खुद के देश ने इजाजत नही दी तो,वैज्ञानिक ने दूसरे देश जाकर इच्छा मृत्यु के जरिए दुनिया से कहा अलविदा।

Philip Nitshke,
देश मनोरंजन राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय

उम्र सौ को पार कर गई तो बोलें, “बहुत जी लिया” और फिर मरने की इच्छा जताई। अपने देश में इजाजत नहीं मिली तो स्विट्जरलैंड जाकर मर्जी से मौत का दामन थामा। 104 साल के इस ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक ने एक फाउंडेशन की मदद से बृहस्पतिवार को आत्महत्या के जरिए दुनिया को अलविदा कहा। 12 पोतों के परिवार वाले गुडाल को जनता से करीब 20 हजार डॉलर का चंदा जुटाकर पर्थ से स्विटजरलैंड की यात्रा करनी पड़ी ,जहां इच्छा मृत्यु को कानूनी मान्यता है।

Philip Nitshke,

गुडाल की ऑस्ट्रेलिया से स्विट्जरलैंड आने में मदद करने वाले संगठन “एग्जिट इंटरनेशनल” के संस्थापक फिलिप नितश्के ने ट्वीट किया कर कहा “वैज्ञानिक ने शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम सांस ली ” । उन्होंने महशूर संगीतकार बीथोवेन की एक धुन “ऑड टू जॉय” सुनते-२ लाइफ साइकिल क्लीनिक में नेमबुटेल ( आत्महत्या करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा ) के जरिये दिन में 10:30 बजे आखरी सांस ली ! वैज्ञानिक गुडाल एक सप्ताह पहले ऑस्ट्रेलिया से रवाना हुए थे और परिवार से मिलने के लिए फ्रांस के बादो में रुके थे। सोमवार को वह स्विट्जरलैंड के बासेल पंहुचे थे।

 

मौत से 1 दिन पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में लोगों की व्यापक रुचि से आस्ट्रेलिया और दूसरे देश अपने कानून में बदलाव करेंगे ।उन्होंने कहा था मुझे खुशी होती का यदि ऐसा मैं अपने देश ऑस्ट्रेलिया में कर पाता । गुडाल ने साल की शुरुआत में आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी ।बता दे कि बॉटनी और इकोलॉजी के प्रख्यात वैज्ञानिक रहे डेविड गुडाल को उनके देश ने आत्महत्या की इजाजत नहीं दी थी।

 

वह किसी असाध्य रोग से ग्रसित नहीं थे लेकिन उनका कहना था कि उनकी जिंदगी में अब जीने के लायक कुछ नहीं रहा है और वो मरना चाहते हैं । इससे पहले गुडाल ने अपने जन्मदिन के मौके पर कहा था मुझे इस उम्र तक पहुंचने का बहुत अफसोस है ! मैं खुश नहीं हूं , मैं मरना चाहता हूं! मेरे लिए बुरा तब होगा जब मुझे मरने से रोका जाएगा। असल में स्विट्जरलैंड में तमाम जांच के बाद उस व्यक्ति को मौत की नींद सुलाया जा सकता है जो ऐसा करना चाहता है।


 By

नीरज कुमार

{ विशेष संवाददाता}

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