मंत्री विज का फैसला असंवैधानिक।। इनेलो नेता पुष्पेंद्र ने भेजा सीएम को पत्र 

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पानीपत विशेष स्टोरी

इनलो नेता पुष्पेंद्र शर्मा ने पानीपत के अशोक नगर में उनके 600 वर्ग गज के प्लाॅट पर ग्रीेवेंस कमेटी की मिटिंग के दौरान लिए गए फैसले को असंवैधानिक और राजनैतिक दवाब से ग्रेसित बताया है। उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले संबंधित प्रकरण पर आनन-फानन में जांच कमेटी गठित कर मंत्री अनिल विज ने अपने पद व प्रतिष्ठा को भी ठेंस पहुंचाई है। अब उन्हें पानीपत जिला भाजपा का प्रभारी भी बनाया गया है, इसलिए भविष्य में उनकी निष्पक्षता पर उन्हें और ज्यादा संदेह रहेगा। वे इस फैसले को लेकर सोमवार को पानीपत सांझा मंच के बैनर तले डीसी से मिले। उन्होंने इस इस मामले को लेकर मंत्री विज द्वारा लिए गए फैसले से परेशान होकर डीसी सुमेधा कटारिया के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को भेजा है। पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री से पानीपत जिले में कष्ट निवारण समिति का चेयरमैन का पदभार किसी अन्य मंत्री को दिए जाने की भी मांग की है।

बता दें कि अशोक नगर में एक 600 वर्ग गज के प्लाॅट पर इस समय इनेलो नेता पुष्पेंद्र शर्मा और शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी व उनके पति सुरेंद्र रेवड़ी के बीच घमासान चल रहा है। एक तरफ विधायक उस प्लाॅट को पार्क की जमीन बताकर मामला ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग तक ले जा रहे हैं, वहीं इनेलो नेता पुष्पेंद्र शर्मा इस प्लाॅट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके हक में फैसला दिए जाने का दावा कर रहे हैं। मामले पर पूरी बहस उस समय छिड़ गई, जब विधायक रोहिता रेवड़ी ने इस मामले को 29 जून को पानीपत में आयोजित ग्रीेवेंस कमेटी की मीटिंग में मंत्री अनिल विज के समक्ष रख दिया और विज ने उस पर एक तरफा फैसला सुनाते हुए आनन-फानन में इसकी जांच के लिए एक भाजपा नेता और एक पार्षद की कमेटी गठित कर दी। जबकि इस मामले पर बोलने आए विरोधी पक्ष के लोगों को मीटिंग रूम में घुसने तक नहीं दिया गया। इसी बात से क्षुब्ध होकर पुष्पेंद्र शर्मा ने सोमवार को डीसी सुमेधा कटारिया से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन प्रेषित किया।

  • एक भाजपा नेता और एक पार्षद की कमेटी गठित कर दी। जबकि इस मामले पर बोलने आए विरोधी पक्ष के लोगों को मीटिंग रूम में घुसने तक नहीं दिया गया।
ये है पुष्पेंद्र शर्मा का आरोप 

पुष्पेंद्र शर्मा ने सीएम मनोहर लाल को भेजे ज्ञापन में कहा है कि करीब 7 महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस प्लाॅट पर मलकीयत को स्वीकार कर उनके हक में फैसला सुनाया था। उनका आरोप है कि इसके बाद भी भाजपा से शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी व उनके पति सुरेंद्र रेवड़ी ने अपने निहित स्वार्थ के चलते जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में एक शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर इस प्लाॅट को विवादित तरीके से पेश किया है। उनके दवाब में आकर नगर निगम पानीपत के अधिकारियों ने शर्मा परिवार के इस कमर्शियल प्लाॅट का नक्शा अचानक रद्द कर दिया है। यह सब इस मामले में मंत्री विज द्वारा असंवैधानिक फैसले के बाद हुआ है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि नक्शा रद्द करने से पहले शर्मा परिवार को अपनी सफाई देने तक का मौका नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, निगम ने नक्शा रद्द करने के पत्र के साथ एक जांच रिपोर्ट भी संलग्न की हुई है। जिसके अनुसार प्लाॅट को केंद्र सरकार की मलकीयत करार देते हुए खसरा नंबर 4250 बताया गया है। जबकि शर्मा परिवार के इस प्लाॅट के खसरा नंबर 4178, 4245, 4246, 4247, 4249 व 4252 हैं। इससे साफ जाहिर है कि प्रशासन और नगर निगम ने शर्मा परिवार पर दमन चक्र चलाने, उनके नक्शे को रद्द करने व विधायक पति सुरेंद्र रेवड़ी को खुश करने के लिए काफी समय से गलत तथ्यों के आधार पर सजिश कर रहा है।


by
सिटी तहलका डेस्क

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