हरियाणा के इस गांव में पहली बार फहराया गया तिरंगा।। गांव के लोग समझते थे खुद को आजाद देश का गुलाम 

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भिवानी / पानीपत, 15 अगस्त।

जब पूरा देश आज आजादी के जश्म में डूबा हैे, वहीं ये आजादी का जश्न हरियाणा के भिवानी के शहीद गांव रोहणात के लिए बेहद खास है। क्योंकि इस गांव में आजादी के 7 दशकों बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया है। सभी ने इस उपलक्ष्य में आजादी के गीत गाए गए। बता दें कि इससे पहले आज तक इस गांव के लोग खुद को आजाद देश के गुलाम समझते थे। इस बार सूबे के मुखिया मनोहर लाल के आश्वासन पर गांव के लोग आजादी के जश्न में झूमें हैं।

आज गांव के सरकारी स्कूल में फहराया गया तिरंगा 

गांव में पहली बार जश्न-ए-आजादी पर गांव की सबसे पढी लिखी बेटी अनामिका ने झंडा फहराया। अनामिका एम.टैक कर चैन्नई में इंकम टैक्स एसिस्टेंट की पोस्ट पर कार्यरत है। अनामिका ने बताया कि पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराया जाता था तो वो केवल टीवी या अखबार में ही जश्न की तस्वीरें देख पाती थी।  अनामिका ने कहा कि आज अपने गांव में ये जश्न और खुद राष्ट्रीय ध्वज फहराने का गौरव पाकर बहुत खुशी मिली। वहीं अन्य बच्चे की भी यही कहानी है। बच्चों ने अपने गांव में आजादी का जश्न पहली बार होता देख खुशी जाहिर की

बता दें कि देश की आजादी के लिए पहली बङी लङाई 1857 में लङी गई। इसे 1857 की क्रांति का नाम दिया गया। पूरे देश के लोगों के साथ इस क्रांति में भिवानी जिले के रोहणात गांव के लोगों का भी अहम योगदान रहा। यहां के लोगों द्वारा आजादी की जंग में कूदने से अंग्रेज इतने आग बबूला हुए कि उन्होने रोहणात गांव के लोगों पर एक-एक कर जुल्म करने शुरु कर दिए। अंग्रेजों ने रोहणात गांव के लोगों को पेड़ों पर फांसी पर लटका दिया। पास के गांव मंगल पूठी खां में तोप लगा कर लोगों को उड़ा दिया गया। इतना ही नहीं, कई लोगों को तो हांसी जाने वाली सड़क पर लिटा कर उनके उपर बुलडोजर चला दिया गया। जिसके बाद इस सड़क का नाम लाल सड़क पड़ा था।

…जब  अंग्रेजों ने कर दिया था लोगों को मारकर गांव की जमीन को नीलाम 

अंग्रेजों के जुल्म यहीं नहीं रुके। उन्होने यहां के अधिकतर लोगों को जिंदा मार डाला और गांव की जमीन को नीलाम कर दिया। कुछ सालों बाद एक-एक कर आसपास के लोगों ने नीलामी में इस जमीन को खरीद लिया। जिसके बाद यहां के स्थाई निवासी जमीन व काम-धंधे से भी वंचित हो गए। हद तब हुई, जब करीब 90 साल बाद देश आजाद हुआ। इस गांव के लोगों को धीरे-धीरे लगने लगा कि उनके बुजुर्गों की आजादी के लिए दी गई शहादत बेकार गई, क्योंकि उन्हे आजादी के बाद भी अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं मिली। इसको लेकर इस गांव में आजादी के बाद कभी भी राष्ट्र ध्वज नहीं फहराया गया। ये लोग आजादी के 70 से भी अधिक वर्षों तक खुद को आजाद देश का गुलाम समझते रहे।

सीएम ने समस्या के समाधान का दिया भरोसा, 23 मार्च को गांव में पहुंच फहराया था तिरंगा 

खुद सीएम मनोहरलाल ने मामले को संज्ञान में लिया और गांव के लोगों से मिले। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे मिलकर और गांव के इतिहास को सुनकर खुद सीएम मनोहरलाल भी हैरान रह गए। ग्रामीण कहते हैं कि इसके बाद सीएम मनोहर लाल ने उनकी समस्या के समाधान का भरोसा दिया। साथ ही खुद सीएम मनोहरलाल ने 23 मार्च को गांव में आए और राष्ट्र ध्वज फहरा कर हमें आजादी का अहसास करवाया। साथ ही सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनके गांव के लोगों की शहादत हमेशा याद रखी जाएगी और उनकी जमीन कानूनी तरीके से उन्हे दिलाई जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि सीएम के भरोसे पर 15 अगस्त को पहली बार गांव के स्कूल में आजादी का जश्न मनाया गया है। उन्हें सीएम से पूरी उम्मीद है कि उनकी मांग वे जल्द पूरी करेंगे।


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सिटी तहलका डेस्क

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