यशपाल मलिक जाटों को लेकर कर रहा घटिया राजनीति।। मंसूबे नहीं होने देंगे कामयाब: डाॅ. राजेश दहिया  

राजनीति विशेष स्टोरी सामाजिक सोनीपत
सोनीपत, 11 अगस्त।

किसान आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेश दहिया ने कहा कि जाट नेता यशपाल मालिक जाटों को लेकर लगातार अपनी घटिया राजनीति कर रहा है और एक बार फिर धरनों के माध्यम से राजनीति करने की कोशिश कर रहा है। परंतु इस बार उसे उसके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। किसान आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी आज सोनीपत स्थित पीडब्लूडी विश्राम गृह में पत्रकारों से मुखातिब थे। पदाधिकारिओं का कहना है कि यदि देश को तरक्की करनी है तो सरकार को देश से आरक्षण को समाप्त करना होगा।

मालिक स्वयं धरने पर बैठेगा और कोई राजनीति नहीं खेलगा तो देंगे साथ
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजेश दहिया
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजेश दहिया कहा कि यदि वह फिर से अपनी पुरानी हरकतों पर चलता है तो हम पूरी तरह से उसका बहिष्कार करेंगे। 

राष्ट्रीय किसान आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजेश दहिया ने कहा कि पिछले दिनों जाट नेता यशपाल मालिक द्वारा आयोजित धरने में प्रदेश और प्रदेश के युवाओं को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। अब एक बार फिर यशपाल मालिक हरियाणा में धरने देने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वह स्वयं धरने पर बैठता है, और कोई राजनीति नहीं खेलता है तो हम भी उसका साथ देंगे। यदि वह फिर से अपनी पुरानी हरकतों पर चलता है तो हम पूरी तरह से उसका बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि धरना शुरू होगा तो उसकी उपस्थिति में ही शुरू होगा।

बुद्धिमान व्यक्ति के स्थान पर बुद्धिहीन व्यक्ति को चुनना ही आरक्षण

जाट नेता मूलचंद दाहिया ने बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश होता था, परन्तु आज इसे किसान मार देश बना दिया गया है। आज देश में जातिवाद का बोलबाला है। ये देश का दुर्भाग्य है कि आधे किसानों को आरक्षण दे दिया और आधों को आरक्षण से बाहर रख दिया। उन्होंने कहा कि आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए तो ये देश अधिक उन्नति कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज देश में चपरासी से लेकर राष्ट्रपति तक सभी दलित हैं। तो आरक्षण की किसी को कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति के स्थान पर बुद्धिहीन व्यक्ति को चुनना ही आरक्षण है। इसी वजह से आज बुद्धिमान व्यक्ति देश छोड़ को छोड़कर खुद को विदेश में स्थापित कर रहे हैं।


by

कविता किट्टू
सिटी तहलका

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