सरप्लस गन्ना नहीं लेने का विरोध, किसानों ने रुकवा दिया कांटा

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पानीपत शुगर मिल प्रशासन पर गन्ने की खरीद-फरोख्त में भेदभाव का आरोप लगाकर मंगलवार को किसानों ने गन्ना कांटे को जबरन रुकवा दिया। सभी किसान शुगर मिल प्रशासन की कार्यशैली के विरोध में प्रदर्शन करते हुए धरने पर बैठ गए। किसानों का ये भी आरोप था कि शुगर मिल मैनेजमेंट गन्ना उत्पादक किसानों का 4 लाख 55 हजार क्विंटल सरप्लस गन्ना नहीं ले रहा है। इसलिए उन्होंने ये कदम उठाया। उन्होंने गन्ना पिराई में भी भेदभाव की नीति का आरोप लगाया। इसके मद्देनजर वहां पुलिस भी तैनात कर दी गई थी।

कांटा बंद होने की सूचना मिलते ही भाकियू के जिला प्रधान भी वहां पहुंच गए। इसके बाद शुगर मिल के डायरेक्टर वीर सिंह भी मौके पर पहुंच गए। भाकियू के जिला प्रधान सुरेश दहिया ने शुगर मिल के डायरेक्टर को बताया कि पानीपत जिले के अंदर अभी भी 5 लाख 65 हजार क्विंटल गन्ना किसानों के खेतों खड़ा हुआ है। यह सर्वे खुद शुगर मिल द्वारा ही करवाया गया है। जिसमें 1 लाख 10 हजार क्विंटल गन्ना ही बांड किया गया है। जबकि 4 लाख 55 हजार क्विंटल गन्ना अभी तक खेतों में ही है।

भाकियू नेताओं ने किसानों के साथ चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक खेतों में खड़े सरप्लस गन्ने की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक वे कांटा नहीं चलने देंगे। एमडी शुगर मिल वीर सिंह ने भाकियू सदस्यों और प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच जाकर कहा कि 5 लाख 65 हजार क्विंटल गन्ने में 1 लाख 10 हजार क्विंटल गन्ने की बांडिंग है। जबकि 1 लाख क्विंटल गन्ना महम शुगर मिल में भिजवाया जाएगा, जबकि इतना ही जींद शुगर मिल में भेजेंगे। इसके बाद बाकी बचे गन्ने को भी पानीपत शुगर मिल ही खरीदेगी।

एमडी के इस आश्वासन के बाद ही किसानों का गुस्सा शांत हुआ। इसके बाद उन्होंने अपना धरना-प्रदर्शन बंद कर कांटा पुनः शुरू करवाया। किसानों ने कहा कि अगर शुगर मिल प्रशासन ने उन्हें किसी भी तरह का झूठा आश्वासन दिया तो किसान चुप नहीं बैठेंगे। इस पर वीर सिंह ने कहा कि किसानों को कोई पेरशानी नहीं आने दी जाएगी। गन्ने की पिराई अभी चल रही है। वहीं किसानों का कहना है कि मिल को काफी पहले ही गन्ना ले लेना चाहिए था।


by
जितेंद्र शर्मा 
सिटी तहलका 

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