पानीपत के गन्ना किसान परेशान।। पड़ता सिस्टम को रखना चाहते हैं लागू।

गन्ना किसान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं । वीरवार को उन्होंने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से भी बात की थी। इससे पहले अधिकारियों को भी ज्ञापन दे चुके हैं
कृषि पानीपत विशेष स्टोरी

6  जुलाई | 

पानीपत जिले के गन्ना किसान अपनी समस्याओं को लेकर परेशान हैं । वीरवार को उन्होंने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से भी बात की थी। इससे पहले अधिकारियों को भी ज्ञापन दे चुके हैं लेकिन उनके समस्याओं का हल नहीं हो रहा । किसानों के अनुसार उनकी समस्याओं को कोई नहीं सुनना चाह रहा और ना ही उसका कोई हल किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे सभी पानीपत की शुगर मिल में गन्ना सप्लाई करते हैं।

विगत वर्षों में गन्ना बिजाई क्षेत्र में उतार-चढ़ाव होने की वजह से सभी सहकारी मिलों में पड़ता (BOND) सिस्टम लागू किया गया है ,जिससे सभी मिलों को गन्ना सुचारु रुप से मिलता रहे। किसानों का कहना है इस व्यवस्था से सभी किसान सहमत हैं उनके अनुसार मिल के मौजूदा प्रबंधनिदेशक वीर सिंह अपनी नीतियाँ उन पर थोपना चाहते हैं व पड़ता (BOND) सिस्टम को खत्म करना चाहते हैं ।इस संबंध में जब कुछ किसानों ने MD) से बात की तो उन्होंने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया किसानों का यह भी आरोप है की व्यंग्यात्मक लहजे में उनसे कहा गया कि मिलको चलाना वे उनसे बेहतर जानते हैं

किसानों का कहना है की पड़ता (BOND) सिस्टम को खत्म करने बारे में किसानों को कोई लिखित सूचना नहीं दी गई थी । सभी किसानों ने अपने पड़ते के अनुसार ही बिजाई की थी। सभी किसानों को आशंका है कि इससे शुगर मिल में अव्यवस्था का माहौल पैदा हो सकता है और इसे लेकर उन में भारी रोष है । वे अधिकारियों से लेकर नेताओं तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। उनकी समस्या का समय रहते हल किया जाए लेकिन उनके अनुसार उनकी समस्या को कोई सुनने वाला नहीं है।

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    गन्ना बिजाई क्षेत्र में उतार-चढ़ाव होने की वजह से सभी सहकारी मिलों में पड़ता (BOND)सिस्टम लागू किया गया है

हालांकि दो दिन पहले ही केंद्र सरकार ने खरीफ की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने का फैसला किया था जिसे लेकर देश में सकारात्मक माहौल पैदा हुआ है । मगर पानीपत में किसानों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा । अधिकारियों को किसानों के साथ मिल बैठकर इस समस्या का कोई सर्वमान्य हल निकालना चाहिए जिससे किसी भी पक्ष को नुकसान की गुंजाइश ना रहे ।


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सिटी तहलका डेस्क 

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