पानीपत शुगर मिल 11 माह में होगा बनकर तैयार।। डीसी सुमेधा का दावा, आॅन लाइन टेंडर जारी

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पानीपत, 14 अगस्त।

पानीपत के गांव डाहर में अत्याधुनिक रूप से स्थापित किया जाने वाला पानीपत सहकारी चीनी मिल पानीपत ही नहीं वरन पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक बेनजीर तोहफा होगा, जिसकी मांग बड़े अर्से से की जा रही है। पानीपत चीनी मिल व इसकी आसवनी इकाई की पुर्नस्थापना आधुनिकीकरण और उत्पादन बढाने पर करीब 450 करोड़ रूपये की लागत आएगी। इसके लिए ऑनलाइन टेंडर जारी कर दिए गए हैं और वर्कआर्डर देने के बाद इसको बनाने का लक्ष्य 11 महीने का रखा गया है। यहां पुनस्र्थापित होने वाले इस चीनी मिल को 75 एकड़ में बनाया जाएगा और इसकी पिराई क्षमता प्रतिदिन 50 हजार क्विंटल रहेगी, जिसे 75 हजार क्विंटल तक ले जाया जा सकता है। इसकी डिस्टलरी इकाई भी वर्तमान में हरियाणा के सहकारिता के क्षेत्र में अपने स्वयं के प्रभुत्व वाली इकाई है, जोकि एथनॉल का भी उत्पादन करती है। यह एथनॉल पेट्रोल में मिलाए जाने के लिए काम आता है।

बता दें कि हरियाणा में बीजेपी सरकार को चार साल का समय पूरा हो चुका है, लेकिन इससे पहले सरकार ने डाहर शुगर के निर्माण के लिए सिर्फ आश्वासन ही दिए हैं। इसके कारण ज़िले के किसानों में सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा था।  किसानों का हज़ारों क्विंटल गन्ना दावे के बाद भी शुगर मिल नहीं ले पाया था, जिससे किसानों  भारी परेशानी उठानी पड़ी थी। अब देखना ये होगा कि इस बार सरकार किसानों का कितना गन्ना लेती है या फिर इस बार भी उनका गन्ना खेतों में ही खड़ा सूख जायेगा। सवाल ये भी है की पिछले दावों को देखते हुए क्या डाहर में शुगर मिल 11 माह में बनकर तैयार हो जायेगा?

मिल के शुरू होते ही समय पर होगी गन्ने की पिराई 
जानकारी दी थी अक्टूबर 2015 में मुख्यमंत्री ने नए शुगर मिल का शिलान्यास किया था।
ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा ने बताया सरकार ने पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।डीसी सुमेधा कटारिया ने बताया कि वर्कआर्डर देने के बाद इसको बनाने का लक्ष्य 11 महिने का रखा गया है।

 

इस बारे में विधायक महिपाल ढांडा का कहना है कि विगत 18 अक्टूबर, 2015 को जब मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस चीनी मिल के लिए पत्थर रखा था, तभी से लोग सरकार की ओर बड़ी आस भरी नजरों से देख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह अभूतपूर्व फैसला किसानों के हक में लिया था। इस चीनी मिल से किसानों को अत्याधिक लाभ होगा। यहां के किसान हरियाणा के ही नहीं, उत्तरप्रदेश के चीनी मिलों में अपना गन्ना लेकर जाते थे, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसके शुरू होने पर अब समय पर गन्ने की पिराई होगी। इसके अतिरिक्त यहां के किसानों में गन्ने की फसल के प्रति भी दिलचस्पी बढ़ेगी। हालांकि 1956 में स्थापित पानीपत सहकारी चीनी मिल ने अपने वक्त के कई उतार-चढाव इस दौर में देखे हैं। किसानों का भावनात्मक रूप से इससे जुड़ाव भी हो चुका है और जो स्टीम इंजन रेलवे बंद कर चुकी है, यह मिल उसी स्टीम इंजन के सहारे आज तक किसानों  और आमजन की चीनी की पूर्ति करता आया है। वर्तमान में 18 हजार क्विंटल एक दिन में अपनी पिराई की क्षमता देता है।

ज्ञात रहे कि करनाल के घरौंडा में 30 जुलाई 2018 को धन्यवाद रैली से लौटकर पानीपत ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा ने जानकारी दी थी अक्टूबर 2015 में मुख्यमंत्री ने नए शुगर मिल का शिलान्यास किया था। तकनीकी कारणों से मिल का निर्माण रुका हुआ था। निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। लगभग 70 एकड़ भूमि में बनने वाले नए शुगर मिल के निर्माण पर 350 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सरकार ने पहली किस्त के रूप में 100 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।

डिस्टलरी इकाई की क्षमता वर्तमान में 30 हजार लीटर : डीसी  

उपायुक्त एवं पानीपत सहकारी चीनी मिल की अध्यक्ष सुमेधा कटारिया ने बताया कि इसकी डिस्टलरी इकाई की वर्तमान में 30 हजार लीटर की क्षमता है जोकि पुनस्र्थापना और आधुनिकीकरण के बाद इसकी क्षमता 45 हजार लीटर एथनॉल प्रतिदिन होगी। इसके लिए ऑनलाइन टेंडर जारी कर दिए गए हैं और वर्कआर्डर देने के बाद इसको बनाने का लक्ष्य 11 महिने का रखा गया है। पानीपत चीनी मिल व इसकी आसवनी इकाई की पुर्नस्थापना आधुनिकीकरण और उत्पादन बढाने पर करीब 450 करोड़ रूपये की लागत आएगी। इस नए मिल के बनने से यह लाभ भी अर्जित करेगा, जिससे किसानों के लिए विकास के नए द्वार खुलेंगे।

जिला में गन्ने का उत्पादन 54 लाख क्विंटल: बीर सिंह 

पानीपत सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक बीर सिंह ने बताया कि वर्तमान में जिला में गन्ने का उत्पादन 54 लाख क्विंटल है जोकि इसकी पिराई क्षमता से ज्यादा है। नया चीनी मिल लगने के बाद पिराई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा। विगत दिनों किसान यूनियन ने भी इसके टैण्डर होने पर अपनी खुशी जाहिर की थी और कहा था कि इस मिल को लेकर किसान वर्ग को राहत मिलेगी।

किसान बोले, गर्व की बात 

इस मामले में प्रगतिशील किसान इसराना के हेमराज नांदल ने बताया कि यह प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल की दूरदर्शी सोच और किसानों की मेहनत का ही परिणाम है। वहीं, महराणा के पूर्व सरपंच नरेन्द्र नांदल ने बताया कि इस शुगर मिल के स्थापित होने से आसपास के क्षेत्र में रोजगार के नए साधन बनेंगे। एक अन्य किसान इसराना के जसबीर सिंह व डिकाडला के देवेन्द्र गाहल्याण ने बताया कि इस शुगर मिल के बनने से किसानों की लम्बित मांग पूरी होने जा रही है। यह हम सब किसानों के लिए गर्व की बात है।

सरकार ने जुलाई में किया था चीनी मिलों को 200 करोड़ रुपए की सहायता देने का ऐलान 
नया चीनी मिल लगने के बाद पिराई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
नया चीनी मिल लगने के बाद पिराई क्षमता बढ़ेगी और किसानों को इसका लाभ मिलेगा।

ज्ञात रहे कि जुलाई 2018 के अंतिम सप्ताह में गन्ना किसानों की मुश्किलों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने बड़ा ऐलान किया था। सहकारिता राज्य मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर ने कहा था कि सरकार ने चीनी मिलों को 200 करोड़ रुपए की सहायता दे दी है। जिसके बाद गन्ना किसानों का बकाया भुगतान खत्म किया जा सकेगा। 200 करोड़ की सहायता राशि में से पानीपत जिले के लिए 19 करोड़ रुपए, रोहतक जिले के लिए 21 करोड़ रुपए, करनाल जिले के लिए 17 करोड़ रुपए, सोनीपत के लिए 14.5 करोड़ रुपए, शाहबाद के लिए 39.5 करोड़ रुपए, जिंद के लिए 14 करोड़ रुपए, पलवल के लिए 1.5 करोड़ रुपए, मेहम के लिए 26 करोड़ रुपए, कैथल के लिए 21 करोड़ रुपए और गोहाना के लिए 13 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। ज्ञात हो कि साल 2017-18 में सहकारी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई के लिए 455.27 लाख क्विंटल गन्ना लाया गया था, जिसकी कीमत 1497.68 करोड़ थी।


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सिटी तहलका डेस्क

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