'सॉरी मम्मी-सॉरी पापा...', ऑनलाइन गेम का टास्क पूरा कर 9वीं मंजिल से एक दूसरे का हाथ पकड़कर कूदी तीन सगी बहनें मौ*त..
गाजियाबाद में तीन नाबालिग सगी बहनों की मौत का मामला सामने आया है। पुलिस ऑनलाइन गेमिंग एंगल सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिवार ने मोबाइल गेमिंग को लेकर चेतावनी दी है।
➤ गाजियाबाद की हाई-राइज सोसायटी में तीन सगी बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
➤ पुलिस जांच में ऑनलाइन टास्क-आधारित गेमिंग एंगल सामने आया
➤ परिवार और पुलिस ने मोबाइल गेमिंग को लेकर चेतावनी दी
गाजियाबाद के भारत सिटी क्षेत्र में तीन नाबालिग सगी बहनों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और सन्नाटा है। घटना मंगलवार देर रात की बताई जा रही है, जब सोसायटी में रहने वाले लोगों ने तेज आवाज सुनकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तीनों बच्चियों को बचाया नहीं जा सका।
तीनों बहनों की उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है। बच्चियां एक ही फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहती थीं।
ऑनलाइन गेमिंग एंगल की जांच
जांच के दौरान पुलिस को कमरे से एक डायरी मिली है, जिसमें बच्चियों ने ऑनलाइन गेम से जुड़ी बातें लिखी थीं। परिजनों का आरोप है कि तीनों बहनें एक टास्क-आधारित विदेशी ऑनलाइन गेम से जुड़ी हुई थीं और उसे छोड़ने में मानसिक रूप से असमर्थ महसूस कर रही थीं।
पिता का कहना है कि उन्होंने बेटियों को गेम खेलने से मना किया था, जिस पर उन्हें फटकार भी लगाई गई थी। इसके बाद ही यह दुखद घटना सामने आई।
पिता की अपील: मोबाइल गेमिंग को हल्के में न लें
बच्चियों के पिता चेतन ने कहा कि यह हादसा उनके पूरे परिवार को तोड़ कर रख देने वाला है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की मोबाइल गतिविधियों पर नजर रखें और ऑनलाइन गेमिंग को हल्के में न लें।
उनका कहना है कि बच्चियां लंबे समय से गेमिंग में अत्यधिक समय बिता रही थीं और सामाजिक रूप से भी खुद को अलग कर चुकी थीं।
पुलिस का बयान
एडिशनल पुलिस कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर आलोक प्रियदर्शी के अनुसार,
“मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। बच्चियों के मोबाइल फोन, डायरी और डिजिटल गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जाएगी।”
पुलिस ने यह भी बताया कि बच्चियां पिछले कुछ समय से नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रही थीं और अधिकांश समय मोबाइल पर बिताती थीं।
ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम्स को लेकर चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऑनलाइन गेम और चैट-आधारित प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे मानसिक दबाव बना सकते हैं। शुरुआत दोस्ती और भावनात्मक जुड़ाव से होती है, लेकिन समय के साथ यह बच्चों के व्यवहार, सोच और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
भारत में इससे पहले भी ऐसे मामलों के बाद सरकार कई खतरनाक ऑनलाइन गेम्स और चैलेंज को बैन कर चुकी है।
बता दें कि यह खबर वाकई दिल दहला देने वाली है। माता-पिता के लिए इससे बड़ा दुख और कोई नहीं हो सकता कि उनकी तीन बेटियां इस तरह के किसी जानलेवा प्रभाव में आकर ऐसा कदम उठा लें।
हालांकि, इस विशेष घटना के बारे में बात करते समय हमें थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अक्सर ऐसी खबरों में "ऑनलाइन गेम" या "चैलेंज" का नाम लिया जाता है (जैसे पहले 'ब्लू व्हेल' या 'मोमो चैलेंज' के मामले में हुआ था), लेकिन जांच में अक्सर इसके पीछे मानसिक तनाव, पारिवारिक स्थितियां या साइबर बुलिंग जैसे गहरे कारण निकलते हैं।
ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी बातें:
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बिहेवियरल बदलाव: अगर बच्चे अचानक गुमसुम रहने लगें, रात भर जागें, या अपने फोन/लैपटॉप को लेकर हद से ज्यादा सुरक्षात्मक (secretive) हो जाएं, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
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खुला संवाद: बच्चों को यह महसूस होना चाहिए कि वे अपनी गलतियां या डर बिना किसी डर के माता-पिता से साझा कर सकते हैं।
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डिजिटल साक्षरता: गेमिंग और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को "फेक ऐप्स" और "मैनीपुलेटिव गेम्स" के बारे में शिक्षित करना बहुत जरूरी है।
एक जरूरी बात: अगर आप या आपके आसपास कोई भी व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा है या उसके मन में खुदकुशी जैसे विचार आ रहे हैं, तो कृपया मदद मांगें। आप इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
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आसरा (Aasra): 91-9820466726
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किरण (Kiran) मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन: 1800-599-0019 (भारत सरकार द्वारा संचालित)
क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको कुछ ऐसे टूल्स या सेटिंग्स के बारे में बताऊं जिससे बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को सुरक्षित बनाया जा सके?
Akhil Mahajan