बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतरी महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत, कहा- हड़ताल आमजन को महंगाई से बचाने की लड़ाई

महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया और निजीकरण को आमजन तथा किसानों के हित से जुड़ा मुद्दा बताया।

बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतरी महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत, कहा- हड़ताल आमजन को महंगाई से बचाने की लड़ाई

➤ महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन किया
➤ पंचायत ने कहा- आंदोलन सिर्फ विभाग बचाने नहीं, आमजन के हित की भी लड़ाई
➤ सर्वखाप जल्द पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करेगी


हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत ने कर्मचारियों के समर्थन का ऐलान किया है। पंचायत का कहना है कि बिजली कर्मचारियों की यह हड़ताल केवल बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध आम जनता के हितों और भविष्य में बढ़ने वाले आर्थिक बोझ से भी है। पंचायत ने बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को आमजन से जुड़ा मुद्दा बताते हुए उनके साथ खड़े होने की बात कही है।

महम से प्रकाशित खबर के अनुसार, बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। यह हड़ताल 22 से 24 अक्टूबर तक चलने की बात कही गई है। बिजली कर्मचारी यूनियनों और कर्मचारियों से हड़ताल का समर्थन करने की अपील की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल विभागीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में जाने से रोकना भी इसके पीछे प्रमुख उद्देश्य है।

महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि बिजली विभाग का निजीकरण होता है तो इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। पंचायत के मुताबिक निजीकरण के बाद बिजली से जुड़ी व्यवस्था में होने वाले बदलावों का आर्थिक भार आखिरकार आम आदमी पर पड़ने की आशंका है। इसी वजह से पंचायत ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को आम जनता को महंगाई की मार से बचाने की लड़ाई बताया है।

खबर में बिजली कर्मचारी यूनियन से जुड़े महासचिव मास्टर रामफल राठी के हवाले से कहा गया है कि बिजली विभाग के निजीकरण का असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उनका कहना है कि इसका सीधा असर किसानों और आम लोगों पर पड़ सकता है और आने वाले समय में लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।

मास्टर रामफल राठी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर जल्द ही सर्वखाप पंचायत पदाधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। बैठक में बिजली कर्मचारियों के आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है।

बिजली कर्मचारियों की ओर से लगातार यह तर्क दिया जा रहा है कि बिजली व्यवस्था केवल एक विभागीय सेवा नहीं है, बल्कि किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और आम जनता के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। ऐसे में बिजली वितरण व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव का असर व्यापक स्तर पर पड़ सकता है।

महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत के समर्थन से बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को स्थानीय स्तर पर सामाजिक समर्थन मिलने का संकेत मिला है। अब सर्वखाप पंचायत की प्रस्तावित बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि पंचायत इस आंदोलन के समर्थन में आगे किस तरह की भूमिका निभाती है।

फिलहाल बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल और निजीकरण का मुद्दा हरियाणा में चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारियों के आंदोलन के बीच महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत का समर्थन इस मुद्दे को कर्मचारी संगठनों से आगे आम उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।