हरियाणा की डॉ. मीनल बनीं ने जीता मिसेज़ सुप्रीमेसी इंडिया 2025 का ताज
डॉ. मीनल मेहंदी रत्ता नारवाणी ने मिसेज़ सुप्रीमेसी इंडिया 2025 का ताज जीतकर पानीपत और हरियाणा का नाम रोशन किया इस जीत के साथ वे ब्रांड एम्बेसडर बनकर सामाजिक कार्य और पर्यटन प्रोत्साहन पर काम करेंगी
➤ डॉ. मीनल मेहंदी रत्ता नारवाणी बनीं मिसेज़ सुप्रीमेसी इंडिया 2025 की पहली क्वीन
➤ पानीपत से राष्ट्रीय मंच तक का सफर बना हर महिला के लिए प्रेरणा
➤ जीत के बाद कहा—यह केवल ताज नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है
पानीपत। हरियाणा की बेटी और अलवर-पानीपत से जुड़ीं डॉ. मीनल मेहंदी रत्ता नारवाणी ने अपने हौसले और आत्मविश्वास से नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित मिसेज़ सुप्रीमेसी इंडिया 2025 का खिताब जीतकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। इससे पहले वे मिसेज़ पानीपत 2025 का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं।
डॉ. मीनल, श्री सुरेश और श्रीमती वीना मेहंदी रत्ता की सुपुत्री हैं। उनकी शादी श्री प्रदीप नारवाणी से हुई है और वे डेढ़ साल की एक नन्हीं बेटी की माँ हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक स्त्री बेटी, पत्नी, माँ और प्रोफेशनल—हर भूमिका को बखूबी निभाते हुए भी बड़े सपने पूरे कर सकती है।
यह आयोजन ‘सुप्रीमेसी टैलेंट’ द्वारा आशिमा शर्मा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुप्रित कौर ने किया। डॉ. विनोद गंधर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्पॉन्सर में ‘बीज रियलिटी, आरियन ग्रुप, ग्लैमर एंड ग्रेस, पी.एम.टी., मॉडलिंग एकेडमी और फिनिशिंग स्कूल ऑफ इंडिया’ शामिल रहे।
डॉ. मीनल अब ब्रांड एम्बेसडर बनकर पर्यटन प्रोत्साहन, सामाजिक कार्यों और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व में सक्रिय होंगी। ‘सुप्रीमेसी टैलेंट’ की संस्थापिका आशिमा शर्मा ने उनकी उपलब्धि को प्रेरणादायक बताते हुए कहा—"डॉ. मीनल आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। वे सचमुच एक आदर्श हैं।"
सफर डेंटल क्लिनिक से राष्ट्रीय मंच तक
डॉ. मीनल पेशे से डेंटिस्ट हैं। पढ़ाई और क्लिनिक के साथ-साथ उन्होंने हमेशा समाजिक कार्यों और नई चुनौतियों में अपनी जगह बनाई। जब वे मंच पर ताज पहनकर मुस्कुराईं तो उनके माता-पिता, पति और परिवार की आँखों में गर्व और खुशी के आँसू थे। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
जीत के बाद कही दिल की बात
ताज जीतने के बाद उन्होंने कहा—
"यह केवल एक ताज या खिताब नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है। मैं इस मंच का इस्तेमाल युवाओं को प्रेरित करने, महिलाओं को प्रोत्साहित करने और भारत की संस्कृति व सभ्यता को दुनिया भर में पहुँचाने के लिए करना चाहती हूँ।"
Akhil Mahajan