सोनीपत के गांव में जहर उगलती फैक्ट्रियों बनी जानलेवा  II एक वर्ष में 20 ग्रामीणों की कैंसर से मौत  

विशेष स्टोरी सामाजिक सोनीपत
5 सितम्बर , सोनीपत।

 राजधानी दिल्ली से सट्टा सोनीपत का सबोली गांव जहां पर कई फैक्ट्रियां ने गांव के लोगों को गांव से पलायन करने को मजबूर कर दिया है जहर उगलती यह फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं इन फैक्ट्रियों के वजह से गांव में कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी पनप रही है ग्रामीण इसकी लगातार चपेट में आ रहे हैं और इन फैक्ट्रियों की वजह से कैंसर की खतरनाक बीमारी सही अब तक कई ग्रामीणों की मौत हो चुकी है लेकिन इन जहरीली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के नाम पर ना सरकार कुछ कर रही है और ना ही प्रशासन ग्रामीणों ने हर जगह गुहार लगाई है चाहे वह CM विंडो हो या फिर जिले के आला अधिकारी इसके अलावा लोगों ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को भी शिकायत की, जिसके बाद मानकों को दरकिनार कर धुएं और केमिकल की शक्ल में जहर फैला रही दो से तीन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई कर इन्हें बंद भी कराया गया। मगर अभी भी अन्य कई ऐसी फैक्ट्रियां हैं, जो प्रदूषण फैला रही हैं। गांव के सरपंच सतपाल सिंह ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले तक सबोली के निवासियों ने कैंसर बीमारी का महज नाम ही सुना था, मगर गांव से लगती फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहर ने हालात इस कदर कर दिए कि अब लोग गांव तक छोड़ने को मजबूर हैं।

कैंसर की गिरफ्त में आ रहे बुजुर्गों से लेकर जवान ll

कैंसर पीड़ित जयसिंह, महावीर सिंह, जयभगवान, धर्मपाल सिंह व रोहतास सिंह ने बताया कि उनके उचित खानपान व स्वच्छता बरतने के बावजूद कुछ समय पहले ही उन्हें अचानक कैंसर होने का पता चला। उन्होंने बताया कि उनसे पहले ही 20 लोग एक वर्ष के अंतराल में ही कैंसर की बीमारी से जूझते हुए दम तोड़ चुके हैं। सबसे अधिक कैंसर गले व सांस की नली के हो रहे हैं। 35 वर्षीय जयसिंह ने बताया कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पौष्टिक आहार लेते हुए इस उम्र में उन्हें कैंसर की बीमारी घेर लेगी।

सरपंच सतपाल ने बताया कि…

यहां स्थापित अधिकतर फैक्ट्रियों की चिमनियां ऊंचाई पर नहीं है। इसके अलावा फैक्ट्री से निकली केमिकल युक्त गंदगी को खुले में रख इसमें आग लगा दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस गंदगी से ड्रेन नंबर-6 पूर्ण रूप से प्रदूषित हो चुकी है, जिसका असर भूजल पर भी आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि केमिकल के निस्तराण के लिए फैक्ट्री संचालक जमीन में छेद कर बोरवेल के जरिए जहरीला केमिकल जमीन में छोड़ रहे हैं ,जिससे पानी खराब हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से फैक्ट्री में मानकों की जांच कराने के साथ ही गांव में भूजल की जांच कराने की अपील की।

गांव सबोली के आसपास स्थित औद्योगिक इकाइयां मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही हैं, जिससे यहां की आबोहवा में जहर घुल रहा है। यही वजह है कि अकेले सबोली में ही पिछले एक वर्ष के दौरान कैंसर से 20 लोग जान गंवा चुके हैं तो 15 इस भयावह बीमारी से जंग लड़ रहे हैं। बीमारी का प्रकोप बढ़ते देख अब ग्रामीणों ने जहर उगलती फैक्ट्रियों पर नकेल कसवाने के लिए कमर कस ली है। सबोली निवासियों ने गांव के चुनिंदा लोगों की एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया है जो हर रविवार एक बैठक का आयोजन करेगी और गांव के आसपास फैलते प्रदूषण पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा।

ग्रामीणों व पंचायत की ओर से इस समस्या को सही करने के प्रयास किए गए, मगर कोई फायदा नहीं मिला। अब लोगों ने निर्णय लिया है कि वह इस समस्या को खत्म करने के लिए खुद ही बीड़ा उठाएंगे। गांव में कमेटी गठित करने के साथ ही पड़ोसी गांव कुंडली व नाथुपुर के ग्रामीणों को भी इस मुहिम में शामिल किया जाएगा। सरपंच ने बताया कि यह समस्या केवल सबोली की नहीं है, बल्कि आसपास के अन्य गांवों के लोग भी इससे जूझ रहे हैं। इसलिए आसपास के लोगों को एकजुट कर इसे जनांदोलन का रूप दिया जाएगा, ताकि जिला प्रशासन व सरकार की नींद खोली जा सके।

सबोली के आसपास फैक्ट्रियां मानकों की धज्जियां उड़ा रही हैं, मगर इस पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। कुछ वर्ष पहले हमने जहर फैला रही तीन फैक्ट्रियां बद भी कराई थी। अब इसी तरह की कई अन्य फैक्ट्री धड़ल्ले से चल रही है। जमीन के अंदर छेद कर जहर भूजल में मिलाया जा रहा है। लोगों की इस समस्या को विधानसभा में प्रमुखता से उठाऊंगा। बहराल अब देखना होगा की जानलेवा साबित हो रही इन फैक्ट्रियों पर सरकार की नींद कब टूटती है


by

कविता शर्मा 
सिटी तहलका 

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