हरियाणा में निजी कंपनी को बिजली बांटने पर सरकार ने लगाई रोक, अधिसूचना जारी

हरियाणा सरकार ने निजी कंपनी की समानांतर बिजली सप्लाई रोकने के निर्देश दिए हैं। गुरुग्राम और नूंह के लाइसेंस को लेकर विवाद में बड़ा फैसला आया है।

हरियाणा में निजी कंपनी को बिजली बांटने पर सरकार ने लगाई रोक,  अधिसूचना जारी

➤ सरकार ने निजी कंपनी के बिजली वितरण को आगे बढ़ाने से रोका
➤ गुरुग्राम-नूंह में दिए गए लाइसेंस को लेकर बड़ा फैसला
➤ धारा 108 के तहत बिजली आयोग को सरकार ने दिए निर्देश


हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार ने निजी कंपनी को बिजली बांटने के लाइसेंस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को निर्देश दिया है कि प्रदेश में पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस को आगे लागू या शुरू न किया जाए। आसान भाषा में समझें तो सरकारी बिजली व्यवस्था के साथ किसी निजी कंपनी को समानांतर तरीके से बिजली बांटने की व्यवस्था आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। यह निर्देश बिजली अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत जारी किया गया है।

सरकार के इस फैसले का सीधा संबंध गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस से है। सरकारी पत्र में बताया गया है कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने 19 अक्टूबर 2026 को Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह के लिए पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस दिया था। इन इलाकों में पहले से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम बिजली वितरण का काम कर रहा है।

यानी आसान शब्दों में मामला यह है कि एक ही इलाके में सरकारी बिजली कंपनी के साथ एक दूसरी निजी कंपनी को भी बिजली बांटने की अनुमति देने का रास्ता खुल गया था। बिजली कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों ने इसी व्यवस्था का विरोध किया था। अब राज्य सरकार ने आयोग को निर्देश दिया है कि इस तरह के पैरेलल वितरण लाइसेंस को हरियाणा में आगे लागू या प्रभावी न किया जाए।

सरकार ने अपने पत्र में कई वजहों का भी जिक्र किया है। सरकार के सामने यह चिंता रखी गई थी कि निजी कंपनी के आने से ज्यादा कमाई वाले उपभोक्ता दूसरी कंपनी के पास जा सकते हैं। इससे मौजूदा बिजली वितरण कंपनी की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा बिजली के मौजूदा ढांचे के दोहराव, बिजली खरीद से जुड़े खर्च और क्रॉस-सब्सिडी जैसी व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।

सरकार ने यह भी कहा है कि पैरेलल लाइसेंस दिए जाने के बाद आम लोगों, बिजली उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मचारियों में चिंता और आंदोलन की स्थिति पैदा हुई है। सरकार ने उपभोक्ताओं के हित और राज्य के सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।

इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने केवल गुरुग्राम और नूंह की बात नहीं की है। पत्र में बिजली आयोग को निर्देश दिया गया है कि पूरे हरियाणा में पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस को बनाया, शुरू या प्रभावी न किया जाए। यानी सरकार फिलहाल प्रदेश में इस तरह की समानांतर बिजली वितरण व्यवस्था को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।

हालांकि यहां एक बात स्पष्ट समझना जरूरी है। सरकारी पत्र में यह नहीं कहा गया है कि गुरुग्राम-नूंह के निजी कंपनी वाले लाइसेंस को सीधे शब्दों में रद्द कर दिया गया है। सरकार ने आयोग को निर्देश दिया है कि ऐसे लाइसेंस को आगे लागू या प्रभावी न किया जाए। यानी लाइसेंस को लेकर आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के स्तर पर होगी।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिजली कर्मचारी निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में हड़ताल पर थे। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को दिए गए पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस को रोकना शामिल था। सरकार के इस आदेश से कर्मचारियों की इसी मांग को बड़ा आधार मिला है।

सरकारी पत्र के अनुसार, ये निर्देश मुख्यमंत्री हरियाणा की मंजूरी के बाद जारी किए गए हैं। राज्य सरकार ने आयोग से इन निर्देशों को संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।