हड़ताल तो खत्म हुई, पर छोड़ गई गहरा जख्म: 24,000 से अधिक फैक्ट्रियां रहीं ठप, अरबों की चपत

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल मुख्यमंत्री नायब सैनी और अनिल विज से बैठक के बाद खत्म हुई, कई जिलों में बिजली संकट और उद्योग प्रभावित हुए।

हड़ताल तो खत्म हुई, पर छोड़ गई गहरा जख्म: 24,000 से अधिक फैक्ट्रियां रहीं ठप, अरबों की चपत

➤ CM सैनी और अनिल विज से बातचीत के बाद बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म की
➤ गुरुग्राम, नूंह समेत कई जिलों में रातभर बिजली संकट से लोग परेशान रहे
➤ औद्योगिक संगठनों का दावा, करीब 24 हजार फैक्ट्रियों का काम प्रभावित हुआ


हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में शुरू हुई बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। बुधवार रात करीब 10 बजे शुरू हुई हड़ताल के बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, नूंह, रेवाड़ी, पलवल और नारनौल समेत हरियाणा-एनसीआर के कई इलाकों में रातभर बिजली संकट बना रहा। बिजली के लिए परेशान लोगों ने कई जगह सड़कों और बिजली सब-स्टेशनों पर प्रदर्शन किया। इसका असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों पर भी पड़ा, जबकि पेयजल आपूर्ति को लेकर भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

हालांकि, शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ बैठक के बाद बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही करीब दो दिन से चल रहा बिजली संकट समाप्त होने की दिशा में रास्ता साफ हुआ। कर्मचारियों की हड़ताल का मुख्य मुद्दा गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस का विरोध था।

कई जिलों में रातभर रहा बिजली संकट

हड़ताल का असर हरियाणा-एनसीआर के कई प्रमुख शहरों में दिखाई दिया। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, नूंह, रेवाड़ी, पलवल और नारनौल के अनेक हिस्सों में रातभर बिजली नहीं रही। बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग को लेकर लोगों ने सड़कों और बिजली सब-स्टेशनों पर प्रदर्शन किया।

गुरुवार को भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके। शहरों के अलावा औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली नहीं होने के कारण पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

उद्योगों पर पड़ा बड़ा असर

बिजली संकट का सबसे बड़ा असर छोटी औद्योगिक इकाइयों पर पड़ा। त्योहारी सीजन के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई फैक्ट्रियों में उत्पादन रोकना पड़ा। खबर के अनुसार, गुरुग्राम, बावल, पलवल के पृथला, फरीदाबाद, सोनीपत, नूंह और सोहना के आसपास बड़ी संख्या में छोटी औद्योगिक इकाइयां बिजली पर निर्भर हैं।

इन इकाइयों में से कई के पास पहले डीजल जेनरेटर की वैकल्पिक व्यवस्था रहती थी, लेकिन पिछले चार वर्षों से ग्रेप के तहत लागू पाबंदियों के कारण कई कंपनियों ने जेनरेटर हटा दिए हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उनके पास उत्पादन जारी रखने के सीमित विकल्प ही बचे।

औद्योगिक संगठनों ने बताया 10 हजार करोड़ का नुकसान

औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार, करीब 24 हजार फैक्ट्रियों में काम प्रभावित होने से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हड़ताल के दूसरे दिन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ फीडर चालू करने की कोशिश की गई, लेकिन बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी।

इन छोटी फैक्ट्रियों में बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए पार्ट्स और अन्य सामान तैयार किया जाता है। इसके अलावा गारमेंट और दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी इकाइयां भी प्रभावित हुईं। बिजली पर पूरी तरह निर्भर फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद करना पड़ा, जबकि जिन इकाइयों ने किसी तरह जेनरेटर से काम चलाया, वहां उत्पादन लागत बढ़ गई।

बड़े उद्योगों को समय पर सामान न देने की भी चिंता

बिजली संकट के कारण उत्पादन रुकने का असर आगे बड़ी कंपनियों को होने वाली सप्लाई पर भी पड़ा। औद्योगिक संगठन के अनुसार, अनुबंध के तहत समय पर उत्पाद उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में कुछ फैक्ट्री संचालकों को जुर्माना भी झेलना पड़ा।

प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के हरियाणा चेयरमैन दीपक मैनी के मुताबिक, केवल बिजली पर निर्भर फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा और त्योहारी सीजन में आई इस समस्या के कारण उद्योगों को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अब हड़ताल खत्म होने के बाद व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ बातचीत के बाद कर्मचारियों द्वारा हड़ताल वापस लेने के फैसले से बिजली व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, हड़ताल के दौरान औद्योगिक क्षेत्र और आम लोगों को हुए नुकसान ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था और निजीकरण को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति को पूरी तरह सामान्य करना और औद्योगिक इकाइयों का काम दोबारा पटरी पर लाना है। हड़ताल खत्म होने के बाद उपभोक्ताओं और उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।