खुद का घर नहीं, तीनों मौसमों की मार झेल चिक बनाकर करते हैं गुजर-बसर

पानीपत

पानीपत में कुछ परिवार बाहर से आकर चिक बनाकर 15 सालों से इसी से अपना गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। यही नहीं, इनके छोटे-छोटे बच्चे भी उनके साथ ही इसी कारोबार में मशगूल हैं। इनके पास न घर है न कोई और सहारा। मजबूरन सड़कों के किनारे बैठकर हर मौसम की मार झेलकर ये परिवार इसी कारोबार से दो वक्त की रोटी का जुगाड कर रहे हैं। यही चिक दूसरों के घरों की शोभा बढ़ाती हैं। सिटी तहलका ने इनकी व्यथा को नजदीक से जानने की कोशिश की।

बता दें कि बड़े ही नहीं वरन परिवार के छोटे-छोटे बच्चे भी इस करोबार में ऐसे रमे हुए हैं, जैसे ये भी सिर्फ इसी काम के लिए बने हैं। जब बच्चों से पूछा गया कि वे स्कूल जाते हैं या नहीं, तो उन्होंने बताया कि स्कूल तो जाते हैं, लेकिन उन्हें इस काम में ज्यादा आनंद आता है। सिटी तहलका ने देखा कि परिवार को एक मात्र छह साल का बच्चा अंकुश बांस की छोटी-छोटी लकड़ियों को साफ करने में एक मंझे हुए कारीगर की तरह लगा है। 6 साल का अंकुश तेजधार छुरी से बांस की लकड़ियों की ऐसे सफाई करता है, जैसे वह इसका मास्टर हो। कैमरे के सामने बोलते हुए घबराता है। उसकी मां भी उसको बोलने से रोक देती है। मां का कहना है कि कहना है कि मना करने पर भी बच्चा जबरन इस काम को करता है। बच्चा यह भी नहीं जानता कि उसके स्कूल का नाम क्या है, सिर्फ ये जरूर मालूम है कि वह कक्षा 1 में है। वह अपनी मां के साथ मिलकर चिक और चटाई बनाने का काम करता है।

बता दें कि यह चिक और चटाई बांस की तीलियों से तैयार की जाती है। एक चिक बनाने के लिए 1 से 2 दिन लग जाते हैं। इसके लिए परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ काम करते हैं। जैसे ही गर्मियां शुरू होती हैं, इन चिकों की डिमांड बढ़ जाती है। उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी भारत का कहना है कि यह चिक गरमी में गरमी से, और सर्दियों में सर्दी से बताती है। एक चिक की कीमत साइज पर निर्भर करती है। भारत ने बताया कि उनका पूरे परिवार का पालन-पोषण इसी पर निर्भर है। उन्हें पानीपत से ही बांस की लकड़ियां मिल जाती हैं। उसके बाद वे इनकी सफाई करते हैं। उसके बाद इन्हें टुकड़ों में काटकर साफ किया जाता है। इन टुकड़ों को इकट्ठा करके उसमें कपड़ा लगाया जाता है। फिर इसकी बुनाई की जाती है। इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी यह काम करती आ रही है। 


BY
जितेंद्र शर्मा 
सिटी तहलका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *