9 साल पुराने रोड जाम केस का फैसला,रतन सिंह ने कबूला अपराध; कोर्ट ने लगाया 600 रुपये जुर्माना
झज्जर के मातनहेल गांव में 2017 में पानी की किल्लत पर हुए रोड जाम मामले में रतन सिंह ने अपराध स्वीकार किया। सीजेएम कोर्ट ने 600 रुपये जुर्माना लगाया।
➤ मातनहेल गांव में पानी की किल्लत को लेकर 22 अगस्त 2017 को ग्रामीणों ने किया था रोड जाम
➤ सार्वजनिक रास्ता बाधित करने के मामले में रतन सिंह ने कोर्ट में स्वेच्छा से स्वीकार किया अपराध
➤ सीजेएम कोर्ट ने तीन धाराओं में 200-200 रुपये जुर्माना लगाया, आरोपी ने मौके पर ही जमा किए 600 रुपये
झज्जर जिले के मातनहेल गांव में पानी की भारी किल्लत को लेकर करीब 9 साल पहले हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले का आखिरकार अदालत में निपटारा हो गया। वर्ष 2017 में सार्वजनिक रास्ता बाधित करने के आरोप में दर्ज केस में आरोपी रतन सिंह ने सुनवाई के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद झज्जर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए कुल 600 रुपये का जुर्माना लगाया। आरोपी ने अदालत में ही जुर्माने की पूरी राशि जमा कर दी और रसीद प्राप्त कर ली।
यह मामला उस समय का है, जब गांव में पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान रास्ता बाधित होने के कारण वाहनों और पैदल चलने वाले लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर रतन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया था। लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद आरोपी के अपराध स्वीकार करने पर अदालत ने जुर्माना लगाकर मामले का निपटारा कर दिया।
पानी की किल्लत के विरोध में ग्रामीणों ने किया था रोड जाम
मामला 22 अगस्त 2017 का है। उस समय झज्जर जिले के मातनहेल गांव में पानी की भारी किल्लत को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। पानी की समस्या से परेशान लोगों ने मातनहेल के Y-पॉइंट पर रोड जाम कर दिया था। इस दौरान सड़क पर पत्थर डाल दिए गए और कुछ बाइक आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी गई थीं। इससे सार्वजनिक रास्ते पर वाहनों के साथ-साथ पैदल लोगों की आवाजाही में भी बाधा उत्पन्न हुई थी।
घटना की सूचना मिलने पर जन स्वास्थ्य विभाग के जेई जय भगवान, एक्सईएन जगदीश चंदर और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझाया। इसके बाद रास्ता खुलवाया गया और आवागमन बहाल कराया गया।
जेई की शिकायत पर साल्हावास थाने में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में जन स्वास्थ्य विभाग के जेई जय भगवान की शिकायत पर साल्हावास थाना में FIR नंबर 221 दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद रतन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया।
मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 283, 341 और 149 के तहत कार्रवाई की गई थी। यह केस CHI-66-2018 के रूप में झज्जर की सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन रहा। सार्वजनिक रास्ता बाधित करने और प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों से जुड़े इस मामले में अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली।
सुनवाई के दौरान रतन सिंह ने स्वेच्छा से स्वीकार किया अपराध
लंबे समय तक चले ट्रायल के बाद सुनवाई के दौरान आरोपी रतन सिंह ने अदालत के सामने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने उसके बयान को रिकॉर्ड किया और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की।
सीजेएम डॉ. मोनिका खनगवाल ने माना कि आरोपी की ओर से स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किए जाने से न्यायालय का समय और ऊर्जा बची। इसके बाद अदालत ने संबंधित धाराओं में आरोपी को दोषी ठहराते हुए जुर्माना लगाने का आदेश दिया।
तीन धाराओं में 200-200 रुपये जुर्माना
अदालत ने आरोपी रतन सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 283, 341 और 147 के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक धारा में 200 रुपये का जुर्माना लगाया। इस तरह कुल जुर्माने की राशि 600 रुपये निर्धारित की गई।
अदालत के आदेश के अनुसार, जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में 15 दिन के साधारण कारावास का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, आरोपी ने अदालत में ही 600 रुपये जमा कर दिए और उसकी रसीद प्राप्त कर ली। इस तरह वर्ष 2017 में पानी की किल्लत को लेकर हुए प्रदर्शन और रोड जाम से जुड़ा मामला करीब 9 साल बाद समाप्त हो गया।
Akhil Mahajan