रवि आजाद की जमानत याचिका खारिज, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा ट्रायल

बहल थाना नाबालिग छेड़छाड़ और अपहरण मामले में रवि आजाद की जमानत खारिज। फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल चलेगा। पंचायत व सोशल मीडिया पर पहचान उजागर करने पर कोर्ट सख्त।

रवि आजाद की जमानत याचिका खारिज, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा ट्रायल

• रवि आजाद की जमानत याचिका खारिज, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा ट्रायल
• पंचायत व सोशल मीडिया पर पीड़ित की पहचान उजागर, कोर्ट सख्त
• पीड़ित पक्ष को राहत, पहचान उजागर करने वालों पर कानूनी कार्रवाई तय



भिवानी जिले के बहल थाना क्षेत्र में नाबालिग से छेड़छाड़ और अपहरण के गंभीर आरोपों में फंसे किसान नेता Ravi Azad की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जिला न्यायालय की सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को रवि आजाद की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल पूरा होने तक रवि आजाद का जेल से बाहर आना मुश्किल होगा।

यह मामला 12 दिसंबर को बहल थाना में दर्ज हुआ था। पीड़ित नाबालिग के पिता ने रवि आजाद और उसके साथियों पर छेड़छाड़ और अपहरण के गंभीर आरोप लगाए थे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्यों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई।

मामले के तूल पकड़ने के बाद 15 दिसंबर को रवि आजाद की ओर से एक पंचायत आयोजित किए जाने का आरोप है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस पंचायत में पीड़ित परिवार की पहचान सार्वजनिक रूप से उजागर की गई, जो कानून और नाबालिग की गोपनीयता के खिलाफ है। इसके बाद पीड़ित परिवार ने इस संबंध में अलग से शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने 19 दिसंबर को रवि आजाद के दो साथियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद 24 दिसंबर को खुद रवि आजाद को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उसी दिन लोहारू कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे वापस ले लिया गया। बाद में भिवानी सेशन कोर्ट में दोबारा जमानत मांगी गई, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।

पीड़ित पक्ष के वकील Ashok Arya के अनुसार, सेशन कोर्ट के फैसले के बाद रवि आजाद की रिहाई की संभावनाएं फिलहाल समाप्त हो गई हैं। मामला अब फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।

कोर्ट ने पंचायत और सोशल मीडिया पर पीड़ित की पहचान उजागर करने के मामले में दायर याचिका को भी स्वीकार कर लिया है। अब ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। इसे पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।