अडानी कंपनी के मैनेजर मर्डर केस में SHO सस्पेंड

गुरुग्राम युवराज मर्डर केस में अज्ञात शव की जानकारी साझा न करने पर SHO सस्पेंड हुआ। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद पांच पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी है।

अडानी कंपनी के मैनेजर मर्डर केस में SHO सस्पेंड

➤ अज्ञात शव की जानकारी जिपनेट पर अपलोड नहीं करने का आरोप

➤ युवराज को अज्ञात मानकर किया गया था अंतिम संस्कार

➤ सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी


गुरुग्राम के हाईप्रोफाइल युवराज सिंह मनचंदा मर्डर केस में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने के बाद बादशाहपुर SHO राजेश बागड़ी को सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर कार्रवाई के बाद रोड रेज केस में विभागीय जांच का सामना कर रहे सेक्टर-56 के SHO को जिम्मेदारी दी गई है। मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब सामने आया कि युवराज का शव मिलने के बाद उसकी जानकारी इंटर-स्टेट पुलिस डेटाबेस जिपनेट पर अपलोड नहीं की गई थी। परिवार को शव की पहचान करने का मौका मिलने से पहले ही पुलिस ने उसे अज्ञात मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने सीनियर एडवोकेट अमित प्रसाद के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नरों से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

युवराज सिंह मनचंदा की उम्र 31 वर्ष थी और वह अडानी रियल्टी में सेल्स मैनेजर के पद पर काम करते थे। वह 6 सितंबर को लापता हुए थे। 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को बादशाहपुर के पास एक नाले से उनका शव मिला था। पहचान नहीं होने पर पुलिस ने शव को अज्ञात मान लिया और 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में सामने आया कि यह शव युवराज का था।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि शव मिलने के बाद उसकी जानकारी जिपनेट पर क्यों अपलोड नहीं की गई। परिवार का आरोप है कि यदि शव से जुड़ी जानकारी समय पर साझा की जाती तो युवराज के परिजनों को उसकी पहचान करने का मौका मिल सकता था। इसी मुद्दे को लेकर युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

याचिका में लापता लोगों और अज्ञात शवों से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए देशभर में एक समान SOP बनाए जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि अज्ञात शव बरामद होने के बाद उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी अलग-अलग पुलिस एजेंसियों और डेटाबेस में समय पर साझा की जानी चाहिए, ताकि परिवारों को अपने लापता परिजनों की जानकारी मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद गुरुग्राम पुलिस में भी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई है। बादशाहपुर SHO राजेश बागड़ी को सस्पेंड किया गया है। वहीं, इस मामले के जांच अधिकारी ASI साहून खान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन पर अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी पहचान और कानूनी प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में कंट्रोल रूम के अधिकारी और फॉरेंसिक टीम के दो अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कुल मिलाकर कम से कम पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। DCP साउथ आयुष यादव के अनुसार, इंस्पेक्टर और फोरेंसिक यूनिट के अधिकारियों समेत कम से कम पांच अधिकारियों पर लापरवाही और चूक को लेकर एक-दो दिन में कार्रवाई की जा सकती है।

युवराज हत्याकांड के बाद गुरुग्राम पुलिस ने अज्ञात शवों की पहचान को लेकर नई व्यवस्था भी लागू की है। अब जिले में मिलने वाले हर अज्ञात शव की निगरानी ACP हेडक्वार्टर करेंगे। उन्हें इस काम के लिए विशेष नोडल ऑफिसर बनाया गया है। इसके अलावा क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी की भी विशेष ड्यूटी लगाई गई है, जो सीधे DCP क्राइम को रिपोर्ट करेंगे।

नई व्यवस्था के तहत अज्ञात शव से जुड़ी सूचना और उसके बाद की कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शव मिलने के बाद उसकी पहचान से जुड़ी प्रक्रिया में किसी स्तर पर जानकारी छूट न जाए।

अज्ञात शव मिलने की स्थिति में अब गुरुग्राम कंट्रोल रूम को दिल्ली पुलिस के साथ-साथ फरीदाबाद, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और पलवल के कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क करना होगा। शव की फोटो, हुलिया और उपलब्ध जानकारी साझा की जाएगी। इसका मकसद दूसरे जिलों या राज्यों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से मिलान कर जल्द से जल्द पहचान करने की कोशिश करना है।

इस मामले में पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। DCP साउथ आयुष यादव ने बताया कि डॉक्टर के संबंध में भी हरियाणा स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई की सिफारिश भेजी जाएगी। डॉक्टर ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना होने की आशंका जताई थी। अब इस रिपोर्ट और डॉक्टर की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।

युवराज के हत्या मामले की जांच में दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच अहम कड़ी बनी। तकनीकी जांच के आधार पर युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा के नाम सामने आए। दोनों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने पैसों के विवाद में युवराज की गोली मारकर हत्या करने की बात कबूल की।

इस पूरे मामले में अब जांच केवल हत्या के आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस की ओर से शव की पहचान, जानकारी साझा करने, पोस्टमॉर्टम और कानूनी प्रक्रिया में हुई कथित चूक की भी समीक्षा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद अधिकारियों की जवाबदेही और अज्ञात शवों की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

युवराज मामले के बाद गुरुग्राम पुलिस ने पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल की गश्त और रिस्पॉन्स सिस्टम में भी बदलाव शुरू किया है। पुलिस की नई व्यवस्था में अज्ञात शव से जुड़ी सूचना को वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में रखने और आसपास के जिलों के साथ तत्काल साझा करने पर जोर दिया जा रहा है।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक टीम और पोस्टमॉर्टम से जुड़े तथ्यों की जांच के आधार पर तय होगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस कमिश्नरों की ओर से दाखिल किए जाने वाले व्यक्तिगत हलफनामे के बाद मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।