हरियाणा में बारिश से भीगी हजारों मीट्रिक टन धान, मंडियों में किसानों की बढ़ी परेशानी
कैथल की तीन मंडियों में बारिश से खुले में रखी हजारों मीट्रिक टन धान भीग गई। खरीद और उठान में देरी से परेशान किसानों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की।
कैथल की मंडियों में बारिश से खुले में रखी हजारों मीट्रिक टन धान और बोरियां भीगीं
➤ पांच दिन से खरीद का इंतजार कर रहे किसानों ने उठान में देरी पर जताया रोष
➤ एसडीएम संजय कुमार के आदेश के बाद शुरू हुआ उठान, लेकिन बारिश के कारण काम फिर रुका
कैथल। हरियाणा के कैथल में रविवार को हुई तेज बारिश किसानों के लिए आफत बन गई। शहर की मंडियों में खुले में पड़ी हजारों मीट्रिक टन धान की फसल और बोरियां बारिश में भीग गईं। कई जगह धान की ढेरियों और बोरियों के नीचे पानी जमा हो गया, जिससे फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। मंडियों में पहले से ही खरीद और उठान में देरी से परेशान किसानों की मुश्किलें बारिश के बाद और बढ़ गई हैं।
मंडी में पहुंचे किसानों ने प्रशासन और खरीद व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि वे पिछले पांच दिनों से अपनी धान की फसल लेकर मंडियों में बैठे हैं, लेकिन खरीद एजेंसियां उनकी फसल नहीं खरीद रही हैं। जिन किसानों की धान खरीदी जा चुकी है, उनकी फसल का भी समय पर उठान नहीं हो रहा है। ऐसे में खुले में रखी बोरियों के बारिश में भीगने से उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।
लिफ्टिंग नहीं होने से मंडियों में बिगड़े हालात
कैथल शहर की तीनों मंडियों में धान का उठान नहीं होने के कारण हालात बिगड़ गए हैं। मंडियों के अंदर के रास्तों से लेकर बाहर की सड़कों तक धान की बोरियों के ढेर लगे हुए हैं। इससे किसानों को अपनी फसल रखने और मंडियों में आने-जाने में परेशानी हो रही है। जगह की कमी के कारण नई फसल लेकर आने वाले किसानों के सामने भी दिक्कत खड़ी हो सकती है।
रविवार को हुई बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। खुले में रखी धान की बोरियां भीग गईं और कई जगह ढेरियों के नीचे पानी जमा हो गया। किसानों को आशंका है कि बारिश और नमी के कारण उनकी फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यदि खरीद और उठान में तेजी नहीं आई, तो नुकसान की आशंका और बढ़ सकती है।
मंडी और खेत, दोनों जगह मौसम की मार
गांव कुकरकंडा निवासी किसान चरणजीत ने बताया कि उन्हें मंडी और खेत, दोनों जगह मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। मंडी में धान लेकर पहुंचने के बाद भी उनकी फसल की खरीद नहीं हो रही, जबकि खेतों में खड़ी फसल पर भी खराब मौसम का खतरा बना हुआ है।
चरणजीत के अनुसार, लगातार बारिश और नमी के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। एक तरफ किसान खेतों में फसल को मौसम से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं मंडियों में पहुंचने के बाद भी उन्हें खरीद का इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर खरीद और उठान नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
किसानों का कहना है कि फसल मंडी में पहुंचने के बाद उसकी खरीद और सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन मंडियों में जगह-जगह धान की बोरियां जमा होने और बारिश का पानी भरने से हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
अनिल कुमार ने जल्द उठान करवाने की मांग की
किसान अनिल कुमार ने कहा कि मंडी में खुले में रखी धान की बोरियां बारिश में भीग गई हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि धान की खरीद प्रक्रिया तेज की जाए और पहले से खरीदी जा चुकी फसल का जल्द से जल्द उठान करवाया जाए।
अनिल कुमार के अनुसार, जब खरीदी गई धान का उठान समय पर नहीं होता, तो मंडियों में बोरियों के ढेर बढ़ते जाते हैं। इससे नई फसल लेकर आने वाले किसानों के लिए जगह की समस्या पैदा होती है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद खुले में रखी धान को सुरक्षित रखना और खरीदी गई फसल को मंडियों से बाहर पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।
किसानों की मांग है कि खरीद एजेंसियां तेजी से काम करें और मंडियों में जमा धान का उठान प्राथमिकता के आधार पर करवाया जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज रखने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके और बारिश से होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
एसडीएम के आदेश के बाद शुरू हुआ था उठान
कैथल में एसडीएम संजय कुमार ने रविवार को अधिकारियों को धान का उठान करवाने के आदेश दिए थे। इसके बाद उठान का काम शुरू तो हुआ, लेकिन बारिश के कारण बीच में ही रुक गया। सुबह से शुरू हुई बारिश रुक-रुककर जारी रही, जिससे मंडियों में कामकाज प्रभावित हुआ।
बारिश के कारण पहले से खुले में रखी धान की बोरियां भीग गईं। वहीं, उठान रुकने से मंडियों में जमा फसल को हटाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। ऐसे में किसानों के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर उनकी फसल की खरीद समय पर नहीं हो रही, तो दूसरी ओर खरीदी जा चुकी धान का उठान भी प्रभावित हो रहा है।
खरीद और उठान में तेजी की उम्मीद लगाए बैठे किसान
कैथल की मंडियों में बारिश के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को आशंका है कि खुले में रखी धान के भीगने से उपज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है और उन्हें बिक्री में नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान चाहते हैं कि खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और मंडियों में जमा बोरियों का जल्द उठान हो।
फिलहाल बारिश और उठान में देरी ने मंडियों की व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। किसानों की नजर अब इस बात पर है कि मौसम में सुधार के बाद खरीद और उठान का काम कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
Akhil Mahajan