अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: राजा की चानणी से निकली नरसिंह की जलेब, देवताओं के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के तीसरे दिन भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकली। ढालपुर में देवताओं के दर्शन को श्रद्धालु उमड़े और देवलू पारंपरिक धुनों पर झूमे।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के तीसरे दिन भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकली
➤ ढोल-नगाड़ों और शहनाई की गूंज पर पारंपरिक धुनों में झूमे देवलू, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा ढालपुर
➤ राजा की चानणी से शुरू हुई जलेब में गड़सा घाटी समेत विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं ने लिया भाग
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के तीसरे दिन देव परंपरा के अनुसार भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकाली गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज, देवताओं के जयकारों और जय श्रीराम के उद्घोष के बीच निकली इस भव्य शोभायात्रा से पूरा ढालपुर देवमय हो गया। जलेब में शामिल देवलू पारंपरिक लोक धुनों पर जमकर झूमे, जबकि देवी-देवताओं के दर्शन के लिए सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
शाम 4:18 बजे के बाद राजा की चानणी से जलेब की शुरुआत हुई। इसमें गड़सा घाटी सहित विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं ने अपने लाव-लश्कर के साथ भाग लिया। जलेब की अगुवाई भगवान नरसिंह की घोड़ी ने की। इसके पीछे देवी-देवताओं का भव्य काफिला आगे बढ़ा। ढोल-नगाड़ों, करनाल और शहनाई की गूंज के बीच निकली इस शोभायात्रा ने दशहरा उत्सव की पारंपरिक देव संस्कृति को जीवंत कर दिया।
पालकियों और सजे-धजे रथों में विराजे देवी-देवता, दर्शन कर निहाल हुए श्रद्धालु
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। सजे-धजे रथों और पालकियों में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु रास्ते के दोनों ओर खड़े रहे। जैसे-जैसे जलेब आगे बढ़ी, लोगों ने देवताओं की भव्य शोभायात्रा को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
जलेब के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर देवलुओं का नृत्य विशेष आकर्षण रहा। ढोल-नगाड़ों और शहनाई की ताल पर झूमते देवलुओं ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया। देवताओं के जयकारों और जय श्रीराम के उद्घोष से ढालपुर का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कॉलेज चौक से कला केंद्र के पीछे होते हुए ढालपुर चौक पहुंची जलेब
भगवान नरसिंह की जलेब का पारंपरिक मार्ग राजा की चानणी से शुरू हुआ। यहां से शोभायात्रा कॉलेज चौक, पुराने एसबीआई पार्क और कला केंद्र के पीछे से होते हुए ढालपुर चौक तक पहुंची। इसके बाद जलेब वापस राजा की चानणी पहुंची, जहां इसका समापन हुआ।
पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ जुटी रही। लोगों ने सजे-धजे रथों और पालकियों में विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन किए। जलेब के दौरान देव परंपरा से जुड़े विभिन्न दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
दशहरा उत्सव में पूरे ढालपुर मैदान की रक्षा करते हैं भगवान नरसिंह
देव मान्यता के अनुसार, दशहरा उत्सव के दौरान भगवान नरसिंह पूरे ढालपुर मैदान में रक्षा सूत्र बांधते हैं। भगवान नरसिंह को भगवान रघुनाथ का रक्षक माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता और परंपरा के अनुसार दशहरा उत्सव में उनकी जलेब का विशेष महत्व है।
जलेब के संपन्न होने के बाद सभी देवी-देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों में लौट गए। इस तरह अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के तीसरे दिन भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ संपन्न हुई।
Akhil Mahajan