पहला नवरात्र आज: मां शैलपुत्री की पूजा से होती है नवरात्र की शुरुआत, जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ रंग

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा, धार्मिक महत्व, शुभ रंग, मंत्र और पूजा विधि जानें। पढ़ें नवरात्र की प्रमुख परंपराओं की पूरी जानकारी।

पहला नवरात्र आज: मां शैलपुत्री की पूजा से होती है नवरात्र की शुरुआत, जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ रंग

➤ पहले नवरात्र में होती है मां शैलपुत्री की पूजा, नौ दिनों की आराधना का होता है शुभारंभ

➤ मां शैलपुत्री को समर्पित है सफेद रंग, पूजा में श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष महत्व

➤ ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र के जाप के साथ भक्त करते हैं सुख-शांति और समृद्धि की कामना


धार्मिक डेस्क। शारदीय नवरात्र का पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को समर्पित माना जाता है। इस दिन से नौ दिनों तक चलने वाले देवी आराधना के पर्व की शुरुआत होती है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और उन्हें शक्ति, धैर्य, दृढ़ संकल्प तथा नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर पूजा स्थल की सफाई करते हैं, कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा का आह्वान करते हैं और मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा करते हैं। भक्त देवी को फूल, अक्षत और स्वच्छ जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं। इस दिन ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जाप भी किया जाता है। धार्मिक परंपरा में मां शैलपुत्री को सफेद रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए कई श्रद्धालु पूजा और वस्त्रों में सफेद रंग को विशेष महत्व देते हैं।

कौन हैं मां शैलपुत्री, जानें उनका स्वरूप

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में मां शैलपुत्री को प्रथम स्थान प्राप्त है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इसी कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। मां शैलपुत्री को सामान्यतः वृषभ यानी बैल पर सवार दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प होता है।

धार्मिक मान्यता में त्रिशूल शक्ति और साहस का प्रतीक है, जबकि कमल पवित्रता और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है। मां शैलपुत्री का स्वरूप भक्तों को जीवन में धैर्य रखने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और अपने संकल्प पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

पहले नवरात्र में कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्र के पहले दिन पूजा की शुरुआत घर और पूजा स्थल की स्वच्छता से की जाती है। श्रद्धालु सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, फल और स्वच्छ जल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद देवी के मंत्र का जाप और आरती की जाती है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं और पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करने का प्रयास करते हैं।

पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा विधि में परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बदलाव हो सकता है।

मां शैलपुत्री का मंत्र

पहले नवरात्र में मां शैलपुत्री की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।

भक्त इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंत्र जाप मन को एकाग्र करने और देवी के प्रति भक्ति व्यक्त करने का माध्यम है।

पहले नवरात्र में सफेद रंग का महत्व

मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपरा में सफेद रंग शांति, पवित्रता और सरलता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु सफेद वस्त्र पहनते हैं और पूजा में सफेद फूलों का उपयोग करते हैं।

हालांकि, पूजा में किसी विशेष रंग का प्रयोग करना श्रद्धालु की परंपरा और आस्था पर निर्भर करता है। देवी की आराधना में सबसे महत्वपूर्ण भाव श्रद्धा, संयम और भक्ति का माना जाता है।

नवरात्र के पहले दिन का आध्यात्मिक संदेश

नवरात्र का पहला दिन नई शुरुआत, आत्मसंयम और सकारात्मक संकल्प का संदेश देता है। मां शैलपुत्री की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु जीवन में साहस, धैर्य और स्थिरता बनाए रखने की प्रेरणा लेते हैं।

नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होते हैं। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के बाद दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। इस प्रकार यह पर्व भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर प्रदान करता है।