…तो अगले साल पानी को तरसेंगे इन तीन राज्यों के लोग।। बीबीएमबी की चेतावनी

कृषि देश म्हारा हरियाणा विशेष स्टोरी

चंडीगढ़/पानीपत, 6 अगस्त।

चंडीगढ़ से खबर है कि अगले साल पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में लोगों को पानी के लिए पूरी तरह तरसना पड़ सकता है। इसका कारण भाखड़ा डैम में पर्याप्त मात्रा में पानी का भंडारण नहीं हाे पाना बताया गया है। इसी जे मद्देनज़र डैम से अन्य राज्यों के लिए छोड़े जाने वाले पानी में कटौती किए जाने की बात कही गई है।

बीबीएमबी की चेतावनी के बाद प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने बुलाई आपात बैठक

भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सरकारों को चेतावनी दी है कि यदि पौंग और भाखड़ा डैम में पर्याप्त पानी जमा नहीं हुआ, तो सितंबर 2018 से लेकर मई 2019 तक के लिए पेयजल और सिंचाई के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

र्तमान में तीनों राज्यों की औसतन मांग 43 हजार क्यूसिक होगी, जबकि बीबीएमबी केवल 17700 क्यूसिक ही छोड़ पाएगा। हालांकि बिजली उत्पादन पर फिलहाल कोई असर नहीं है, लेकिन निकट भविष्य में बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

पंजाब ने की लांग टर्म स्टडी करवाने की मांग

बीबीएमबी के चेयरमैन बीके शर्मा ने तीनों राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की बैठक बुलाकर उन्हें सारी स्थिति से अवगत करवाया। इस अवसर पर पंजाब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (सिंचाई) जसपाल सिंह ने बताया कि पंजाब के कृषि विभाग ने सभी किसानों से कम पानी का प्रयोग करने संबंधी निर्देश जारी कर दिए हैं और हम अपनी मांग के अनुरूप 50 फीसद ही पानी ले रहे हैं।

बिजली उत्पादन भी हो सकता है प्रभावित

जल संकट पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि बीबीएमबी को स्टडी करनी चाहिए, ताकि पता चला सके कि कैचमेंट एरिया में बारिश कितनी हो रही है, बर्फ पिघलने से कितना पानी बांधों में आ रहा है, जिससे इस डाटा के आधार पर लांग टर्म तैयारी की जा सके। बोर्ड की बैठक में इस सुझाव को मान लिया गया।

जलस्तर गिरने से बढ़ा संकट

भाखड़ा नंगल डैम का जलस्तर गत वर्ष के मुकाबले 62 फीट, पौंग का 41 फीट और रणजीत सागर डैम का 13 मीटर कम है। बीबीएमबी ने अपना आकलन किया है कि जिस हिसाब से बारिश हो रही है, उससे भाखड़ा का जलस्तर बहुत मुश्किल से 1600 फीट और पौंग बांध का 1340 फीट ही पहुंच पाएगा। बोर्ड की बैठक में हरियाणा के चीफ इंजीनियर (नहर) और राजस्थान के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (सिंचाई) भी मौजूद थे। बीबीएमबी का कहना है कि राज्य अपने स्तर पर बारिश के पानी का प्रबंध करें और बीबीएमबी से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर न रहें। उन्होंने कहा कि पानी संकट अभी कितनी देर और चलेगा यह नहीं कहा जा सकता।

इनफ्लो भी चल रहा लगभग आधा

एक हफ्ते से भाखड़ा का इनफ्लो भी गत वर्ष की तुलना में मात्र आधा ही चल रहा है। गत वर्ष जहां आज के दिन 79 हजार क्यूसिक पानी की आमद थी, जबकि इस साल 35502 क्यूसिक ही आ रहा है। पौंग का हाल इससे भी ज्यादा खराब है। पिछले साल एक लाख क्यूसिक से ज्यादा पानी आ रहा था, जबकि इस साल महज 15966 क्यूसिक ही आ रहा है।


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सिटी तहलका, डेस्क

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