हिमाचल-पंजाब-हरियाणा में बनी 82 दवाओं के सैंपल फेल, बच्चों की दवा से हार्ट-किडनी की दवाएं शामिल

CDSCO के अगस्त 2026 ड्रग अलर्ट में हिमाचल की 63, हरियाणा की 11 और पंजाब की 8 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

हिमाचल-पंजाब-हरियाणा में बनी 82 दवाओं के सैंपल फेल, बच्चों की दवा से हार्ट-किडनी की दवाएं शामिल

CDSCO के अगस्त 2026 ड्रग अलर्ट में हिमाचल की 63 दवाओं के सैंपल फेल

➤ हरियाणा की 11 और पंजाब की 8 दवाएं भी गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरीं

➤ कंपनियों को नोटिस, प्रभावित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने की कार्रवाई

नालागढ़। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO के अगस्त 2026 के ड्रग अलर्ट में देशभर में बड़ी संख्या में दवाओं के सैंपल Not of Standard Quality (NSQ) पाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 221 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश की 63, हरियाणा की 11 और पंजाब की 8 दवाएं शामिल हैं। इस तरह इन तीन राज्यों में बनी कुल 82 दवाओं के सैंपल इस अलर्ट में सामने आए हैं।

इन दवाओं में बच्चों के सिरप, एंटीबायोटिक, हार्ट से जुड़ी दवाएं, बुखार और दर्द की दवाएं, खांसी की दवाएं, पेट और किडनी से संबंधित दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल बताए गए हैं। हालांकि NSQ का मतलब यह है कि जांच किया गया नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानक या विनिर्देश पर खरा नहीं उतरा। इसे सीधे तौर पर हर संबंधित दवा के नकली होने के बराबर नहीं माना जाता। CDSCO भी NSQ और Spurious Drugs को अलग-अलग श्रेणियों में रखता है।

हिमाचल की 63 दवाओं के सैंपल फेल

अगस्त के ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल रहा। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बनी 63 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए। इनका निर्माण बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, दवनी, गुल्लरवाला, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित दवा इकाइयों में बताया गया है।

हिमाचल का बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र देश के प्रमुख फार्मा उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है। CDSCO की क्षेत्रीय प्रयोगशाला संबंधी जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ स्थित Regional Drugs Testing Laboratory हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से दवाओं के नमूनों की गुणवत्ता जांच करती है।

दवाओं के नमूनों की जांच में अलग-अलग गुणवत्ता मानकों को देखा जाता है। यही वजह है कि किसी नमूने के फेल होने का कारण सभी मामलों में एक जैसा नहीं होता। नियामकीय जांच में संबंधित दवा के निर्धारित मानक और परीक्षण परिणामों के आधार पर स्थिति तय की जाती है।

हरियाणा की 11 और पंजाब की 8 दवाएं भी सूची में

ड्रग अलर्ट में हरियाणा की 11 और पंजाब की 8 दवाओं के सैंपल भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अलावा उत्तराखंड की 39, गुजरात की 17, महाराष्ट्र की 16 और मध्य प्रदेश की 12 दवाओं के सैंपल भी अलर्ट में शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए, उनमें गुणवत्ता जांच के दौरान डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, pH, पार्टिकुलेट मैटर और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (API) जैसे अलग-अलग मानकों से जुड़े मामले सामने आए।

हालांकि, प्रत्येक दवा के मामले में विफलता का कारण अलग हो सकता है। किसी दवा का सैंपल किस विशेष मानक पर फेल हुआ, यह संबंधित उत्पाद की जांच रिपोर्ट और निर्धारित स्पेसिफिकेशन पर निर्भर करता है।

बच्चों की दवा से लेकर हार्ट और किडनी की दवाएं शामिल

फेल सैंपलों की सूची में कई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपयोग वाली दवाओं के नमूने शामिल बताए गए हैं। इनमें बच्चों के लिए पैरासिटामोल ओरल सस्पेंशन, एंटीबायोटिक, डायबिटीज से संबंधित दवा, खांसी की दवा, दर्द निवारक दवा और अन्य उत्पाद शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर रिपोर्ट में बद्दी के भुड्ड क्षेत्र में निर्मित पैरासिटामोल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन के एक बैच का सैंपल फेल होने का उल्लेख है। यह दवा बच्चों में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों में शामिल है।

एक अन्य मामले में सिरमौर जिले में निर्मित सिटाग्लिप्टिन और मेटफॉर्मिन टैबलेट का नमूना भी गुणवत्ता जांच में फेल बताया गया है। यह दवा डायबिटीज से संबंधित उपचार में इस्तेमाल होती है।

वहीं, सोलन के सुबाथू में निर्मित एजीथ्रोमाइसिन और लैक्टिक एसिड बैसिलस टैबलेट के सैंपल का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। इस तरह अलर्ट में बच्चों की दवा से लेकर एंटीबायोटिक और अन्य चिकित्सकीय उपयोग वाली दवाओं के नमूने शामिल हैं।

कंपनियों को कारण बताओ नोटिस

हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के हवाले से बताया गया है कि जिन कंपनियों के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने के साथ नियमों के अनुसार कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है।

कंपनियों से जवाब मांगा गया है और बाजार में भेजे गए संबंधित स्टॉक को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। संबंधित बैचों के संबंध में नियामकीय कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे उत्पादों की आगे बिक्री और वितरण को रोका जा सके।

किसी नमूने के NSQ पाए जाने के बाद नियामकीय एजेंसियां संबंधित बैच, निर्माता और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करती हैं। इसके साथ ही संबंधित कंपनी से जवाब और जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

NSQ का मतलब नकली दवा होना नहीं

दवाओं से जुड़े इस अलर्ट में NSQ यानी Not of Standard Quality शब्द का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। किसी दवा का नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानक या विनिर्देश पर खरा नहीं उतरने पर उसे NSQ श्रेणी में रखा जाता है। CDSCO की आधिकारिक व्यवस्था में NSQ Drugs और Spurious Drugs अलग-अलग श्रेणियां हैं।

इसलिए केवल किसी उत्पाद का नाम NSQ अलर्ट में आने के आधार पर उसे नकली या जाली दवा कहना सही नहीं होगा। संबंधित उत्पाद के मामले में नियामकीय जांच और कार्रवाई के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होती है।

दवाओं की गुणवत्ता को लेकर निगरानी जारी

CDSCO की वेबसाइट पर दवाओं की गुणवत्ता से जुड़े NSQ अलर्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। केंद्रीय और राज्य औषधि नियंत्रण प्रयोगशालाओं के माध्यम से नमूनों की जांच की जाती है। CDSCO की आधिकारिक अलर्ट व्यवस्था में NSQ से संबंधित सूचनाएं और अलग-अलग ड्रग अलर्ट उपलब्ध कराए जाते हैं।

अगस्त 2026 के मामले में संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी होने के बाद उनके जवाब और नियामकीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रभावित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने तथा बाजार में उपलब्ध स्टॉक को वापस लेने की प्रक्रिया इसी नियामकीय कार्रवाई का हिस्सा है।

उपभोक्ताओं के लिए किसी भी दवा को लेकर घबराने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार दवा लेना और नियामकीय अलर्ट में बताए गए संबंधित बैच की जानकारी पर ध्यान देना अधिक उचित है। किसी दवा के संबंध में संदेह होने पर संबंधित चिकित्सक या फार्मासिस्ट से जानकारी ली जा सकती है।