IPS वाई पूरन केस: CS से सचिवालय में एक घंटे पूछताछ

IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में चंडीगढ़ पुलिस की SIT ने हरियाणा सचिवालय में CS अनुराग रस्तोगी से पूछताछ की। सुसाइड नोट में गंभीर आरोप दर्ज

IPS वाई पूरन केस: CS से सचिवालय में एक घंटे पूछताछ
  • IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में चंडीगढ़ पुलिस की SIT सक्रिय
  • हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी से सचिवालय में एक घंटे पूछताछ
  • सुसाइड नोट में CS का नाम, कई गंभीर आरोपों का जिक्र


चंडीगढ़। हरियाणा कैडर के IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में जांच तेज हो गई है। इस मामले की जांच कर रही चंडीगढ़ पुलिस की SIT सोमवार देर शाम हरियाणा सिविल सचिवालय पहुंची। यहां टीम ने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी से करीब एक घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की।

सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले SIT की ओर से मुख्य सचिव को नोटिस भेजा गया था, लेकिन वे चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय नहीं पहुंचे। इसके बाद SIT को लीड कर रहीं SSP कंवरदीप कौर खुद टीम के साथ सचिवालय पहुंचीं और वहीं पूछताछ की गई।

जानकारी के अनुसार, SIT शाम करीब 4:30 बजे सचिवालय पहुंची और करीब 5:30 बजे तक टीम मौके पर मौजूद रही। इस दौरान सुसाइड नोट में लिखे तथ्यों को लेकर सवाल पूछे गए और केस से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए। उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की मौके पर ही गहन जांच की गई।

IPS वाई पूरन कुमार के सुसाइड नोट में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी का नाम सामने आया है। सुसाइड नोट से पहले लिखे गए फाइनल नोट के तीसरे पेज में उनका उल्लेख है। उस समय अनुराग रस्तोगी गृह विभाग में ACS के पद पर तैनात थे।

नोट में लिखा गया है कि 8 अगस्त 2024 को पूरे मामले पर ACS होम के साथ विस्तार से चर्चा हुई थी। इसके बाद डीओ नंबर 1211 (21 अगस्त 2024) और डीओ नंबर 1375 (25 सितंबर 2024) सहित कई अर्ध-आधिकारिक पत्र भेजे गए, लेकिन किसी भी मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की गई

सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिना अवसर दिए ही शिकायत एकतरफा दर्ज कर ली गई। दिवंगत IPS ने इसे पूर्वाग्रह और प्रतिशोधी रवैये का प्रमाण बताया। नोट में यह भी जिक्र है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नोटिस के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसे उन्होंने जाति-आधारित पूर्वाग्रह से जोड़ा है।

इसके अलावा, APAR से जुड़ी अपीलों को भी जानबूझकर लंबित रखने का आरोप लगाया गया है। नोट में कहा गया है कि 30 अक्टूबर 2024 को APAR से टिप्पणियां हटाने के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन यह मामला अब तक गृह विभाग में लंबित है और इसे गलत तरीके से संभालकर अपमानित करने की कोशिश की गई।