GST अफसर को गिरफ्तारी का अधिकार नहीं: ₹5 करोड़ से कम की गड़बड़ी पर क्रिमिनल केस नहीं, ₹10 हजार से कम टैक्स चोरी पर नोटिस भी नहीं
GST काउंसिल ने टैक्स मामलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की सीमा ₹5 करोड़ की, ₹10 हजार से कम टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं और जनरल पेनल्टी घटाकर ₹10 हजार की।
➤ ₹5 करोड़ से कम की गड़बड़ी पर आपराधिक मुकदमे की सीमा खत्म
➤ ₹10 हजार से कम टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं
➤ जनरल पेनल्टी ₹25 हजार से घटकर ₹10 हजार हुई
GST व्यवस्था में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की 53वीं बैठक में टैक्स से जुड़े मामलों में आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ाने समेत कई अहम फैसले लिए गए। अब ₹5 करोड़ से कम की टैक्स गड़बड़ी के मामलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन शुरू नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों को पेनल्टी तथा सिविल प्रक्रिया के तहत निपटाने की व्यवस्था होगी। वहीं, ₹10 हजार से कम की टैक्स चोरी पर कारोबारी को नोटिस भी नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही GST अधिकारियों की गिरफ्तारी से जुड़ी शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। काउंसिल ने ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए नियम आसान करने का फैसला किया है। हालांकि, मौजूदा GST टैक्स स्लैब और रेट स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
GST मामलों में क्रिमिनल केस की मिनिमम लिमिट को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इसका मतलब है कि पहले जहां ₹1 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी पर भी आपराधिक कार्रवाई शुरू की जा सकती थी, अब यह सीमा बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। ₹5 करोड़ से कम की गड़बड़ी को आपराधिक कार्रवाई के बजाय पेनल्टी और सिविल प्रक्रिया के तहत निपटाया जाएगा।
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GST काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तारी का अधिकार वापस लेने का भी फैसला किया है। इसके साथ कानून में सजा से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। पहले छोटे-मोटे टैक्स विवादों में भी एक निश्चित सजा का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने इस नियम को खत्म कर दिया है। अब किसी मामले में कितनी सजा होगी, जुर्माना लगेगा या जेल होगी, इसका फैसला अदालत करेगी।
व्यापारियों के लिए एक और अहम बदलाव इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC को लेकर किया गया है। ईमानदारी से कारोबार करने वाले खरीदारों को धोखाधड़ी करने वाले सप्लायर की वजह से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए काउंसिल ने Committee of Officers गठित करने का फैसला किया है।
यह कमेटी इस बात का अध्ययन करेगी कि यदि किसी खरीदार के पास सही इनवॉइस यानी बिल है, उसने सामान प्राप्त कर लिया है और सप्लायर को पूरा भुगतान भी कर दिया है, तो उसे धोखाधड़ी करने वाले सप्लायर की वजह से परेशान न होना पड़े। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 3 महीने में देनी होगी। रिपोर्ट को अगली GST काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा।
काउंसिल ने जनरल पेनल्टी को भी कम करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, जिन मामलों में कोई विशेष जुर्माना तय नहीं था, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी को ₹25 हजार से घटाकर ₹10 हजार कर दिया गया है। इससे उन मामलों में कारोबारियों को राहत मिलेगी, जिनमें अलग से कोई विशेष पेनल्टी निर्धारित नहीं थी।
GST व्यवस्था में टैक्स रेट को लेकर भी वित्त मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के मुताबिक टैक्स रेट का स्ट्रक्चर अब स्थिर हो चुका है। इसलिए GST काउंसिल अब इस बात पर ज्यादा ध्यान दे रही है कि रोजाना के कामकाज में टैक्स सिस्टम किस तरह बेहतर तरीके से काम करे।
अब GST दरों में बदलाव को लेकर भी नया नियम तय किया गया है। GST दरों में कोई भी बदलाव साल में सिर्फ एक बार किया जाएगा। इससे टैक्स रेट में बार-बार होने वाले बदलावों की प्रक्रिया को सीमित किया जाएगा।
काउंसिल ने ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए भी नियम आसान करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के लिए GST से जुड़ी प्रक्रिया को सरल बनाना है। हालांकि, इस बैठक में मौजूदा टैक्स स्लैब या रेट स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर GST काउंसिल के इन फैसलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाना, गिरफ्तारी की शक्ति में बदलाव, ITC से जुड़े खरीदारों के हितों की सुरक्षा, जनरल पेनल्टी कम करना और टैक्स रेट में साल में एक बार बदलाव जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। इन फैसलों का असर कारोबारियों और GST से जुड़े मामलों की प्रक्रिया पर पड़ेगा।
Akhil Mahajan