Astra Mark-2 मिसाइल में शामिल होगी चीन की तकनीक, भारत की वायु शक्ति में बड़ा उछाल

DRDO ने चीन की PL-15 मिसाइल का विश्लेषण कर उसकी तकनीक Astra Mark-2 में शामिल करने का फैसला लिया है। इससे भारत की मिसाइल की गति 6000 किमी/घं. तक पहुंच सकती है और देश की वायु रक्षा कई गुना मजबूत होगी।

Astra Mark-2 मिसाइल में शामिल होगी चीन की तकनीक, भारत की वायु शक्ति में बड़ा उछाल

➤ DRDO ने चीन की PL-15 मिसाइल का तकनीकी विश्लेषण कर उसकी उन्नत तकनीक को Astra Mark-2 मिसाइल में शामिल करने का निर्णय लिया
➤ PL-15E मिसाइल पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दागी गई थी और पंजाब के होशियारपुर में बिना फटे बरामद हुई
➤ अब Astra Mark-2 मिसाइल की रफ्तार 6000 किमी/घं. (मैक 5) तक होने की संभावना है, जिससे भारत की वायु रक्षा क्षमता कई गुना बढ़ेगी


 वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में रूस-यूक्रेन और इज़राइल-हमास-ईरान संघर्षों ने पूरी दुनिया की रक्षा रणनीति को बदल दिया है। इसी क्रम में भारत भी अपने मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम को लगातार उन्नत कर रहा है। अब इस दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है—Astra Mark-2 Missile Programme में चीन की तकनीक अनजाने में भारत के काम आ रही है।

दरअसल, मई 2025 में पाकिस्तान द्वारा दागी गई एक चीन निर्मित PL-15E मिसाइल भारतीय सीमा में पंजाब के होशियारपुर में आकर गिरी थी। मिसाइल में ब्लास्ट नहीं हुआ था, जिसके चलते इसे DRDO (Defence Research and Development Organisation) के वैज्ञानिकों ने सुरक्षित रूप से प्राप्त कर लिया। यह बरामदगी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई थी, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था।

DRDO के विशेषज्ञों ने मिसाइल की तकनीकी संरचना का गहन विश्लेषण किया और पाया कि PL-15E में कई अत्याधुनिक विशेषताएं हैं—जैसे मिनीएचर AESA रडार, हाई-एनर्जी प्रोपेलेंट जो मिसाइल को मैक 5 (लगभग 6000 किमी/घं.) की गति देता है, और उन्नत एंटी-जैमिंग टेक्नोलॉजी। इसी विश्लेषण के बाद भारत ने निर्णय लिया कि इन विशेषताओं को स्वदेशी Astra Mark-2 मिसाइल में सम्मिलित किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, Astra Mark-2 का विकास कार्य अंतिम चरण में है और इसमें शामिल नई तकनीकें इसे दुनिया की सबसे तेज़ और सटीक एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक बना सकती हैं। यदि इसमें PL-15 की गति-तकनीक सफलतापूर्वक एकीकृत हो जाती है, तो इसकी मारक क्षमता 6000 किमी/घं. तक पहुंच सकती है।

इसी बीच, रिपोर्टें बताती हैं कि पाकिस्तान भी अपने हथियार भंडार को मजबूत कर रहा है। वह PL-17 लॉन्ग-रेंज मिसाइलें, तुर्की के 2,000 YIHA कामिकाज़े ड्रोन और अमेरिका से एडवांस वॉर इक्विपमेंट हासिल करने की कोशिशों में है।

भारतीय वायुसेना भविष्य की लड़ाइयों के लिए राफेल जेट्स के लिए Meteor मिसाइलों का अतिरिक्त स्टॉक और 800 किमी रेंज वाली नेक्स्ट-जेनरेशन ब्रह्मोस मिसाइल भी विकसित कर रही है। इन प्रयासों से भारत की रक्षा क्षमता नई ऊंचाइयों को छूने जा रही है।