आईपीएस वाई. पूरन कुमार केस: हाईकोर्ट में सुनवाई टली, याचिकाकर्ता ने मांगा वक्त

हरियाणा के सीनियर आईपीएस अफसर वाई. पूरन कुमार सुसाइड केस की जांच को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच की मांग पर बहस के लिए समय मांगा, वहीं आईएएस पत्नी ने पति के मोबाइल और लैपटॉप वापस करने की अर्जी दी।

आईपीएस वाई. पूरन कुमार  केस: हाईकोर्ट में सुनवाई टली, याचिकाकर्ता ने मांगा वक्त
  • IPS वाई. पूरन कुमार सुसाइड केस की जांच को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई

  • याचिकाकर्ता नवनीत कुमार ने CBI जांच की मांग पर बहस के लिए समय मांगा

  • IAS अमनीत पी. कुमार ने पति का मोबाइल और लैपटॉप वापस करने की अर्जी दी


हरियाणा के सीनियर आईपीएस अफसर वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या मामले में शुक्रवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान लुधियाना निवासी याचिकाकर्ता नवनीत कुमार की ओर से बहस के लिए समय मांगा गया, जिसके बाद अदालत ने अगली तारीख तय करते हुए सुनवाई स्थगित कर दी। फिलहाल इस केस की जांच चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी कर रही है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ कर रही है।

वहीं, मृतक अफसर की पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने अदालत में अर्जी दाखिल कर अपने पति के दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप वापस करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन डिवाइसों में कई निजी व वित्तीय जानकारियां हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस जो भी जरूरी डाटा लेना चाहती थी, वह ले चुकी है, अब इन्हें लौटाया जाए।

17 अक्टूबर को हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि इस मामले में ऐसा क्या असाधारण है, जिसके चलते जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए। अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश तय किए हैं जिनके तहत ही जांच सीबीआई को दी जा सकती है। कोर्ट ने टिप्पणी की थी, “इस केस में ऐसा क्या खास है? हमें बताइए कि कौन से सुप्रीम कोर्ट के फैसले इसके समर्थन में हैं।”

याचिकाकर्ता नवनीत कुमार ने खुद को एक एनजीओ होप वेलफेयर सोसाइटी का अध्यक्ष बताया है। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने यह याचिका भारतीय पुलिस सेवा की अखंडता और कानून के शासन की रक्षा के लिए लगाई है ताकि जांच स्थानीय प्रभाव से मुक्त रहे।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं बल्कि पुलिस प्रशासन के भीतर की कार्यप्रणाली का मामला है। उन्होंने कहा कि जब एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर खुदकुशी कर रहा है और सुसाइड नोट में 15 अधिकारियों के नाम लेकर प्रताड़ना का जिक्र कर रहा है, तो यह “बेहद संवेदनशील मामला” है और इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से होनी चाहिए।

7 अक्टूबर को आईजी वाई. पूरन कुमार, जो उस वक्त रोहतक पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) में तैनात थे, ने सेक्टर-11 चंडीगढ़ स्थित अपने आवास की बेसमेंट में खुद को गोली मार ली थी। उनके पास से 8 पेज का सुसाइड नोट और एक पेज की वसीयत बरामद हुई थी। उन्होंने इसमें हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया सहित 15 अफसरों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

घटना के एक दिन पहले रोहतक पुलिस ने पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार को शराब कारोबारी से रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि सुशील ने पूछताछ में कहा कि उसने यह काम अपने अफसर के कहने पर किया। हालांकि पूरन कुमार को इस मामले में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।

अदालत अब इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता की बहस सुनने के बाद यह तय करेगी कि जांच सीबीआई को सौंपी जाए या नहीं।