5 दिन से हरिद्वार रोड पर पड़ी है नाले से निकली  गंदगी । प्रशासन को नहीं मानसून की चिंता, शहर सडे़ तो सड़े

एक हफ्ते से उनकी दुकानों पर कोई ग्राहक तक नहीं चढ़ रहा है। रविवार की बारिश ने तो और भी बुरा हाल कर दिया। नाले से निकली आंधी गंदगी बारिश के कारण वापस नालों में पहुंच गई।
पानीपत विशेष स्टोरी

पानीपत में हरिद्वार रोड पर नालों का कचरा और गंदगी निकाली  तो गई, लेकिन उसे पांच दिन बाद भी उठाने की जहमत नहीं उठाई गई। इससे साफ साबित होता है कि शहर सड़े तो सड़े, लेकिन प्रशासन को शायद ही मानसून की चिंता हो। बरसात का सीजन शुरू हो चुका है, रविवार की बरसात ने सीजन की दस्तक दे दी है, बारिश ने इस कचरे को फिर से नालों में वापस भेजने का काम कर दिया है। काफी कचरा तो नाले में वापस पहुंच भी चुका है। सवाल ये है कि प्रशासन को शहर के नालों की सफाई का खयाल बरसात का सीजन शुरू होने के बाद क्यों आता है। जबकि यह काम एक माह पहले भी हो सकता है।

पांच दिन से बदबू में बैठने को मजबूर हैं दुकानदार, ग्राहकी भी ठप

हरिद्वार रोड के दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन हर बार नालों की सफाई का काम बरसात का मौसम शुरू होने के बाद ही आरंभ कराता है। नालों से निकली गंदगी और कचरा निकाल कर दुकानों के सामने बड़े-बडे़ ढेर लगा दिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें खुद तो दुकान खालने में दिक्कत आती ही है, साथ ही उनकी दुकानदारी भी ठप हो जाती है। उनका कहना है कि कचरा निकालने के बाद एक दो दिन में उठा लिया जाए तो वे फिर भी झेल सकते हैं, लेकिन एक-एक हफ्ते तक यह कचरा और गंदगी उनकी दुकानों के सामने पड़े रहना कहां का नियम कानून है। एक हफ्ते से उनकी दुकानों पर कोई ग्राहक तक नहीं चढ़ रहा है। रविवार की बारिश ने तो और भी बुरा हाल कर दिया। नाले से निकली आंधी गंदगी बारिश के कारण वापस नालों में पहुंच गई। ऐसी सफाई का क्या फायदा हुआ।

  • एक हफ्ते से उनकी दुकानों पर कोई ग्राहक तक नहीं चढ़ रहा है। रविवार की बारिश ने तो और भी बुरा हाल कर दिया। नाले से निकली आंधी गंदगी बारिश के कारण वापस नालों में पहुंच गई।
    एक हफ्ते से उनकी दुकानों पर कोई ग्राहक तक नहीं चढ़ रहा है। रविवार की बारिश ने तो और भी बुरा हाल कर दिया। नाले से निकली आंधी गंदगी बारिश के कारण वापस नालों में पहुंच गई।
विभाग ढिंढौरा ज्यादा पीटता है शहर की सफाई का 

लोगोें का कहना है कि जिस तरह से प्रशासन और विभागीय अधिकारी शहर की सफाई का ढिंढौरा पीटते हैं, यदि उसका 20 प्रतिशत कार्य भी वे हकीकत में कर लें तो शहर अलग ही दिखेगा। विभागीय अधिकारी नालों की गंदगी साफ कराकर अपनी ड्यूटी की इतिश्री कर लेते हैं, शायद गंदगी को उठवाना उनकी ड्यूटी में शामिल नहीं है। करीब एक हफ्ते से कचरा यहां पड़ा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का ध्यान अभी तक कचरा उठाने की ओर नहीं पहुंच पाया है। उनका कहना है कि अगर एक दो दिन और कचरा उनकी दुकानों के आगे पड़ा रहा तो उनकी दुकानदारी बिल्कुल ठप हो जाएगी। प्रशासन को शीघ्र ही इस ओर ध्यान देना चाहिए।


by

जितेंद्र अहलावत 
सिटी तहलका 

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