हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, जिले प्रभावित; CNG पंप बंद, कोर्ट के काम रूके़
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से 15 जिलों में बिजली संकट गहरा गया है। झज्जर में CNG पंप बंद और कैथल-कुरुक्षेत्र में कोर्ट का काम प्रभावित हुआ।
➤ 15 जिलों में बिजली संकट, कई इलाकों में 24 घंटे से ज्यादा समय से सप्लाई बाधित
➤ झज्जर में CNG पंप बंद, हिसार-फरीदाबाद समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे
➤ मंत्री अनिल विज ने हड़ताल खत्म कर बातचीत का न्यौता दिया, धारा 108 पर कार्रवाई के संकेत
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहने से बिजली संकट गहराता जा रहा है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के विरोध में शुरू हुई इस हड़ताल का पहले दिन प्रदेश के 15 जिलों में व्यापक असर देखने को मिला। 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से अधिक फीडर ब्रेकडाउन की स्थिति में रहे। भिवानी में सबसे ज्यादा 280 फीडर प्रभावित बताए गए। करनाल, भिवानी, यमुनानगर और अंबाला के कई इलाकों में 28 घंटे बाद भी बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। गुरुग्राम, फरीदाबाद और सिरसा में बिजली संकट से परेशान लोगों ने सड़क पर उतरकर जाम लगाया और विरोध जताया।
शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी कई क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हुए हैं। हिसार के पॉश इलाकों में करीब 24 घंटे से बिजली गुल रहने की सूचना है। सेक्टर-13, सेक्टर-16-17, विद्युत नगर, मॉडल टाउन, सेक्टर-9-11, टाउन एंक्लेव और अर्बन एस्टेट सहित कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। तकनीकी खराबियों और फीडर ब्रेकडाउन के चलते शहर के बड़े हिस्से में लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
बिजली संकट का असर अब केवल घरों तक सीमित नहीं रहा है। झज्जर में लगातार दूसरे दिन ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी रही और शहर के कई इलाकों में रातभर बिजली नहीं आई। शिव कॉलोनी, वार्ड नंबर-1, बेरी गेट और पुराने बस स्टैंड क्षेत्र सहित कई स्थानों पर लोग अंधेरे में रहे। बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण शहर में CNG पंप भी बंद कर दिए गए। इससे आम लोगों के साथ व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा।
झज्जर के सासरोली पावर हाउस से बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण बिरोहड़, मालियावास, सासरोली, ढाणी, सुंदरहेटी और झांसवां समेत करीब दर्जनभर गांव प्रभावित हुए। 33 केवी पंप हाउस की बिजली बंद होने से पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा। ग्रामीणों को घरेलू कामकाज के साथ पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ा।
फरीदाबाद में भी लोगों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। एनआईटी-2, टीटू कॉलोनी, पल्ला और सारण में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहने के बाद लोग परेशान हो गए। पेयजल के लिए लोगों को लाइनों में लगना पड़ा। रात में बच्चों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ी। देर रात लोगों ने मस्जिद चौक पर जाम लगाया और सेक्टर-64 स्थित बिजली पावर हाउस पहुंचकर नाराजगी जताई।
हिसार में बिजली संकट का असर गांवों तक पहुंच गया। ढंडूर, सिसाय, मंगाली, धांसू, कैमरी, गंगवा, हरिकोट, मिर्जापुर, रायपुर और शिकारपुर सहित कई गांवों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली नहीं होने से पेयजल पंप प्रभावित हुए और कई इलाकों में सुबह पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। अस्पतालों और कोल्ड चेन से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी चिंता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग ने आपात स्थिति में जनरेटर से बैकअप उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
उधर, आउटकलाना और बरवाला क्षेत्र में 132 केवी एचवीपीएनएल लाइन में फॉल्ट आने से 40 से अधिक गांवों में ब्लैकआउट की स्थिति बनने की जानकारी सामने आई है। तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए नियमित तकनीकी कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने बिजली व्यवस्था बहाल करने की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
सरकार के वैकल्पिक इंतजाम भी चुनौती में फंसे
हड़ताल से निपटने के लिए सरकार ने फील्ड स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने की कोशिश की। पटवारियों और ग्राम सचिवों की ड्यूटी बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सहयोग के लिए लगाई गई, लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में फॉल्ट दूर करने में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकी।
कुछ स्थानों पर ITI विद्यार्थियों को भी ड्यूटी से जोड़ने से संबंधित पत्र सामने आए। हालांकि बिजली लाइनों और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए व्यावहारिक अनुभव की कमी एक बड़ी चुनौती बनी रही। सब-स्टेशनों और फीडरों पर पुलिस की तैनाती से तोड़फोड़ या जानबूझकर नुकसान की घटनाओं को रोकने में मदद मिली, लेकिन तकनीकी फॉल्ट दूर करना अलग समस्या बना रहा।
पड़ोसी राज्यों से तकनीकी कर्मचारियों को बुलाने की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई। उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी संगठनों ने अपनी सरकार को स्पष्ट रूप से कहा कि उनका कोई कर्मचारी हड़ताल के दौरान हरियाणा में ड्यूटी करने नहीं जाएगा।
बिजली मंत्री अनिल विज ने बातचीत का न्यौता दिया
हड़ताल के बीच बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत के लिए तैयार है। इनमें विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई का विकल्प भी शामिल है।
विद्युत अधिनियम की धारा 108 राज्य सरकार को राज्य विद्युत नियामक आयोग को जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों पर लिखित निर्देश देने की शक्ति देती है। कानून के अनुसार, यदि किसी निर्देश को लेकर यह सवाल उठता है कि वह जनहित से जुड़े नीतिगत मामले से संबंधित है या नहीं, तो इस संबंध में राज्य सरकार का निर्णय अंतिम होता है।
इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से धारा 108 का इस्तेमाल कर एचईआरसी के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का फैसला बिजली निगमों के कर्मचारियों, अभियंताओं और अन्य हितधारकों के लिए परिचालन एवं वित्तीय संकट पैदा कर सकता है।
कर्मचारियों का दावा, वेतन नहीं बल्कि बिजली व्यवस्था के लिए लड़ाई
इंजीनियर एसोसिएशन के मीडिया इंचार्ज और असिस्टेंट एक्सईएन बलजीत बैनीवाल ने कहा कि कर्मचारियों की लड़ाई वेतन के लिए नहीं है। उनका दावा है कि यह किसानों और आम जनता के हित से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि गुरुग्राम का औद्योगिक क्षेत्र निजी कंपनी के पास चला गया तो किसानों और आम उपभोक्ताओं को मिल रही बिजली सब्सिडी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने लोगों से बिजली क्षेत्र को बचाने के लिए कर्मचारियों का सहयोग करने और अफवाहों से बचने की अपील की।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
बिजली संकट के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब हैं, लेकिन प्रदेश में बिजली गायब है। वहीं नवीन जयहिंद ने भी बिजली मंत्री अनिल विज पर निशाना साधते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
कुरुक्षेत्र और कैथल में कोर्ट का काम भी प्रभावित
हड़ताल का असर न्यायिक कामकाज तक पहुंच गया है। कुरुक्षेत्र और कैथल बार एसोसिएशन ने बिजली संकट और हड़ताल के चलते कोर्ट का काम सस्पेंड रखने का फैसला किया है। इससे बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ विभिन्न संस्थागत और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल करने की है जहां लंबे समय से फॉल्ट और फीडर ब्रेकडाउन के कारण बिजली नहीं पहुंच पा रही है। सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता खुला रखने और कर्मचारियों से ड्यूटी पर लौटने की अपील के बावजूद हड़ताल के दूसरे दिन भी कई इलाकों में संकट बना हुआ है।
Akhil Mahajan