डॉ. कुंदन मित्तल को दोहरा झटका, MS पद से इस्तीफा, बाल रोग विभाग से भी हटाए

रोहतक PGI में डॉ. कुंदन मित्तल की MS पद पर पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। अब उन्हें बाल रोग विभाग से भी रिलीव किया गया है।

डॉ. कुंदन मित्तल को दोहरा झटका, MS पद से इस्तीफा, बाल रोग विभाग से भी हटाए

रोहतक PGI में डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक

➤ MS पद से इस्तीफे के बाद पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी एंड इंटेंसिव केयर विभाग से भी रिलीव

➤ पुनर्नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने लिखा था पत्र, कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए पर्ची-खर्ची के आरोप

रोहतक। रोहतक के पंडित बीडी शर्मा हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी स्थित पीजीआईएमएस में डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। मेडिकल सुपरीटेंडेंट (MS) के पद पर उनकी पुनर्नियुक्ति पर हाईकोर्ट की रोक के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा और उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अब कोर्ट के आदेश पर उन्हें पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी एंड इंटेंसिव केयर विभाग से भी रिलीव कर दिया गया है।

इस घटनाक्रम के बाद पीजीआईएमएस में पुनर्नियुक्ति और सेवा विस्तार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चल रही बहस फिर तेज हो गई है। डॉ. कुंदन मित्तल की नियुक्ति को अदालत में चुनौती दिए जाने के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पहले उन्हें एमएस पद छोड़ना पड़ा और अब संबंधित विभाग से भी उनकी रवानगी हो गई है।

इस मामले में हेल्थ यूनिवर्सिटी के पीआरओ डॉ. मंजूनाथ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

30 जून 2026 को रिटायर हुए थे डॉ. कुंदन मित्तल

डॉ. कुंदन मित्तल 30 जून 2026 को चिकित्सा निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद सरकार ने उन्हें तीन साल के लिए सेवा विस्तार दिया। इस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप लगाया गया कि सेवा विस्तार देते समय नियमों और निर्धारित आयु सीमा को दरकिनार किया गया।

डॉ. कुंदन मित्तल को दिए गए सेवा विस्तार और मेडिकल सुपरीटेंडेंट के पद पर उनकी पुनर्नियुक्ति को डॉ. अनिल पन्निकर ने अदालत में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2026 में डॉ. मित्तल की एमएस पद पर दोबारा नियुक्ति पर रोक लगा दी। अदालत के इस आदेश के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

अब कोर्ट के आदेशों के तहत उन्हें पीजीआईएमएस के बाल रोग विभाग और इंटेंसिव केयर से भी रिलीव कर दिया गया है। इस तरह पुनर्नियुक्ति से शुरू हुआ विवाद उनके प्रशासनिक पद से हटने के बाद विभागीय जिम्मेदारी से रिलीव किए जाने तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग से भी हटाए गए

डॉ. कुंदन मित्तल को पहले मेडिकल सुपरीटेंडेंट के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उन्हें पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी एंड इंटेंसिव केयर विभाग से भी रिलीव कर दिया गया। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशों के बाद हुई है।

इस घटनाक्रम से पीजीआईएमएस में पुनर्नियुक्ति के आधार पर विभिन्न प्रशासनिक पदों पर की गई नियुक्तियों को लेकर भी कानूनी संकट गहराने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अन्य पदों पर किसी विशेष नियुक्ति के संबंध में अदालत के अलग-अलग आदेशों का विवरण नहीं दिया गया है।

डॉ. मित्तल की पुनर्नियुक्ति पर पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने लिखा था पत्र

डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति को लेकर पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने मुख्यमंत्री कार्यालय में पत्र लिखा था। इस पत्र के सामने आने के बाद मामला विवादों में आ गया था। पत्र को लेकर काफी चर्चा हुई और यह सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ।

पुनर्नियुक्ति के मामले में पत्र सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया। मामला केवल नियुक्ति और सेवा विस्तार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने इस फैसले को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए।

विपक्ष ने भाजपा पर लगाए पर्ची-खर्ची के आरोप

डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति को लेकर भाजपा नेता की ओर से भेजे गए पत्र के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर चहेते लोगों को बड़े पदों पर सेवा विस्तार दिया जा रहा है।

विपक्ष ने भाजपा की बिना पर्ची-बिना खर्ची की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में ही पर्ची-खर्ची का उदाहरण सामने आया है। डॉ. कुंदन मित्तल की पुनर्नियुक्ति का मामला अब अदालत के आदेशों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा में है।