कपूत-सपूत की बात वो कर रहे हैं, जिनका खुद का परिवार नहीं।। संयुक्त प्रेस वार्ता में सीएम खट्टर की कुलदीप के लिए अभद्र टिप्पणी पर बोले पूर्व सासंद पं. रामजीलाल

pandit ramji lal sansad
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हिसार में मंगलवार को पूर्व सांसद पं. रामजीलाल ने कांग्रेस भवन में संयुक्त प्रेस वार्ता में 24 जून को आदमपुर में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई पर की गई अभद्र टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि सीएम को इसके लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए। मुख्यमंत्री जैसे गरिमामयी पद पर रहते हुए इस तरह का बयान अशोभनीय है, जिससे पूरे प्रदेश में कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं में जबरदस्त रोष है। इतने जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह की अभद्र टिप्पणी करके उन्होंने अपने ही परिवार के संस्कारों पर सवालिया निशान लगा दिया है। रामजीलाल ने तंज कसते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का खुद का परिवार ही नहीं है, वो कपूत-सपूत के बारे में क्या जानेगा। वहीं उन्होंने जवाहर यादव की टिप्पणी पर कहा कि उन जैसे ओएसडी भजनलाल परिवार ने न जाने कितने लगवाए हैं, उनको कुलदीप बिश्नोई पर टिप्पणी करने से पहले अपने कद का अंदाजा लगा लेना चाहिए।

पं. रामजीलाल ने कहा कि चौ . भजनलाल के जीवित रहते कोई भी बातचीत गठबंधन के बारे में भाजपा नेताओं से नहीं हुई। 3 जून 2011 को जब भजनलाल का निधन हुआ तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी शोक जताने हिसार आए थे और उन्होंने कुलदीप बिश्नोई से दिल्ली में बैठक करने का ऑफर दिया था। इस तरह अक्टूबर 2011 में भाजपा से हजकां का लिखित में गठबंधन हुआ था, जिसकी शर्तों से भाजपा 2014 लोकसभा के बाद मुकर गई थी। जहां तक भाजपा नेताओं द्वारा 2009 की बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह से बेबुनियाद एवं मनगढंत हैं।

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    रामजीलाल ने तंज कसते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का खुद का परिवार ही नहीं है, वो कपूत-सपूत के बारे में क्या जानेगा

उस समय मनोहर लाल की हरियाणा की राजनीति में क्या भूमिका थी  ?

पूर्व सांसद रामजीलाल ने कहा कि पहले तो भाजपा ये बताए कि उस समय मनोहर लाल की हरियाणा की राजनीति में क्या भूमिका थी और किसके साथ, किसने इस तरह की बातें उस समय कही थीं। अगर उस समय ऐसी बातें र्हुइं होती तो अगले चुनाव में भाजपा ने इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया। आज 9 साल के बाद याद कैसे आई? उसके बावजूद 2011 में जब गठबंधन करने भाजपा-कुलदीप पास आए तो उसे वे सारी खूबियां उनमें दिखाई देने लगीं जो पहले नहीं दिखाई दीं। नरेन्द्र मोदी, सुषमा स्वराज, नीतिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अरूण जेटली सहित भाजपा के तमाम राष्ट्रीय एवं स्थानीय नेतृत्व ने तीन वर्षों तक विभिन्न मंचों से कुलदीप बिश्नोई को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया, लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में उनकी पीठ में छुरा घोंपकर प्रदेश की सत्ता हथिया ली। महज सियासी फायदे के लिए दिवंगत नेता के नाम का इतना गलत तरीके से इस्तेमाल करना मुख्यमंत्री की एक ओच्छी हरकत है।

कुलदीप बिश्नोई की लोकप्रियता सीएम सहित भाजपा के गले से नहीं उतर रही

उन्होंने कहा कि कुलदीप बिश्नोई इस समय कांग्रेस के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हैं। उनकी लोकप्रियता मुख्यमंत्री सहित पूरी भाजपा के गले नहीं उतर रही। इसलिए बिना सिर-पैर के बयानों के सहारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल कुलदीप की लोकप्रियता को कम करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसमें वे कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दुर्घटना के चलते मनोहर लाल खट्टर भले ही मुख्यमंत्री बन गए हों, परंतु कुलदीप बिश्नोई जैसे जनप्रिय नेता वे कभी नहीं बन सकते, जिन्होंने विपरित परिस्थितियों में दो लोकसभा चुनाव और तीन विधानसभा चुनाव जीतकर संघर्षशील नेता की छवि पूरे प्रदेश में बनाई और कार्यकत्र्ताओं से आगे रहकर पुलिस की लाठियां अपने सीने पर खाईं। 57 दिनों तक लगातर पूरे प्रदेश में रथ यात्रा के माध्यम से गांव-गांव, गली-गली के लोगों की आवाज बने। प्रेस वार्ता में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रणधीर पनिहार, कुलदीप बिश्नोई के मीडिया प्रभारी संजय गौतम व कांग्रेस नेता सुभाष टांक भी मौजूद रहे।


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सिटी तहलका डेस्क

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