दवाइयों की बेकद्री के कड़वे सच देख बोले सीएमओ, जल्द की जाएगी डिस्पेंसरी में फ्रिज और एसी की व्यवस्था 

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पानीपत जिले के सिविल अस्पताल भले ही मरीजों के लिए दवाइयां न हों, लेकिन दो बजे के बाद अस्पताल के भीतर मौजूद दवाइयों के कमरों से लोग जितनी चाहे उतनी दवाइयां आसानी से निकालकर ले सकते हैं। इसका सच सिटी तहलका टीम ने अपने कैमरे में कैद किया था। इतना ही नहीं, सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग में जो ओपीडी कक्ष बनाया गया है, उसमें मरीजों को सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक दवाइयां दी जाती हैं। कक्ष में जहां दवाइयां रखी गई हैं, वहां पर ना तो दवाइयों के लिए कोई रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था है और ना ही कोई एसी लगा है। आज इस खबर को देख सीएमओ ने कदम उठाया। उन्होंने सिटी तहलका के सामने डिस्पेंसरी की हालत देख खबर को सही माना। उन्होंने कहा कि जल्द ही डिस्पेंसरी में रेफ्रिजरेटर और एसी की व्यवस्था करवा देंगे ताकि दवाइयां खराब ना हों।

बता दें कि सिटी तहलका ने दो कदन पहले ही स्टिंग आपरेशन कर दोपहर 2 बजे के बाद उस कक्ष के आसपास चैकिंग की थी, जिस कक्ष में दवाइयां रखी गई हैं। टीम ने देखा कि दवाइयों के कक्ष की खिड़कियों में हाथ डालकर कोई भी व्यक्ति जितनी चाहे उतनी दवाएं आसानी से निकालकर ले जा सकता है। कोई आपको रोकने-टोकने वाला नहीं।

सिटी तहलका की टीम ने स्वयं इसका प्रेक्टिकल किया। टीम ने खिड़की में हाथ डालकर खुद दवाइयां निकालकर दिखाईं, लेकिन वहां उन्हें किसी ने नहीं टोका। जिस प्रकार खिड़कियां खुली रहती हैं, इससे दवाइयों की कितनी चोरी होती होगी और कितनी बेची जाती होंगी। इससे यहां के कर्मचारियों की लापरवाही साफ उजागर होती है।

एक तरफ अस्पताल कर्मचारी मरीजों को कह देते हैं दवाएं खत्म हो गई और उन्हें बहार से दवाइयों खरीदने के लिए बोल दिया जाता हैं, वहीं दवाएं सरेआम खिड़कियों के पास पड़ी हैं। इसकी प्रशासन स्तरीय जाचं कराए तो  तो इसमें बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। हरियाणा सरकार जहां एक ओर यह दावा करती है कि सभी सिविल हॉस्पिटल्स के अंदर हर प्रकार की दवाई मौजूद है, वहीं मरीजों को इन दवाओं के लिए धक्के खाने पड़ते हैं और मजबूरन प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेनी  पड़ती हैं।

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