मजदूर दिवस पर बोले शिक्षित युवा, पढ़ाई में 80 प्रतिशत अंक लेकर रहे अव्वल, नौकरी लगी नहीं, अब मजदूरी ही एकमात्र सहारा

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हिंदुस्तान समेत पूरे विश्व के कई देशों में 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है, लेकिन आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी हिंदुस्तान में मजदूरों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। रिपोर्ट में चैंका देने वाले आकडे़ सामने आए। हर क्लास में अव्वल रहने वाले नौजवान भी मजदूरी कर रहे हैं। इन पढ़े-लिखे मजदूरों से जब सिटी तहलका ने बात की ता उनका था कि रोजगार नहीं है, इसलिए आखिरकार उनके सामने पेट भरने के लिए मजदूरी ही एकमात्र रास्ता है।

पानीपत के सरकारी अस्पताल की नई बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले बिहार के हसन ने बताया कि दसवीं क्लास से लेकर 12वीं तक उन्होंने 75 से 80 प्रतिशत लिए हैं, लेकिन रोजगार फिर भी नहीं मिला, जिसके चलते बिहार से 500 किलोमीटर दूर आकर उन्हें हरियाणा में मजदूरी करनी पड़ रही है।

सिटी तहलका को एक महिला मजदूर ने बताया कि वह मध्यप्रदेश की रहने वाली है। अपने बच्चों को आठवीं क्लास तक ही पढ़ा पाई। लेकिन खर्चा पूरा करने के लिए बच्चे की पढ़ाई छुड़वा कर हरियाणा में आकर मजदूरी कर रही है। मां और बेटा मुश्किल से 1 महीने में 10 हजार के करीब रुपए कमाते हैं।आजादी के इतने वर्षों बाद भी मजदूरों की स्थिति अंग्रेजी काल के बंधुआ मजदूरों जैसी ही है।कंस्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहे नजदीकी गांव के एक मजदूर अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें सिर्फ 300 रुपये मजदूरी मिलती है जबकि उसके परिवार में 6 सदस्य हैं। ऐसे में आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि इतने पैसों में 6 सदस्यों का परिवार कैसे गुजर-बसर करता होगा। उनका कहना है कि दुनिया की तरक्की में मजदूरों का हाथ होता है, उसी मजबूर की आज भी दयनीय स्थिति है।

                    लेकिन सिटी तहलका इस मुद्दे पर संवेदनशील है और संजीदगी से कार्य करते हुए इस मुद्दे को आप जनता तक ला रहा है। भविष्य में भी हमारा यही प्रयास रहेगा।

विस्तार से इस खबर को देखने के लिए इस लिंक पर जाकर असलियत देंखे

 


BY
 
प्रदीप रेढ़ू
 
 
सिटी तहलका

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