यूनियन की ओर से इस आरोप को अलग तरीके से बताया गया है। कर्मचारी पक्ष का कहना है कि वकील प्रवीण बूरा रात को सफीदों से आते समय पॉवर हाउस पहुंचे थे और एसए मनीष ने उन्हें समझाकर घर भेज दिया था। यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, इसके बाद वकील दोबारा आए और दरवाजा पीटने लगे। दरवाजा खुलने के बाद कर्मचारी के साथ गाली-गलौच और मारपीट शुरू करने का आरोप लगाया गया है।
कर्मचारी पक्ष का यह भी कहना है कि इससे पहले भी वकील प्रवीण बूरा ऐसा कर चुके थे और इसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी। उनके अनुसार, पहले बातचीत के बाद मामले को निपटा दिया जाता था।
दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और दोनों ही खुद को पीड़ित बता रहे हैं। मामले की वास्तविक सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
बार प्रधान बोले- गलती मानने को तैयार नहीं थे कर्मचारी
सफीदों बार प्रधान पुरुषोत्तम राणा ने कहा कि कर्मचारी यूनियन बातचीत के लिए बार के पास आई थी। उनके अनुसार, उनके साथी वकील प्रवीण बूरा के साथ बुरी तरह मारपीट की गई, जिसकी पुष्टि मेडिकल जांच में हुई है।
उन्होंने कहा कि बार भी बातचीत के जरिए मामले को निपटाने के पक्ष में था। बातचीत के दौरान आरोपियों को अपनी गलती मानने और मामला खत्म करने का मौका दिया गया, लेकिन बार प्रधान के अनुसार, कर्मचारी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे।
उनके मुताबिक, माफी मांगते समय कर्मचारियों ने कहा कि ‘हमने गलती की हो तो माफी मांगते हैं।’ बार प्रतिनिधिमंडल को यह रवैया ऐसा लगा जैसे कर्मचारियों ने कोई गलती की ही नहीं हो। इसके बाद बातचीत रोक दी गई।
बिजली कर्मचारी यूनियन बोली- वकील खुद कार चलाकर घर गए थे
यूनिट प्रधान नरेश देशवाल और पदाधिकारी सुरेश खर्ब ने मामले को राजनीतिक रंग दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि वकील प्रवीण बूरा रात को सफीदों से आते हुए पॉवर हाउस आए थे। एसए मनीष ने उन्हें समझाकर घर भेज दिया था।
कर्मचारी पक्ष के अनुसार, इसके बाद वकील दोबारा पॉवर हाउस आए और दरवाजा पीटने लगे। दरवाजा खोलने के बाद कर्मचारी के साथ गाली-गलौच और मारपीट शुरू करने का आरोप लगाया गया।
यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि इससे पहले भी वकील प्रवीण बूरा ऐसा कर चुके थे और इसकी शिकायत पुलिस को दी गई थी। उनके अनुसार, 16 सितंबर की रात भी कर्मचारियों ने अपने साथ हुई मारपीट को गंभीरता से नहीं लिया।
कर्मचारी पक्ष का दावा है कि पिटने के बाद भी एसए खुद उन्हें गाड़ी तक छोड़कर आए और वह खुद गाड़ी चलाकर घर गए। इसके बाद 17 सितंबर की दोपहर उन्होंने अचानक खानपुर मेडिकल कॉलेज जाकर अपना मेडिकल बनवा लिया।
ग्रामीणों की मांग- दोषियों की गिरफ्तारी हो
धरने की अगुवाई कर रहे नवीन मलिक ने कहा कि ग्रामीणों की मांग है कि वकील के साथ मारपीट के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपियों में से एक गिरफ्तार हो चुका है, जबकि दूसरा अभी भी बाहर है।
एसडीओ और जेई को लेकर नवीन मलिक ने कहा कि पुलिस पहले उनकी बातचीत और फोन लोकेशन की जांच करे। यदि बातचीत और लोकेशन में उनकी संलिप्तता सामने आती है तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए।
फिलहाल मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक तरफ वकील पक्ष कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगा रहा है, वहीं बिजली कर्मचारी यूनियन का कहना है कि कर्मचारी के साथ पहले मारपीट हुई थी। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 16 सितंबर की रात वास्तव में घटनाक्रम क्या था।
समझौते की कोशिश भी रही बेनतीजा
विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए बिजली कर्मचारी यूनियन आरोपी कर्मचारियों को साथ लेकर सफीदों बार पहुंची थी। दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और मामला खत्म करने के लिए माफी मांगने का प्रस्ताव भी रखा गया।
हालांकि, माफी के दौरान ‘यदि गलती की है, तो हम माफी मांगते हैं’ कहे जाने के बाद बातचीत टूट गई। बार प्रतिनिधियों ने इसे माफी मांगने का स्पष्ट तरीका नहीं माना और वार्ता रोक दी।
इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ है। एक ओर भाकियू और ग्रामीण धरने पर हैं, दूसरी ओर बिजली कर्मचारी यूनियन अपने कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन कर चुकी है। अब मामले में पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर दोनों पक्षों की नजर बनी हुई है।
Akhil Mahajan