इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला रिहा होंगे या नहीं

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इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला रिहा होंगे या नहीं इसको लेकर दायर एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है । याद रहे कि चौटाला जे बी टी भर्ती घोटाले में दस साल की सजा काट रहे हैं।
इस सन्दर्भ में चौटाला के वकील अमित साहनी ने 18 जुलाई 2018 को भारत सरकार द्वारा जारी स्पैशल रिमिशन नोटिफिकेशन के आधार पर हाईकोर्ट में एक याचिका उनके मुवक्किल ओम प्रकाश चौटाला को पूरी तरह से रिहा करने के लिए दायर की थी । जिसकी जस्टिस मनमोहन व जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की 2 सदस्य खंडपीठ सुनवाई कर रही है ।

बता दें कि सीनियर एडवोकेट अमित साहनी ने खंडपीठ के समक्ष दलील दी थी कि नोटिफिकेशन के अनुसार उनका मुवक्किल ओम प्रकाश चौटाला 70% दिव्यांग है ओर उनकी उम्र 84 साल है। इसके अलावा नोटिफिकेशन के प्रावधान के तहत वे 7 साल की सजा काट कर रिहाई के हकदार हैं। जबकि दिल्ली सरकार के वकील ने दलील दी है कि नोटिफिकेशन में पोटा, टाडा, पोक्सो, मनी लॉन्ड्रिंग, फेमा ,एनडीपीएस व करप्शन एक्ट के तहत बंदी कैदियों के लिए रिहाई का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए।
जिसका एडवोकेट अमित साहनी ने विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ओम प्रकाश चौटाला करप्शन में सजायाफ्ता नहीं हैं। बहरहाल खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है ।
अनुमान है कि अगले सप्ताह तक खंडपीठ अपना फैसला सुना देगी। जाहिर तौर पर इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी उस फैसले की इंतजार में है जब उनके नेता ओम प्रकाश चौटाला रिहा होकर घर आ जाएंगे। कयास लगाए जा रहे हैं कि चौटाला के रिहा होने से हरियाणा की राजनीति में निश्चय ही गर्मी आएगी।
बहरहाल देखना होगा कि खंडपीठ क्या फैसला सुनाती है

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