हरियाणा में बिजली इंजीनियरों का बड़ा ऐलान, कल से कार्य बहिष्कार
हरियाणा में बिजली इंजीनियरों ने सुरक्षा और HVPNL पुनर्गठन की मांग को लेकर 2 घंटे के कार्य बहिष्कार और प्रदेशव्यापी विरोध का ऐलान किया है।
➤ पूरे हरियाणा में इंजीनियरों का 2 घंटे का कार्य बहिष्कार
➤ बिजली चोरी पकड़ने पर सुरक्षा और HVPNL पुनर्गठन की मांग तेज
➤ कार्रवाई न होने से उचाना-दादरी मामलों पर इंजीनियरों में भारी रोष
हरियाणा में बिजली विभाग के इंजीनियरों ने अब संघर्ष का रास्ता अपना लिया है। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (HPEA) ने निगम प्रबंधन की कथित उदासीनता और फील्ड अधिकारियों के उत्पीड़न के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। इस फैसले के तहत 28 अप्रैल से पूरे प्रदेश में इंजीनियर रोजाना 2 घंटे का कार्य बहिष्कार करेंगे और जिला मुख्यालयों पर गेट मीटिंग के जरिए विरोध दर्ज कराएंगे।
एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घनघस ने बताया कि 13 अप्रैल से शांतिपूर्ण विरोध जारी है, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे इंजीनियरों में भारी नाराजगी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब आंदोलन को तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इंजीनियरों ने आरोप लगाया कि बिजली चोरी पकड़ने के दौरान फील्ड में जाने वाले अधिकारियों को सुरक्षा नहीं मिलती, जिससे उनकी जान को खतरा रहता है। उचाना के एसडीओ जोजो तनेजा के तबादले और दादरी में एसडीओ गौरव को धमकी के मामलों में कार्रवाई न होने से असंतोष और बढ़ गया है। एसोसिएशन ने मांग की है कि तनेजा का तबादला तुरंत रद्द किया जाए और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।
इसके साथ ही इंजीनियरों ने बिजली चोरी रोकने वाली टीमों को पुलिस सुरक्षा देने की अनिवार्य व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बिना सुरक्षा के फील्ड में काम करना जोखिम भरा हो गया है।
एसोसिएशन ने लंबे समय से लंबित HVPNL पुनर्गठन को तुरंत लागू करने की मांग भी दोहराई है। वर्ष 2009 से लंबित इस प्रक्रिया को लागू न करने से कार्य प्रभावित हो रहा है। नए सब-स्टेशनों के अनुसार पदों का सृजन और लिंकअप जरूरी बताया गया है।
इसके अलावा हांसी, दादरी और नूंह में खाली पड़े SE पदों को भरने, 2019-20 से लंबित नई डिवीजनों के गठन और तकनीकी निदेशकों के पदों पर नियमित नियुक्ति की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुंडू और महासचिव रविंद्र घनघस ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने जल्द समाधान नहीं किया, तो यह आंदोलन पूर्ण कार्य बहिष्कार में बदल जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन की होगी।
Akhil Mahajan