हरियाणा में बिजली संकट,हड़ताल से कई जिलों में बत्ती गुल, गुरुग्राम में लाखों लोग प्रभावित

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से कई जिलों में आपूर्ति प्रभावित, गुरुग्राम में 10 लाख लोग परेशान, जींद अस्पताल में जनरेटर चला और निजीकरण पर विवाद बढ़ा

हरियाणा में बिजली संकट,हड़ताल से कई जिलों में बत्ती गुल, गुरुग्राम में लाखों लोग प्रभावित

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल से कई जिलों में बिजली सप्लाई प्रभावित

➤ गुरुग्राम में 8 से 10 लाख लोग प्रभावित, जींद के अस्पताल में जनरेटर से चलाना पड़ा काम

➤ निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में 40 हजार कर्मचारियों के हड़ताल पर होने का दावा, मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

हरियाणा में बिजली वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का असर पहले ही दिन कई जिलों में दिखाई देने लगा। बुधवार रात 12 बजे से शुरू हुई हड़ताल के चलते गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, पंचकूला, रोहतक, सोनीपत, जींद, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ समेत कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। जिन इलाकों में रात के समय बिजली की लाइनों में फॉल्ट आया, वहां मरम्मत का काम प्रभावित होने से लोगों को लंबे समय तक बिजली के बिना रहना पड़ा।

बिजली कटौती का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। कई जगह इन्वर्टर और बैटरियां भी जवाब दे गईं। सुबह बिजली नहीं होने के कारण पानी की मोटरें नहीं चल सकीं और लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ा। जींद के नागरिक अस्पताल में जनरेटर चलाना पड़ा, जबकि झज्जर सचिवालय में बिजली गुल होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ।

बिजली कर्मचारियों का विरोध गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी ‘इलेवन पावर’ को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के फैसले के खिलाफ है। कर्मचारियों और इंजीनियर संगठनों का कहना है कि इस फैसले से सार्वजनिक बिजली वितरण निगमों की व्यवस्था और आय पर असर पड़ सकता है। वहीं, सरकार ने हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। बिजलीघरों और पावर हाउसों पर पुलिस तैनात की गई है तथा बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।

गुरुग्राम में 8 से 10 लाख लोग प्रभावित, कई इलाकों में रातभर बिजली गुल

गुरुग्राम में हड़ताल का व्यापक असर सामने आया। शहर के सेक्टर-5, सेक्टर-7, पालम विहार, दौलताबाद और पुराने शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। यहां करीब 8 से 10 लाख लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।

लंबे समय तक बिजली नहीं आने से पॉश सोसाइटियों में जनरेटर का सहारा लेना पड़ा, जबकि अफोर्डेबल सोसाइटियों में रहने वाले लोगों के इन्वर्टर और बैटरियां भी ठप हो गईं। रात में बिजली गुल रहने के कारण लोगों को परेशानी हुई और सुबह पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा।

सेक्टर-5 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने आधी रात को बिजली गुल होने की स्थिति का वीडियो बनाकर मीडिया कर्मियों के साथ साझा किया। इस वीडियो के जरिए इलाके में बिजली आपूर्ति ठप होने की स्थिति सामने आई।

जींद में कई इलाकों में ब्लैकआउट, अस्पताल में जनरेटर चलाने की नौबत

जींद जिले में नरवाना और सफीदों को छोड़कर अधिकतर हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की सूचना सामने आई। जींद शहर के ज्यादातर इलाकों में रात करीब 11 बजे से बिजली गुल रही। उचाना, अलेवा, पिल्लूखेड़ा और जुलाना में भी रात से बिजली आपूर्ति ठप होने की जानकारी मिली।

जिले में हॉटलाइन से जुड़े नागरिक अस्पताल में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण जनरेटर चलाना पड़ा। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए निगम के ठेकेदार के कर्मचारियों को बुलाया गया है। संवेदनशील पावर हाउसों पर पुलिस की तैनाती भी की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

झज्जर, नारनौल और कुरुक्षेत्र में भी बिजली संकट

झज्जर में शहर के बेरी गेट, शिव कॉलोनी समेत कई इलाकों में रात करीब 11 बजे से बिजली गुल रही। लंबे कट के कारण घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए। सुबह बिजली नहीं होने से पानी की मोटरें नहीं चल सकीं और टंकियां नहीं भर पाईं। इससे लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया। झज्जर सचिवालय में बिजली गुल होने के कारण सरकारी कामकाज भी प्रभावित हुआ।

नारनौल और महेंद्रगढ़ में भी हड़ताल का असर दिखाई दिया। महेंद्रगढ़ शहर में रात से बिजली गुल रही, जबकि नारनौल के अनेक मोहल्लों में सुबह 5 बजे से बिजली नहीं आई। अटेली, सतनाली और कनीना सहित कई ग्रामीण फीडरों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद होने की सूचना मिली। नारनौल में एसडीएम ने बिजलीघर का निरीक्षण भी किया।

कुरुक्षेत्र और पिहोवा में बुधवार रात करीब 11 बजे से बिजली आपूर्ति ठप होने की जानकारी सामने आई। जिला प्रशासन ने पावर हाउसों पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों को तैनात किया, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।

सिरसा के कालांवाली में 33 केवी लाइन ब्रेकडाउन, मरम्मत में देरी

सिरसा जिले के कालांवाली क्षेत्र में गुरुवार सुबह 7:25 बजे 33 केवी लाइन में अचानक ब्रेकडाउन हो गया। इससे इलाके की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। पहले से चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लाइन की खराबी ठीक करने का काम अटक गया।

सुबह के समय बिजली नहीं होने से पानी की आपूर्ति और लोगों के रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए। बिजली के इंतजार में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग उठी।

यमुनानगर में 1,500 कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर

यमुनानगर में बिजली निगम के करीब 1,500 कर्मचारी और अधिकारी निजीकरण के विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। इससे जिले के 4.42 लाख बिजली उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित होने और फॉल्ट ठीक करने में देरी की आशंका जताई गई है।

हड़ताल में नियमित और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। जिले के 39 सबस्टेशनों और 504 फीडरों की बिजली आपूर्ति बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। निगम ने छुट्टी पर गए कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाया है, जबकि प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करने का दावा किया है।

डीसी प्रीति ने बिजलीघरों पर पुलिस तैनात करने और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। बिजली ढांचे की सुरक्षा के लिए 24 अक्टूबर रात 11:59 बजे तक धारा 163 लागू रहेगी। परेशानी होने पर लोग 1950 या डायल 112 पर सूचना दे सकते हैं।

सोनीपत में कर्मचारियों का प्रदर्शन, मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

सोनीपत में बिजली कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए। कर्मचारियों ने बताया कि सांझा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। उनका कहना है कि अगस्त महीने में भी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ तीन दिन की हड़ताल की गई थी, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह जैसे अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में बिजली वितरण निजी हाथों में सौंपने का प्रावधान किया जा रहा है। सरकार ने 10 अक्टूबर तक समाधान निकालने का वादा किया था, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि करीब 40 हजार नियमित और कच्चे-पक्के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने सरकार से निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो तीन दिवसीय हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है।

पंचकूला में 66 केवी सबस्टेशन पर पुलिस तैनात, बिजली आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश

पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित 66 केवी सबस्टेशन पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। इस सबस्टेशन से शहर के करीब आधे हिस्से में बिजली की आपूर्ति होती है। बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए शहर के आर्मी कमांड एरिया के इलेक्ट्रिकल विंग से 30 कर्मचारियों को लिया गया। इसके चलते पंचकूला शहर में बिजली आपूर्ति फिलहाल सुचारू रहने की जानकारी दी गई।

सरकार ने प्रदेश के दूसरे बिजलीघरों और पावर हाउसों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है, ताकि हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति के ढांचे की सुरक्षा की जा सके और किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कर्मचारियों से की हड़ताल वापस लेने की अपील

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को समीक्षा बैठक की। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल पर नहीं जाने और आंदोलन वापस लेने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ है और बातचीत के दरवाजे खुले हैं।

गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कोई आवेदन नहीं मांगा था। उन्होंने बताया कि सरकार इस फैसले के खिलाफ अपीलेंट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) में मजबूती से पक्ष रखेगी।

मुख्यमंत्री ने यूनियनों को अपनी पसंद के वकील के माध्यम से मामले की पैरवी कराने का विकल्प भी दिया। उन्होंने कहा कि वकील की फीस सरकार वहन करेगी। त्योहारी सीजन को देखते हुए उन्होंने बिजली कर्मचारी संगठनों से हड़ताल वापस लेने की अपील की।

बिजली इंजीनियरों ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

पंचकूला में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुंडू और महासचिव रविंदर सिंह घनघस ने यूएचबीवीएन (UHBVN) के पंचकूला मुख्यालय पर हड़ताल के बाद आयोजित सभा को संबोधित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।

इंजीनियर नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को तत्काल कैबिनेट की बैठक बुलाकर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए कि हरियाणा में किसी भी दूसरी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। उन्होंने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर कंपनी को दिए गए लाइसेंस को रद्द कराने के लिए कानूनी कदम उठाने की मांग की।

AIPEF अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि राज्य सरकार को केवल APTEL में अपील करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, बिजली कानून 2003 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करके लाइसेंस रद्द कराने की कार्रवाई भी की जानी चाहिए। उन्होंने जनता और बिजली कर्मचारियों के विरोध के बावजूद निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

हरियाणा सोलर एसोसिएशन और कंडेला खाप ने भी किया समर्थन

बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में हरियाणा सोलर एसोसिएशन ने भी बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से घोषित 22, 23 और 24 अक्टूबर की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया है। एसोसिएशन ने गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले को वापस लेने की मांग की।

एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुंडू ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक जनसेवा से जुड़े फैसलों में किसानों, ग्रामीण उपभोक्ताओं, सार्वजनिक बिजली निगमों और कर्मचारियों के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि अधिक राजस्व देने वाले शहरी, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के निजी कंपनी की ओर जाने से सार्वजनिक बिजली वितरण निगमों की आय प्रभावित हो सकती है।

वहीं, सर्वजातीय कंडेला खाप के प्रधान ओमप्रकाश कंडेला, प्रेस प्रवक्ता जगत सिंह रेढू और प्रधान महासचिव राजसिंह कंडेला ने भी बिजली को निजी हाथों में सौंपने के फैसले की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से आम आदमी के अधिकार प्रभावित होंगे और चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने का रास्ता खुलेगा।

खाप पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण विभिन्न वर्गों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने हरियाणा के सभी वर्गों के लोगों से बिजली कर्मचारियों की लड़ाई में साथ देने की अपील की और हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की।

बिजली विभाग में 25,543 पद खाली, आउटसोर्स कर्मचारियों के सहारे व्यवस्था

बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी और काम के बढ़ते दबाव को भी मौजूदा विरोध की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा ऊर्जा विभाग में कुल 53,289 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 25,543 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 48 प्रतिशत पदों पर भर्ती नहीं हुई है।

अकेले ग्रुप-सी के 23,063 पद खाली हैं। विभाग की व्यवस्था चलाने के लिए 15,362 आउटसोर्स कर्मचारियों का सहारा लिया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी और निजीकरण के फैसले को लेकर बिजली विभाग में असंतोष बना हुआ है।

हड़ताल के बीच बिजली आपूर्ति बहाल करना प्रशासन के लिए चुनौती

हड़ताल के पहले दिन सामने आई स्थितियों ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती को स्पष्ट कर दिया है। गुरुग्राम में लाखों लोगों के प्रभावित होने, जींद में अस्पताल को जनरेटर से चलाने की जरूरत पड़ने और कई जिलों में फॉल्ट ठीक करने में देरी की खबरों के बीच प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए स्थिति संभालने में जुटा है।

बिजली कर्मचारी संगठनों की मांग है कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस का फैसला वापस लिया जाए। वहीं, सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़ने और कर्मचारियों से बातचीत जारी रखने की बात कही है। अब सबकी नजर इस पर है कि तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति कितनी सुचारू रह पाती है और सरकार तथा कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं।